उज्जयिनी में वेदों के रहस्य जान सकेंगे

Simhastha-Loboउज्जयिनी नगर प्राचीन समय में वैदिक शिक्षा का मुख्य केन्द्र माना जाता था। इस नगर की वैदिक शिक्षा की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी। तब से लेकर आज भी उज्जैन वेद शिक्षा में अपनी खास पहचान बनाये हुए है। पूरा संसार जब अज्ञान, अशिक्षा और अंधकार में भटक रहा था तथा आज के कई आधुनिक माने जाने वाले राष्ट्रों का उदय भी नहीं हुआ था, तब भारत के नाभि-स्थल उज्जयिनी में महर्षि सान्दीपनि का गुरुकुल स्थापित किया गया था। इस ख्याति को आगे बढ़ाने के लिये और वैदिक ज्ञाताओं की नई पीढ़ी तैयार करने के लिये उज्जैन महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा नया भवन तैयार करवाया गया है। नये भवन में वैदिक शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों की कक्षाएँ शीघ्र शुरू हो रही हैं।

यहाँ वेदों की प्रमुखता को ध्यान में रखते हुए अध्यापन कार्य करवाया जायेगा। महर्षि पतंजलि संस्कृत शोध संस्थान मध्यप्रदेश द्वारा तैयार किये गये नये भवन में शुक्ल यजुर्वेद के गूढ़ रहस्य उदघाटित होंगे। यहाँ प्रथमा, पूर्व मध्यमा और उत्तर मध्यमा की कक्षाएँ संचालित होंगी। प्रथमा में छठवीं, सातवीं और आठवीं की कक्षाएँ चलेगी। इन कक्षाओं में शुक्ल यजुर्वेद में वर्णित मंत्रों और पूजा-पद्धति की शिक्षा देकर नयी पीढ़ी के पंडित बनाये जायेंगे। कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों को सभी प्रकार की पूजा में उपयोग में आने वाले मंत्रों की शिक्षा दी जायेगी। विद्यार्थियों को शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राक्ष अध्याय में शामिल श्लोकों और मंत्रों का मंतव्य समझाया जायेगा। पूर्व मध्यमा की नवमीं और दसवीं कक्षाओं में बड़े-बड़े यज्ञों में पढ़े जाने वाले श्लोकों और मंत्रों का ज्ञान दिया जायेगा। उत्तर मध्यमा में माध्यदिनी संहिता के 40 अध्याय की शिक्षा में मूल ग्रंथ और वेदों की भाषा की तमाम जानकारी दी जायेगी।

उज्जैन में 12 करोड़ 56 लाख की लागत से यह भवन बनकर तैयार हुआ है। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा नये भवन में वैदिक शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को छात्रावास और भोजन की सुविधा उपलब्ध करवायी जायेगी। सिंहस्थ के दौरान उज्जैन पहुँचने वाले अनेक धर्मगुरु भी यहाँ पहुँचकर गतिविधियों की जानकारी लेंगे। (मुकेश मोदी)

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