जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम से बढ़ेगी विकास की गति

जलग्रहण प्रबंधन की उपलब्धता की वास्तुस्थिति की जानकारी डिजिटल रूप में

मैपकास्ट की मदद से वाटरशेड कार्यक्रम में नए प्रयोग

banner01मध्यप्रदेश के सभी जिलों में जलग्रहण प्रबंधन की उपलब्धता की वास्तुस्थिति की जानकारी अब डिजिटल रूप में प्राप्त की जा सकेगी, जिससे जिलों में औद्योगिक विकास, कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी तथा रोजगार की संभावनाओं का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सूदूर संवेदन उपयोग केन्द्र(आरएसएसी) के भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) एवं इमेज प्रोसेसिंग डिवीजन ने इंटीग्रेटेड़ वाटरशेड डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईडब्ल्यूएमपी) के अंर्तगत वैज्ञानिक नवाचार शुरू किए है।

जीआईएस एवं इमेज प्रोसेंसिग डीवीजन के प्रभारी प्रधान वैज्ञानिक ड़ा. आलोक चौधरी ने इस महात्वाकांक्षी कार्यक्रम के वैज्ञानिक पहुलुओं और संदर्भो की जानकारी देते हुए बताया कि इस वैज्ञानिक नवाचार से जिले में जलग्रहण प्रबंधन की उपलब्धता का विस्तार, औद्योगिक विकास, कृषि उत्पादन में बढोत्तरी और रोजगार की नए अवसर पैदा होगे। उन्होने बताया कि आईडब्लूएमसी के अन्तर्गत जिन बिन्दुओं को सम्मलित किया गया है उनमें जिलें में भूमिगत और बाहरी स्रोत्रो में जल उपलब्धता, जल प्रबंधन के आधार पर उद्धोग धन्धों की संभावना, जल आधारित उत्पादित की जाने वाली फसले, श्रम उपलब्धता की स्थित आदि है। कार्यक्रम में निम्न उत्पादकता, कुपोषण, जल की कमी, भू-क्षरण, जैसे बिन्दुओं का समावेश किया गया है।

उन्होने बताया कि वाटरशेड कार्यक्रम के अंतर्गत सुदूर संवेदन आधारित नियोजन के लिए कार्टोसैट-1 सैटलाइट हाई रिजालूशन(उच्च विभेदन) पैनक्रोमेटिक डाटा, लिस-4 हाई रिजालुशन मल्टीस्पैक्ट्रल डाटा तथा जियो-रेफरेंस खसरा मानचित्रो का उपयोग किया जा रहा है। इस डाटा से 1.10000 मापक मानचित्रों, माइक्रो वाटरशेड बाउड्री डेनेज, खसरा तथा कंटूर मैप्स(समोच्च मानचित्र) तैयार किये गये है। रिमोट सेसिंग एवं जीआईएस के विशेषज्ञों ने मानचित्रों का उपयोग करते हुए चयनित उपयुक्त स्थानों पर विभिन्न वाटरशेड डेवलपमेंट कार्य जैसे गली प्लग, चेक डेम, स्टाप डेम, लेक, फार्म पोंड, कंटूर ट्रेंच, फील्ड बंड प्लांटेशन और मीडो डेवलपमेंट को दर्शाया गया है जो सूक्ष्म प्लानिंग के लिए अति उपयोगी है।

एकीकृत जल ग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम – मध्यप्रदेश राज्य शासन ने केन्द्रीय प्रयोजित कार्यक्रमों को एक साथ रखने के उद्देश्य से इंटीग्रेटेड वाटरशेड मैनेजमेंट प्रोग्राम (आईडब्ल्यूएमपी) को शासन के फ्लैगशिप कार्यक्रम के रूप में शुरू किया था। अब इसमें ड्राट प्रोन एरिया प्रोग्राम(डीपीएपी), डेजर्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम(डीडीपी), एवं इंटीग्रेटेड वेस्टलैण्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईडब्ल्यूडीपी) को सम्मिलित कर इसे एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन का नाम दिया गया है। इसमें पार्टीसिपेटरी पद्धति अपनाकर जैव भौतिकी पक्षों के अलावा सामाजिक एवं संस्थागत पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

कार्यक्रम के उद्देश्य- प्रदेश में वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में जल सरक्षण , जल संवर्धन, मृदा संरक्षण के अध्ययन को सम्मिलित किया गया है। इस वैज्ञानिक अध्ययन से प्राप्त डाटा का उपयोग जिलों के लोगों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास एवं रोजगार के ऩए अवसरों के रूप में किया जा रहा है।

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