तुलसी गुणों की खान

रविन्द्र स्वप्निल प्रजापति 

हममें से संभवतः ज्यादातर लोग तुलसी के पौधे को पहचानते होंगे। सभी हिन्दुओं के घरों में प्रायः तुलसी चौरा होता है जहाँ प्रतिदिन इसकी पूजा की जाती है । यह न सिर्फ हमारे घरों में पूजनीय है, बल्कि इसमें कई औषधीय गुण भी हैं। इसका स्‍वाद भले ही थोड़ा अरुचिकर (कड़वा) होता है  लेकिन यह हमारे सेहत के लिए बहुत ही लाभकारी है। विशेषकर दिल सम्बन्धी बिमारियों के लिए यह अत्‍यंत उपयोगी माना जाता है। tulsi_145371

  • यह पित्तनाशक, वातनाशक, कुष्ठरोग निवारक, पसली में दर्द, खून सम्बन्धी विकार, कफ और फोड़े-फुन्सियों के उपचार में बहुत लाभकारी है।
  • तुलसी के महत्व का जिक्र हमारे कई ऐतिहासिक पुस्‍तकों में मिलता है। वैद्यजन इसका प्रयोग प्राचीन काल से ही करते आ रहे हैं । आपने गौर किया होगा कि मंदिरों में  भगवान् का भोग लगाने या किसी भी तरह के आयोजन जहाँ प्रसाद का वितरण होता है, उसमें तुलसी पत्र अवश्य डाला जाता है । इन सब में तुलसी पत्र के प्रयोग के पीछे एक ही कारण है कि लोग तुलसी का प्रयोग अपनी दैनिक जीवनचर्या में लगातार करें तो कई बीमारियों का इलाज परोक्ष रूप में ही हो जायेगा ।
  • यूनानी चिकित्सा पद्धति में तुलसी के सेवन को  बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है । इसके सेवन से रोगाणु नष्ट होने लगते हैं । यह हृदय में शक्ति भर देने वाली एक महाऔषधि है। कहा जाता है कि अगर आपके घर के आस – पास तुलसी के पौधे लगे हैं तो वहां की हवा शुद्ध रहेगी यानि तुलसी वायु को परिशोधित करती है। आस – पास के विषैले कीटाणु प्रभावहीन हो जाते हैं ।
  • अंग्रेजी चिकित्सा प्रणाली (Allopath)  में तो इसे सर्व गुण सम्पन्न बताया गया है। Doctors का कहना है कि तुलसी मेंAntibiotic गुण होता है जो मलेरिया रोग  के इलाज के लिए बहुत जरुरी होता है | अभी हाल ही में दिल्ली में Dengueका कहर बरपा और बहुत लोगों की जानें चली गयी । अब तो जागरूक लोग इसके बचाव में पहले से ही तुलसी की गोली का सेवन शुरू कर देते हैं क्योंकि इससे शरीर का प्रतिरोधी क्षमता बढ़ जाती है और इसका कोई Side Effect  भी नहीं होता है । इसके सेवन से सर्दी, खांसी, निमोनिया (Pneumonia) समाप्त हो जाता है।
  • कड़वी और तीखी तुलसी के सेवन से सांस, कफ और हिचकी में शीघ्र आराम मिलता है। उल्‍टी होने, दुर्गन्ध, कुष्ठ, विषनाशक तथा मानसिक पीड़ा को मिटाने में तुलसी बड़ी कारगर सिद्ध होती है।
  • तुलसी की पीली पत्तियों में हरे रंग का एक तैलीय पदार्थ पाया जाता है जो जब हवा में मिलते हैं तो इससे कई तरह के रोगाणु नष्ट हो जाते हैं ।
  • पानी में तुलसी डालकर पीने से कई बीमारियां समाप्‍त होती हैं। इसको पानी में मिलकर पीने से मुखमण्डल का तेज निखर कर आता है। तुलसी का प्रयोग करने से स्मरणशक्ति बढ़ती है। तुलसी में एक विशेष प्रकार का Acid पाया जाता है जो दुर्गन्ध को भगाता है। भोजन के पश्चात तुलसी की दो-चार पत्तियां चबा लेने से मुंह से दुर्गंध नहीं  आती है। रात को सोते समय यदि तुलसी को कपूर को हाथ-पैरों पर मालिश कर लिया जाए तो मच्छर पास नहीं आयेंगे।
  • दमा अथवा तपैदिक के रोगी को तुलसी की लकड़ी हमेशा अपने पास रखनी चाहिए। तुलसी की माला पहनने से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा कम होता है। तुलसी के प्रयोग से शरीर के सफेद दाग मिट जाते हैं और सुन्दरता बढ़ती है। क्योंकि यह हमारे खून को साफ़ करता है। नींबू के रस में तुलसी की पत्तियों का रस मिलाकर चेहरे पर लगाया जाये तो चर्मरोग मिटता है और चेहरा खिलता है। तुलसी की पत्तियों को चाय पट्टी कि तरह भी प्रयोग में लाया जा सकता है ।
  • इसकी पत्तियों को सुखाकर उसमें दालचीनी, तेजपत्र, सौंफ, बड़ी इलायची, अगियाघास, बनफशा, लाल चंदन और ब्राह्मी को मिलाकर – कूट लें । उस पाउडर को चाय के स्थान पर प्रयोग किया जा सकता है ।
  • दमा या Asthma के मरीज को तुलसी की 10 पत्तियों के साथ वसा का 250 mL पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर दें। यह काढ़ा गर्म करके प्रतिदिन सुबह में पिलायें ।
  • खाँसी और बुखार के मरीज  को 20 तुलसी की पत्तियों को 200 mL पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर दें। यह काढ़ा भी गर्म करके सुबह में पिलायें।
  • Chickenpox या Measles होने पर कभी -कभी दाने निकलने में वक्त लग जाता है तो तुलसी की पत्तियों का काढ़ा केशर के साथ मिलाकर पिलायें । इससे दाने तेजी से निकलते हैं और रोगी को राहत मिलती है। इसे मलेरिया में भी पिया जा सकता है।
  • दस्त लगने या उल्टियाँ होने, मितली आने, चक्कर आने  पर तुलसी के ताजे रस के गिलास में कालीमिर्च डालकर पिलायें।
  • स्वस्थ और सफेद दाँत पाने के लिए तुलसी और नीबू के रस को मिलाकर दाँतों की मालिश करें। यही रस चेहरे की कांति बढ़ाने के लिए भी प्रयोग में लाया जा सकता है।
  • तुलसी रक्त में cholesterol की मात्रा नियंत्रित करने की क्षमता रखती है।
  • शरीर के वजन को नियंत्रित रखने हेतु भी तुलसी अत्यंत गुणकारी है। इसके नियमित सेवन से भारी व्यक्ति का वजन घटता है और पतले व्यक्ति का वजन बढ़ता है यानि  तुलसी शरीर के वजन को  आनुपातिक रूप से नियंत्रित करती है।
  • तुलसी के रस की कुछ बूँदों में थोड़ा-सा नमक मिलाकर बेहोश व्यक्ति की नाक में डालने से उसे शीघ्र होश आ जाता है।
  • चाय बनाते समय तुलसी के कुछ पत्ते साथ में उबाल लिए जाएँ तो सर्दी, बुखार एवं मांसपेशियों के दर्द में आराम मिलता है।
  • 10 ग्राम तुलसी के रस को 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी एवं अस्थमा के रोगी को ठीक किया जा सकता है।
  • तुलसी के काढ़े में थोड़ा-सा सेंधा नमक एवं पीसी सौंठ मिलाकर सेवन करने से कब्ज दूर होती है।
  • दोपहर भोजन के बाद तुलसी की पत्तियाँ चबाने से पाचन शक्ति मजबूत होती है।
  • 10 ग्राम तुलसी के रस के साथ 5 ग्राम शहद एवं 5 ग्राम पिसी कालीमिर्च का सेवन करने से पाचन शक्ति की कमजोरी समाप्त हो जाती है।
  • दूषित पानी में तुलसी की कुछ ताजी पत्तियाँ डालने से पानी का शुद्धिकरण किया जा सकता है।
  • प्रतिदिन सुबह पानी के साथ तुलसी की 5 पत्तियाँ निगलने से कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों एवं मानसिक कमजोरी से बचा जा सकता है। इससे स्मरण शक्ति को भी मजबूत किया जा सकता है।
  • भुने हुए लौंग (4 से 5) के साथ तुलसी की पत्ती चूसने से सभी प्रकार की खाँसी से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • तुलसी के रस में खड़ी शक्‍कर मिलाकर पीने से सीने के दर्द एवं खाँसी से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • तुलसी के रस को शरीर के चर्मरोग प्रभावित अंगों पर मालिश करने से दाग, एक्जिमा एवं अन्य चर्मरोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • तुलसी की पत्तियों को नींबू के रस के साथ पीस कर पेस्ट बनाकर लगाने से एक्जिमा एवं खुजली के रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।

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