पर्यावरण मित्र प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा

डाॅ. प्रमोद कुमार वर्मा मध्यप्रदेश सरकार विज्ञान और प्रौद्योगिकी सलाहकार हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित वे अनेक काम प्रदेश के लिए कर रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार का नारा है विकास सबके लिए, और डाॅ वर्मा ने विकास को विज्ञान से जोड़ने की कोशिश की है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मामले में सरकार की एजेंसी मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के वे महानिदेशक हैं। अपने कार्यकाल के दौरान इन्होंने परिषद् को देशभर में नंबर एक पर ला खड़ा किया है। डाॅ. प्रमोद वर्मा पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी उतने ही प्रतिबद्ध हैं। बकौल प्रो. वर्मा मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के द्वारा पर्यावरण को आम लोगों का विषय बनाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। अपने प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि परिषद् कई स्तरों पर पर्यावरण के लिए काम कर रही है। कुछ काम तो वे सीधे तौर पर करते हैं, जबकि पर्यावरण से संबंधित काम करने वाली संस्थाओं को अनुदान देकर और कुछ प्रयास संस्थाओं के साथ मिलकर करते हैं। डाॅ. वर्मा के प्रयासों से पिछले वर्ष जलवायु परिवर्तन शोध केन्द्र स्थापित किया गया। आम तौर पर इस प्रकार के केन्द्र या तो तटीय क्षेत्रों या ग्लेशियर वाले क्षेत्रों में ही होते हैं। मैदानी इलाकों में इस प्रकार के शोध केन्द्र की कमी रही है। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में 70 स्वचालित मौसम केन्द्रों की स्थापना भी कर रहा है। इसके द्वारा सभी जिलों में मौसम से संबंधित विभिन्न आंकड़ों का संकलन किया जा रहा है। डाॅ. वर्मा के अनुसार जलवायु परिवर्तन का सबसे पहले और सबसे अधिक प्रभाव परत भूमि और अनुपयोगी भूमि पर ही होता है। इनके प्रयासों से प्रदेश की परत भूमि और अनुपयोगी जमीन का उपचार भी किया जा सकेगा। किसानों के लिए मौसम का पूर्वानुमान बहुत ही महत्वपूर्ण है। पर्यावरण के बारे में एक और महत्वपूर्ण काम डाॅ. प्रमोद वर्मा के नेतृत्व में हो रहा है, यह है एग्रोमीटर टावरों की स्थापना। इसके द्वारा प्रदेश विभिन्न क्षेत्रों में धरती के भीतर और बाहर (उंचाई) कार्बन स्तर को मापने और उसके अनुसार आवश्यक कार्यवाई करने का प्रयास किया जा रहा है। इसरो की मदद से इन टावरों के द्वारा कार्बन स्तर की न सिर्फ निगरानी की जा रही है, बल्कि उसके यथोचित स्तर को बनाए रखने का प्रयास भी किया जा रहा है। डाॅ. वर्मा के अनुसार पर्यावरण के क्षेत्रों में कार्यरत अनेक संस्थाओं को परिषद् की ओर से अनुदान भी दिया जा रहा है। ये संस्थाएं पर्यावरण संबंधी विषयों – परमाणु उर्जा, पवन उर्जा, जल, मृदा और वन संरक्षण संबंधी शोध व जागरूकता का कार्य कर रही हैं। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् बीजों के संरक्षण और विकास का ऐतिहासिक काम किया है। प्रदेश में पाई जाने वाली धान की लगभग 50 प्रजातियों का संरक्षण व संवद्र्धन किया गया है। पर्यावरण की दृष्टि से नगरों का नियोजन एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। ग्राम एवं नगर निवेश विभाग को नगरों के मास्अर प्लान तैयार करने में परिषद ने काफी तकनीकी मदद की है। प्रथम चरण में अब तक 19 शहरों का मास्टर प्लान तैयार हो चुका है। दूसरे चरण में 22 शहरों की योजना तैयार किया जाना प्रस्तावित है। परिषद् की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. वर्मा कहते हैं – गुना जिले के सभी गांवों के सभी जल स्रोतों का जल परीक्षण किया गया है। इसे माॅडल मानकर सभी जिलों के जलस्रोतों का परीक्षण किये जाने की तैयारी हो रही है। हम अनेक स्तरों पर कई प्रकार से सरकार की विकास योजनाओं में मदद कर रहे हैं। डाॅ. वर्मा की मंशा है कि विज्ञान को प्रयोगशाला से बाहर लाकर जमीन पर उतारा जाए। इसी लिए वे विकास को विज्ञान से तथा विकेन्द्रिकरण को क्षेत्र आधारित बनाने पर जो दे रहे हैं। मध्यप्रदेश का पर्यावरण जैव-विविधता आधारित है। परिषद् की अगुआई में सभी जिलों का संसाधन एटलस तैयार हुआ है। इसमें मध्यप्रदेश की जैव विविधता और पर्यावरणीय सम्पन्नता की झलक मिलती है।

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