पौधों के विकास के लिए बाधक है कृत्रिम प्रकाश

article-1193964-056520FE000005DC-263_468x302रात में कृत्रिम प्रकाश के कारण न सिर्फ पौधों का विकास बाधित हो रहा है , बल्कि उन पौधों पर आश्रित कीटों की संख्या में भी गिरावट आई है। एक ताजा अध्ययन में यह खुलासा हुआ है । अध्ययन के अनुसार, रात्रि के समय स्री आट लैप के कारण होने वाला कृत्रिम प्रकाश बेहद जटिल तरीके से प्राकृतिक वातावरण को दूषित करता है , जिसका शायद अनुमान भी नही लगाया जा सकता है। इंगलैड के एक्सेटर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक केविन गैस्टन ने कहा, यूरोपीय अनुसंधान परिषद के आर्थिक मदद पर लंबी अवधि तक हुए प्रयोगो में शुरूआती तथ्य के रूप में ये बातें सामने आई है। शोध के शुरूआती तथ्यों से यह पता चलता है कि रात्रि में कृत्रिम प्रकाश सबसे साधारण जीव समुदाय में भी पौधों के लिए कितना प्रभावी हो सकता है। चूकिं विश्व स्तर पर रात में कृत्रिम प्रकाश का दायरा बढता जा रहा है, इसलिए इसके वृहद पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंता जताई जा रही है। अनुसंधानकर्ताओं ने एक कृत्रिम घास के मैदान पर, जिसमें अकशेरूकीय प्रजाति के जीव भी थे, को कृत्रिम प्रकाश की व्यवस्था की गई। उल्लेखनीय है कि दो तरह के प्रकाश की व्यवस्था की गई जिसमें एक अत्याधुनिक एलईडी से प्रकाशमान दूधिया रोशनी जबकि पांरपरिक पीले रंग का प्रकाश देने वाले स्रीयाट लैप की रोशनी की व्यवस्था की गई। पीले प्रकाश के कारण एक खास किस्म की घास में फूलों के खिलने में कमी देखी गई। इस शोध के अनुसार रात में कृत्रिम रोशनी कर प्राकृति की खाद्य श्रृखंला में जटिलता ला रहें है।

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