प्राकृतिक स्वस्थ जीवन शैली और पर्यावरण पर राष्ट्रीय संगोष्टी

 22, 23, 24  फरवरी  2013.  

प्राकृतिक जीवन और स्वास्थ्य

प्राकृतिक जीवन और स्वास्थ्य

आधुनिक सभ्यता ने भौतिक धरातल पर विचार और आचरण का जो ताना-बाना बुना हैं, जिसमें नैसर्गिकता का लोप होता दिखाई पड़ता हैं। मानव निर्मित यह स्थिति क्रमिक रूप से मानव को प्राकृतिक विचारधारा और प्राकृतिक जीवनशैली से दूर ले जा रही हैं। प्रदूषित पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण दोहन, मानव की सोच, रहन-सहन, खान-पान, आदि में आये परिवर्तनों के कारण मानव सामाजिक दुष्प्रभावों के साथ-साथ कई मनोदैहिक विकारों से त्रस्त हो रहा हैं।

मानव के स्वस्थ एवं सूखी जीवन के लिए मानव और प्रकृति के मध्य सह-अस्तित्व का जो संबंध हैं उसे जानने तथा तद अनुसार विवेकपूर्ण जीवनशैली विकसित करने की आवश्यकता पर प्रबुद्ध चिंतक, दक्ष चिकत्सक बल दे रहे है। इस आवश्यकता को अनुभव करते हुए, आनन्द केन्द्र ने ग्वालियर स्थित विवेकानंद नीडम के प्राकृतिक, मनोरम एवं अध्यात्मिक परिवेश में“प्राकृतिक स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण” इस विषय पर दिनांक 22, 23, 24 फरवरी 2013 (शुक्रवार, शनिवार, रविवार) को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है। 

अधिक जानकारी हेतु कृपया संलग्न पत्रक देखे अथवा संपर्क करे

1. डा. सागर कछवा  ( 07566816013)
2. डा. ए के अरुण ( 09868809602)


इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्राकृतिक जीवनशैली के मायने, प्रकृति और सभ्यता के अंतर्द्वंद्व में सह-जीवन की अनिवार्यता, असाध्य रोगों में प्राकृतिक जीवनशैली का योगदान, स्वस्थ जीवन के लिए आहार-विहार नियोजन, पेड़-पौधे और हमारा स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवन के लिए स्वस्थ पर्यावरण तथा बाजार और हमारा स्वास्थ्य एवं आदि महत्वपूर्ण विषयों पर शोधपूर्ण जानकारी का आदान-प्रदान होगा। जिससे जन सामान्य भी जीवन स्वास्थ्य के मनोदेहिक विशेष पहलुओं से परिचित होगे तथा प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति उनका स्वस्थ दृष्टिकोण विकसित हो सकेगा। यह इस आयोजन का रहा उद्देश्य हैं। 
इस आयोजन में प्रकृति प्रेमी, पर्यावरण वैज्ञानिक, दक्ष चिकित्सक तथा प्रबुद्ध चिंतक तथा देश के विभिन्न अकादमिक संस्थाओं से प्रतिभागिओं के शामिल होने की संभावना है। आप से निवेदन है कि इस आयोजन में आप स्वयं अपने स्नेही, मित्रों एवं छात्रों के साथ सहभागी होकर इस वैज्ञानिक उत्सव की शोभा बढ़ाये।
इस अवसर पर एक स्मारिका भी प्रकाशित की जाएगी। अत: आपसे  अनुरोध है कि उपरोक्त विषयों पर अपने शोधपूर्ण लेख, वैज्ञानिक अनुसंधान आप स्मारिका में प्रकाशन हेतु भेज सकते है। 
व्यवस्था की दृष्टी से प्रतिभागियों से निवेदन हैं कि वे अपनी स्वीकृति यथाशीघ्र प्रेषित करने का कष्ट करें। ग्वालियर आने के लिए उत्तर और दक्षिण दिशा की ओर से आने वाली लगभग सभी ट्रेनें ग्वालियर में रुकती हैं। 

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