मध्यप्रदेश में आयुर्वेद विकास के लिये बनेगा सलाहकार मंडल

 आयुर्वेद दवा उद्योग नीति बनेगी, पाँचवें विश्व आयुर्वेद सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने की कई घोषणाएँ

101212n19मध्यप्रदेश में आयुर्वेद को बढ़ावा देने और इसके विस्तार के लिये मध्यप्रदेश आयुर्वेद सलाहकार मंडल का गठन किया जायेगा। यह मंडल आयुर्वेद को वैज्ञानिक रूप से आगे बढ़ाने, इसे आम लोगों के लिये व्यावहारिक बनाने और शोध संबंधी योजनाओं के संबंध में राज्य सरकार को सलाह देगा। बोर्ड में विशेषज्ञों को शामिल किया जायेगा। आयुर्वेद दवा निर्माण कंपनियों के लिये नई आयुर्वेदिक दवा उद्योग नीति बनाई जायेगी। ‘‘संपूर्ण स्वास्थ्य सबके लिये’’ कार्ययोजना में आयुर्वेद को भी शामिल किया जायेगा। पण्डित खुशीलाल शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय को आयुर्वेद में शोध के लिये उत्कृष्ट संस्थान बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ये घोषणाएँ भोपाल में आयोजित पंचम विश्व आयुर्वेद सम्मेलन एवं एक्सपो-2012 के समापन में की। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार, विज्ञान भारती और वर्ल्ड आयुर्वेद फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित विश्व आयुर्वेद सम्मेलन में 40 देश के करीब साढ़े तीन हजार प्रतिनिधियों और तीन लाख लोगों ने एक्सपो में भाग लिया। आयुर्वेद को बढ़ावा देने और आम लोगों में इसके प्रयोग को प्रोत्साहित करने का संकल्प दोहराते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जिलों में होने वाले स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों में आयुर्वेद चिकित्सा के लिये भी शिविर लगाये जाएँगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मध्यप्रदेश को आयुर्वेद की प्रयोगशाला बनाना चाहती है। जल्दी ही आयुर्वेद चिकित्सकों की भर्ती की जायेगी। जिला अस्पतालों में आयुर्वेद चिकित्सक बैठेंगे। आयुर्वेद महाविद्यालयों की स्टाफ एवं अधोसंरचना संबंधी व्यवस्थाएँ सुदृढ़ बनायी जायेगी। आयुर्वेद में डिग्री शुरू करने की पहल की जाएगी। इसके लिये बजट की कमी नहीं आने दी जायेगी। उन्होंने पंचकर्म चिकित्सा के लिये कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिये। श्री चौहान ने कहा कि आयुर्वेद में गंभीर रोगों के उपचार की क्षमता है, जरूरत अनुसंधान को बढ़ावा देने और इस पद्धति में श्रद्धा रखने की है। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी ने कहा कि आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिये आहार-विहार के संबंध में जन-चेतना बढ़ाने की जरूरत है। जीवन शैली बदलने की जरूरत है। मानव, प्रकृति और पर्यावरण के संबंधों को नई दृष्टि के साथ समझना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के पास संपूर्ण स्वास्थ्य की दृष्टि विश्व कल्याणकारी है। भारत को आयुर्वेद मिशन चलाना होगा। आयुर्वेद की आधार-स्रोत वन-संपदा को बचाने के लिये भी जन-अभियान चलाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में दृढ़ विश्वास ही इसे आगे बढ़ायेगा। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को स्थापित करने में मध्यप्रदेश पूरे देश में उदाहरण बनेगा। पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया ने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के प्रति युवाओं के रुझान को देखते हुए यह स्पष्ट हो गया है कि शीघ्र ही आयुर्वेद का विश्व-पटल पर विस्तार होगा। आयुष राज्यमंत्री महेन्द्र हार्डिया ने कहा कि आयुर्वेद के ज्ञान को आपस में बाँटने के लिये कार्यशालाओं की श्रंखला आयोजित की जायेगी। उन्होंने सम्मेलन के आयोजन को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में हो रहे अनुसंधानों का लाभ लोगों तक पहुँचाने के लिये सुनियोजित प्रयास किये जाएँगे। सुपर कम्प्यूटर के निर्माता और विज्ञान भारती के अध्यक्ष डॉ. विजय भाटकर ने कहा कि विज्ञान का लाभ गरीब लोगों तक पहुँचना चाहिए। आयुर्वेद को लोक स्वास्थ्य की प्रमुख चिकित्सा पद्धति के रूप में अपनाने की आवश्यकता है क्योंकि यह मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य एक साथ प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा को जन-मानस के बीच लोकप्रिय बनाने के लिये मध्यप्रदेश को प्रमुख भूमिका निभाना चाहिए। उन्होंने सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि यह आयुर्वेद के पुनरोत्थान में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। विज्ञान भारती के महामंत्री ए. जयकुमार ने कहा कि आयुर्वेद एक परम सत्य है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार को विश्व स्तरीय आयुर्वेद सम्मेलन के लिये धन्यवाद दिया। इस अवसर पर प्रदर्शनी में विभिन्न आयुर्वेद दवा निर्माताओं कंपनियों, संस्थाओं द्वारा लगाये गये स्टॉलों को सजावट और प्रस्तुतिकरण के आधार पर पहला, दूसरा एवं तीसरा पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा पाँच उत्कृष्ट पोस्टर को भी पुरस्कृत किया गया। सर्वश्रेष्ठ स्टॉल में पहला पुरस्कार सोलोमिक्स न्यूट्रोस्युटिकल्स, यूनीज्यूलस लाइफसांइसेस को दूसरा, देविका हर्बल को तीसरा और विंध्या हर्बल्स को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। पूर्व केन्द्रीय मंत्री डा. मुरलीमनोहर जोशी ने कहा – आयुर्वेद के अध्ययन के लिये संस्कृत ज्ञान आवश्यक विश्व आयुर्वेद सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी ने कहा कि स्वदेशी उत्पादन, योग तथा आयुर्वेद से देश के व्यापारिक घाटे को पूरा किया जा सकता है। इसके लिये पेटेंट कानून में अपेक्षित परिवर्तन की जरूरत है। श्री जोशी ने कहा कि दुनिया को प्रभावी और आसान चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के माध्यम से दी जा सकती है। आयुर्वेद में मानव के पूर्ण स्वास्थ्य की कल्पना की गई है जिसमें शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा शामिल है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान के प्रत्येक विद्यार्थी को आयुर्वेद पढ़ना चाहिये। देश के कानूनों में ऐसे परिवर्तन किये जाना चाहिये जिससे आयुर्वेदिक औषधियों के व्यापार में आसानी हो। श्री जोशी ने कहा कि मध्यप्रदेश एक आयुर्वेद विश्वविद्यालय स्थापित करे जिसमें अध्ययन और शोध की व्यवस्था हो। आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्त और उसके पीछे जो दर्शन है उसे समझने के लिये संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है। इसलिये आयुर्वेद के अध्ययन में संस्कृत के पठन-पाठन की अनिवार्यता होना चाहिये। अध्ययन, अध्यापन के क्षेत्र में शीघ्र बड़े परिवर्तनों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हम भारतीय उच्च विज्ञान सम्पदा के उत्तराधिकारी है, यह हमें नहीं भूलना चाहिये। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में राज्य आयुष नियंत्रण कार्यक्रम लागू किया जायेगा। प्रदेश में आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद एक आदर्श और सरल चिकित्सा पद्धति है, जिसमें रोग के मूल कारण का निदान किया जाता है। प्रदेश के सभी शासकीय चिकित्सालयों में आयुष विंग शुरू किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में आयुर्वेद को पाँचवां वेद माना गया है। सुखी जीवन का आधार निरोगी काया है। श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में विश्व मानक स्तर आयुर्वेद प्रयोग करने की सुविधा दी जायेगी। गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण, आयुर्वेद के प्रयोग और अनुसंधान के लिये मध्यप्रदेश हरसंभव सहायता उपलब्ध करवायेगा। प्रदेश में 697 आयुर्वेद चिकित्सक की नियुक्ति की गई है।

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