विश्व को अचंभित कर रहा है सिंहस्थ कुम्भ का प्रबंधन

अब तक पाँच करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लिया धर्म-लाभ 

comprehensive-plan-for-simhastha-4-638उज्जैन। जैसे-जैसे सिंहस्थ कुम्भ समापन की ओर बढ रहा है, वैसे-वैसे कुम्भ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बढती जा रही है। सिंहस्थ के प्रथम शाही स्नान से लेकर अब तक प्रतिदिन लगभग 25 -30 लाख श्रद्धालु  धर्मलाभ ले रहे हैं। शाही स्नान एवं पर्व स्नान के समय यह संख्या कई गुना बढ़ी है। 15 मई को पर्व स्नान पर 50 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुँचे । सिंहस्थ पूर्ण होने तक श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षा  से कहीं अधिक करीब 7 से 8 करोड़ तक पहुँचने की सम्भावना है। अब तक 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु सिंहस्थ में सम्मिलित हुए हैं।  रेल एवं शासकीय परिवहन सुविधाओं के अलावा निजी वाहनों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं।

वैचारिक महाकुम्भ के समापन अवसर पर प्रधानमंत्री ने  सिंहस्थ पर्व के लिए की गई व्यवस्थाओं के लिए प्रदेश सरकार की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुंभ के दौरान उज्जैन में आँधी, बारिश से विघ्न आया इसके  बावजूद  राज्य सरकार ने सभी व्यवस्थाओं को तत्काल  बहाल  किया। सिंहस्थ महापर्व की व्यवस्थाओं , भीड़ प्रबंधन एवं नियंत्रण के साथ ही श्रद्धालुओं की अपार संख्या से प्रधानमंत्री भी बेहद प्रभावित हुए हैं।

विशिष्ट हस्तियों ने की सिंहस्थ में व्यवस्थाओं एवं प्रबंधन की सराहना

विशिष्ट हस्तियों ने सिंहस्थ के आयोजन में सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं और प्रबंधन की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डा. मोहनराव भागवत ने कहा कि कुम्भ का प्रबंधन अचंभित करने वाला है। योग गुरु बाबा रामदेव जी ने भी सिंहस्थ प्रबन्धन की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

क्राउड मैनेजमेंट का रोल मॉडल बना सिंहस्थ

देशभर में क्राउड मैनेजमेंट के लिए सिंहस्थ रोल मॉडल बना है । विश्व में यह पहली बार हो रहा है जब कुम्भ में क्राउड मेनेजमेंट पर शोध हो रहा है। महाकाल मंदिर और हरसिद्धि मंदिर का भी थ्री डी मॉडल तैयार किया गया है।  दोनों मंदिरों में कैसे व्यवस्थित तरीके से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को सुविधा से दर्शन करवाने का मॉडल तैयार किया गया है।

सिंहस्थ में स्वच्छता की विश्व में हो रही प्रशंसा

विशाल  मेले में स्वच्छ्ता की प्रशंसा सम्पूर्ण विश्व में हो रही है। घाटों और मेला क्षेत्र में स्वच्छ्ता का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। सिंहस्थ कुंभ में हिस्सा लेने आए विदेशी भी ‘ग्रीन उज्जैन-क्लीन उज्जैन’ अभियान से जुड़कर स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं। अभियान से जुड़ने वालों में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी तथा कई दक्षिण एशियाई देशों से आए श्रद्धालु शामिल हैं। बीते करीब तीन सप्ताह में सिंहस्थ में आये देश और विदेश के अनेक  बड़े राजनेता, प्रधानमंत्री , श्रीलंका के राष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के  राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री, उद्योगपति, फ़िल्मी कलाकार आदि ने मेले की व्यवस्थाओं की सराहना  की है।

सामाजिक सरोकार को मिला महत्व

सिंहस्थ पहला ऐसा कुम्भ महापर्व है जिसमे धर्म भाव के साथ ही सामाजिक सरोकार को विशेष महत्व दिया गया है। इनमें बेटी बचाओ, नशा मुक्ति, बालिका शिक्षा, स्वच्छ्ता,  योग – आरोग्य, पौध रोपण, जैसे मुद्दे प्रभावी रहे हैं। सरकार ने जिन मुद्दों को अब तक प्रमुखता से उठाया है और  सिंहस्थ के जरिये जो सामाजिक सन्देश देने का प्रयास किया है वह सार्थक हुआ। सभी साधु संतों ने इन सामाजिक मुद्दों से स्वयं को जोड़ा और समाज को जागृत किया। हम गर्व से कह सकते हैं कि सिंहस्थ महापर्व धार्मिक आयोजन के साथ ही समाज सुधार एवं जन चेतना का माध्यम भी बना है।

विश्व का पहला भीड़ प्रबंधन एवं नियंत्रण का सफल आयोजन

एक सीमित क्षेत्र में सिंहस्थ मेले का आयोजन और क्षमता के हिसाब से कई गुना श्रद्धालु का व्यवस्थित प्रबंधन,  नियंत्रण अब शोध का विषय बन गया है। विश्व स्तर पर यहाँ के भीड़ प्रबंधन एवं नियंत्रण का अध्ययन किया जा रहा है।  नीदरलैंड, सिंगापुर और रशिया जैसे देश भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारतीय विज्ञान संस्थानं बैंगलुरू, आई.आई.टी. कानपुर,  महिंद्रा सहित कुछ भारतीय स्टार्ट-अप कम्पनी यहाँ के भीड़ प्रबंधन एवं नियंत्रण का अध्ययन कर रही हैं। इस अध्ययन के बाद ऐसा सॉफ्टवेयर एवं गाइडलाइन तैयार होंगी जो विश्व स्तरीय आयोजनों में भीड़ नियंत्रण एवं प्रबन्धन के लिए उपयोगी होंगी।

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