सूचना प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान का लोक व्यापीकरण किया जाय

शासकीय कार्यों में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाला मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य है। 
प्रदेश के पाँच जिलों में ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना प्रारंभ की गयी है। आगे सभी जिले इस 
परियोजना के दायरे में लाये जायेंगे। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश की अनेक अग्रणी 
कम्पनियाँ मध्यप्रदेश आने के लिये सम्पर्क में हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने 
निर्देश दिये हैं कि सूचना प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान का आम प्रदेशवासी के हित में लोक 
व्यापीकरण किया जाय। मुख्यमंत्री आज सूचना प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान एवं तकनीकी विभागों 
की त्रैमासिक समीक्षा कर रहे थे।

बैठक में बताया गया कि देश का सबसे अच्छा डाटा सेंटर शीघ्र ही भोपाल में बनकर तैयार 
हो जायेगा। भोपाल में ट्रिपल आई.टी. प्रारंभ करने का कार्य भी हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि लोक सेवा प्रदाय गारंटी कानून का अन्य राज्यों द्वारा अध्ययन 
एवं अनुसरण किया जा रहा है। विगत दिनों वित्त मंत्रियों के सम्मेलन में प्रदेश के क्रियान्वयन 
के प्रस्तुतीकरण की व्यापक सराहना भी हुई है। उन्होंने कहा कि क्रियान्वयन कार्य को प्रभावी 
बनाने में लोक सेवा केन्द्रों की भूमिका प्रभावी होगी। उन्होंने केन्द्रों को व्यवहारिक रूप में 
संचालित करने की कार्रवाई शीघ्रता से करने को कहा।

बैठक में बताया गया कि इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के लिए नवीन मानव संसाधन नीति लागू 
की जायेगी। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को चिन्हांकित कर उनको कम्प्यूटर संबंधी 
आधारभूत प्रशिक्षण देने की योजना भी बनाई जा रही है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विज्ञान और तकनीकी के आधुनिक ज्ञान का लाभ परंपरागत 
शिल्पियों, कारीगरों, बुनकरों और श्रमिकों को मिले। उन्होंने कहा कि परंपरागत उपकरणों और 
तकनीक में नवाचार और अनुसंधान करने वालो को प्रेरित, प्रोत्साहित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने जनजातीय ज्ञान-विज्ञान और प्राचीन जानकारियों की समृद्ध परंपराओं को संरक्षित 
और समृद्ध करने के प्रयास करने को कहा।

बैठक में बताया गया कि नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए नवाचार प्रकोष्ठ की स्थापना की 
गई है। चयनित नवाचारियों को निःशुल्क आवास व्यवस्था, भोजन, दैनिक भत्ता एवं निश्चित 
मासिक स्टायफंड दिया जाता है। भूकंपमापी यंत्र के निर्माता महेश पटेल, कम लागत के ट्रैक्टर 
के निर्माता रामकिशोर विश्वकर्मा, कम लागत के सोलर लैंप के निर्माता अशोक चौहान और 
स्पीड ब्रेकर से विद्युत का उत्पादन करने वाले श्री संतोष मटोलिया एवं श्री कृष्ण वर्मा को 
सहायता दी गई है।

रीवा में जनवरी के तीसरे सप्ताह में, जबलपुर में फरवरी के द्वितीय सप्ताह और भोपाल में 
फरवरी के तृतीय सप्ताह में विज्ञान मेला का आयोजन प्रस्तावित है। ग्रामीण प्रौद्योगिकी उपयोग 
केन्द्र की स्थापना के लिये धार जिले के धामनोद एवं देवास जिले के क्षिप्रा का चयन किया 
गया है। जिलों के संसाधन एटलस भी बनाये जा रहे हैं। सीधी और सिंगरौली जिले का एटलस 
प्रकाशित हो गया है। टीकमगढ़ एटलस की पाण्डुलिपि तैयार है।

सूचना प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय तथा मुख्य सचिव 
श्री अवनि वैश्य, प्रमुख सचिव श्री आलोक श्रीवास्तव, सचिव सूचना प्रौद्योगिकी श्री हरिरंजन राव 
भी बैठक में मौजूद थे।

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