सेलफोन टॉवर से सावधान रहना जरूरी

मानव इतिहास में पाषाण काल, पुनर्जागरण काल, अंधकार युग, औद्योगिक युग, अंतरिक्ष युग आदि कुछ प्रसिद्ध काल खंड है। लेकिन मानव इतिहास के बीते दस हजार वर्ष के काल में विद्युत-चुंबकीय युग जैसा कोई काल खंड सुनने में नहीं आया है। जबकि इसके बारे में हमें जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि हम इसी युग के मध्य में है और अपने पूर्वजों की तुलना में हम कदाचित दस करोड़ गुना ज्यादा विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा को अवशोषित कर रहे हैं।

inext_p_lnwz_mobile.userविद्युत चुंबकीय युग का अर्थ आधुनिक जीवनशैली से लगाया जा सकता है। यदि आप टेलीविजन देखते हैं, टेलीफोन का उपयोग करते हैं, इंटरनेट पर विचरण करते हैं, मस्तिष्क की स्कैनिंग करवाते हैं या माइक्रोवेव का उपयोग करते है तो इसका मतलब है कि आप विद्युत चुंबकीय तरंगों का उपयोग करते हैं। मनुष्य का शरीर अपने आप में एक विद्युत चुंबकीय क्षेत्र होता है। हालांकि यह बहुत कमजोर होता है, लेकिन यह क्षेत्र हमें स्वस्थ रखने के लिए जरूरी होता है। लेकिन सेलफोन एवं सेलफोन टाॅवर से निकलने वाले विद्युत चुंबकीय विकीरण की अनवरत बौछार से हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इस संबंध में हालिया चेतावनी इसी सप्ताह एक अंग्रेजी अखबार के जरिए सामने आई है, जिसकी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में सेलफोन टाॅवर की विकीरण सीमा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा सुरक्षित मानी गई। सीमा से 900 गुना ज्यादा है। दस देशों के 29 स्वतंत्र वैज्ञानिकों के द्वारा जारी जैव पहल 2012 का हवाला देते हुए अंग्रेजी अखबार ने कहा कि इस विकीरण से सिर दर्द, बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन, नींद में व्यवधान आदि जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। विभिन्न देशों में किए गए कई अध्ययनों से यह संकेत मिलता है कि सेलफोन टाॅवरों का रहवासी भवनों से तीन सौ मीटर से पांच सौ मीटर की दूरी पर रखना चाहिए। लेकिन भारतीय शहरों में जहां सेलफोन के टावर सीधे रहवासी भवनों की छतों और दीवारों में ही लगा दिए जाते हैं तथा यहां लोग ऐसे टाॅवरों के एंटीना से बमुश्किल दस मीटर पर ही रहते हैं।
जो लोग सेलफोन टाॅवर के पास रहते है, उनमें कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। जो लोग सेलफोन टाॅवरों के 350 मीटर के दायरे में रहते हैं, उनमें सामान्य लोगों की तुलना में कैंसर होने की संभावना चार गुना ज्यादा होती है, जबकि महिलाओं में मामले में यह संभावना दस गुना ज्यादा बढ़ जाती है।

भयावह हालात
सेलफोन टाॅवरों को रहवासी भवनों से तीन सौ मीटर से पांच सौ मीटर की दूरी पर रखना चाहिए। लेकिन भारतीय शहरों में जहां सेलफोन के टाॅवर सीधे रहवासी भवनों की छतों और दीवारों में ही लगा दिए जाते हैं तथा यहां लोग ऐसे टाॅवरों के एंटीना से बमुश्किल दस मीटर पर ही रहते हैं।
सामान्य दुष्प्रभाव
सेलफोन व इसके टाॅवरों के विकीरण से सिर दर्द, बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन, नींद में व्यवधान आदि जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

साभारः  दैनिक जागरण

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