हिमालय-हिंद महासागर क्षेत्र के 54 राष्ट्र मिलकर करेंगे नए विश्व का निर्माण

28-29 सितम्बर को आगरा में हुआ 54 देशों का अन्तर्राष्ट्रीय सम्मलेन 

 आजाद भारत के इतिहास में संभवत यह पहली बार हो रहा है कि गैर सरकारी स्तर पर दुनिया के 54 देशों का एक नेटवर्क बनाने का प्रयास हो रहा हो l दरअसल 28-29 सितम्बर को राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच की ओर से हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह का सम्मलेन आयोजित किया गया l इस सम्मलेन में हर्ष अर्थात हिमालय-हिन्द महासागर क्षेत्र के विभिन्न देशों के 276 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की l इसमें 31 देशों के 146 विदेशी प्रतिनिधियों ने भाग लिया l इस अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन में 22 राजदूत व राजनयिकों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज की l भारत के विभिन्न हिस्सों से 160 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया l इस सम्मलेन के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसे यूरोपीय यूनियन की तर्ज पर हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह (हर्ष) के  अभ्युदय के रूप में देख रहे हैं l दो दिवसीय इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन के दौरान 31 देशों के शोधार्थी-अध्येता, प्रोफ़ेसर और कौंसिलर्स की उपस्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के संरक्षक श्री इन्द्रेश कुमार ने हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह (हर्ष) का बेवसाईट भी लोकार्पित किया l इस समेलन में उदघाटन और समापन के अतिरिक्त चार तकनीकी सत्र भी आयोजित हुए l इन सत्रों में विद्वान् वक्ताओं और विशेषज्ञों ने हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक सम्बन्ध, वाणिज्य और व्यापार सम्बन्ध, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समबन्ध तथा जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी विज्ञान पर गहन विमर्श किया l

आगरा l  29 सितम्बर को नवरात्र का पहला दिन था l इस दिन आगरा में एक नारा गूंजा – ‘जय भारत- जय हर्ष और जय हर्ष – जय जगत’ l  अर्थात भारत की जय हो और हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह की जय हो हो l इन राष्ट्रों की जय से ही कल्याणकारी और श्रेष्ठ विश्व का निर्माण होगा l दरअसल यह उदघोष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार देश-दुनिया के 500 से अधिक प्रतिनिधियों के बीच कर रहे थे l उल्लेखनीय है कि इसमें 31 देशों के 22 राजनयिकों सहित 146 विदेशी प्रतिनिधि उपस्थित थे l इन राष्ट्रों की आबादी यूरोपियन यूनियन राष्ट्रों से अधिक है l इस सम्मलेन में मोजाम्बिक, पनामा, नाइजीरिया, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, म्यांमार, नेपाल, पापुआ, न्यू ग्येना सम्मेलन में रवांडा, मोजाम्बिक, तंजानिया, पनामा, नाइजीरिया, इरान, अफगानिस्तान, वियतनाम, कीनिया, इराक सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के समक्ष अखंड भारत और पाकिस्तान के विखंडन की बात भी हुई l श्री इन्द्रेश कुमार ने कहा कि अगर राष्ट्रों में मित्रता होगी तो सीमाओं की सुरक्षा पर होने वाला व्यय ढांचागत विकास और शिक्षा-स्वास्थ्य पर हो l उन्होंने कहा कि एक समय था जब विश्व राजनीति सोवियत रूस केन्द्रित थी, बाद में यह फ्रांस में शिफ्ट हो गई l अब एक जमाने से विश्व राजनीति अमेरिका केन्द्रित रही है l पिछले कुछ समय से विश्व राजनीति का झुकाव धीरे-धीरे ही सही लेकिन भारत की ओर हो रहा है l उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वह सब कुछ कुछेक घंटों में ही प्राप्त कर लिया जिसे अन्य सरकारें पिछले 70 वर्षों में प्राप्त नहीं कर सकी हैं l अब भारत श्री मोदी के नेतृत्व में विश्व पटल पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है l

समापन सत्र के अंतिम वक्ता के रूप में श्री इन्द्रेश कुमार ने अपने व्याख्यान के आरम्भ में सभी प्रतिभागियों को मनोवैज्ञानिक रूप से प्रोत्साहित और प्रेरित किया l उन्होंने ट्रिपल तलाक के खिलाफ शुरू अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे पीड़ित महिलाओं के लिए शुरू इस आन्दोलन को प्रधानमंत्री मोदी ने अंतिम और समाधानकारी परिणति दी l श्री इन्द्रेश कुमार ने ‘जय भारत- जय हर्ष और जय हर्ष – जय जगत’ का नारा बुलंद किया l उन्होंने आने वाले दिनों में हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह के बारे में बौद्धिक और अकादमिक प्रयासों का उल्लेख करते हुए विद्वानों और अध्येताओं से गंभीर शोध और लेखन का आह्वान किया l श्री इन्द्रेश कुमार के अनुसार, विश्व के उत्कर्ष के लिए हर्ष जरूरी है l उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 836 विश्वविद्यालय हैं, जिसमें लगभग 100 विश्वविद्यालय ऐसे हैं जिनमें विदेशी छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं l हमारी कोशिश होनी चाहिए कि विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह के विषयों को भी शामिल किया जाए l छोटे-छोटे सम्मेलनों के माध्यम से इन विषयों को बौद्धिक, अकादमिक और लोक प्रबोधन का आधार बनाया जाए l विश्वविद्यालयों और संस्थानों में हिमालय-हिंद महासागर राष्ट्र समूह के लिए पीठ (चेयर) की स्थापना का प्रयास हो l उन्होंने उल्लेख किया कि आने वाले समय में राजनीतिज्ञों, डिप्लोमेट, उद्योगपति तथा बुद्धिजीवियों से संपर्क कर उन्हें इस बड़े अभियान का हिस्सा बनाया जायेगा l राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच जैसे अनेक अभियानों के प्रेरणास्रोत श्री इन्द्रेश कुमार ने अपने संबोधन में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों से जल और वृक्षों के संरक्षण के लिए व्यक्तिगत प्रयास करने का निवेदन किया l उन्होंने स्वयं, परिवार और समाज के हित में रसायनयुक्त फल-सब्जी और कास्मेटिक वस्तुओं के इस्तेमाल को नहीं करने का आह्वान किया l उन्होंने कहा कि सरकार स्मार्ट सिटी बना रही है, हम सभी मिलकर भाईचारे और शान्ति का शहर बना सकते हैं l सरकार का काम अलग है, हमारा काम अलग है l हमें परस्पर सहयोग से मानवता को स्थापित करना है l हम सभी को मिलकर हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह की सफलता को सुनिश्चित करना है l 

सम्मलेन के संरक्षक श्री इन्द्रेश कुमार ने राष्ट्रों के बीच बंधुता के फैलाव के महत्व को समझाया l भारत की परिभाषा करते हुए उन्होंने उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक की सीमाओं की समकालीन व्याख्या की। हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह का भोगोलिक स्वरुप बताते हुए उन्होंने इसके सांस्कृतिक व धार्मिक पक्ष का विश्लेण प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस राष्ट्र समूह में 54 देश हैं l इनको एक राष्ट्र समूह के रूप में जोड़ते हुए उन्होंने हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह स्थापना की घोषणा की गई l  उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा समूह होगा जो 54 देशों के 315 करोड़ लोगो को समाहित करेगा जिसमे 133 करोड़ लोग भारतीय होंगे । उन्होंने इसके सामरिक, आर्थिक, सामाजिक–सांस्कृतिक पक्षों का भी विश्लेण किया । अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति के फैलाव पर अपना विचार रखते हुए श्री कुमार ने कहा कि यूनान, इंग्लैंड, अमेरिका, रूस केन्द्रित विश्व का स्वरुप बदलेगा और आने वाले समय में यह भारत केन्द्रित होगा।

कार्यक्रम का शुभारम्भ आयोजक संस्था राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के अध्यक्ष ले. जन. श्री आर. एन .सिंह ने सम्मेलन में प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए किया l अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के बारे में बताते हुए कहा कि यह एक गैर राजनीतिक, गैर सरकारी एवं गैर धार्मिक संगठन है जो राष्ट्रीय स्वाभिमान की ऐतिहासिक एवं समकालीन गतिविधियों के व्यापक प्रचार करने, जनता को जागरूक एवं सक्रिय करने, परम्परागत सोच में बदलाव लाने, ऐतिहासिक गलतियों की समीक्षा करने की गातिविधियों पर केन्द्रित है। उ.प्र. के हस्तकला मंत्री श्री उदयभान सिंह ने अपने उदबोधन में कहा कि हमें खोयी हुई राष्ट्रीय अस्मिता को प्राप्त करना चाहिए। महात्मा गाँधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट के कुलपति डॉ एन.सी.गौतम ने कहा कि देश नव गौरव को प्राप्त कर रहा हैl इस प्रकार के आयोजन निरंतर होते रहना चाहिए। फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह के देशों का विश्लेण करते हुए बताया कि इन देशों में प्राचीन समय से आपसी व्यापार होता रहा था। डॉ भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा के कुलपति डॉ. अरविन्द दीक्षित ने धर्म के दस लक्षणों कि व्याख्या की और बताया कि भारतीयता एक जीवन पद्धति है l

सम्मेलन के सामाजिक-सांस्कृतिक सम्बन्ध सत्र की अध्यक्षता केंद्रीय तिब्बत प्रशासन धर्मशाला की पूर्व गृहमंत्री गायत्री डोल्मा ने की l अध्यक्षीय उदबोधन में डॉ. डोल्मा ने हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह की संस्थापना में श्री इंद्रेश कुमार की भूमिका और उनके प्रयासों की सराहना करते हुए यह आशा की कि यह संगठन वैश्विक पटल पर रणनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से सर्वाधिक सक्षम समूह होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एयर मार्शल आर.सी. वाजपेयी ने भारत के वसुधैव कुटुम्बकम की नीति का उल्लेख करते हुए हर्ष देशों को भारत के प्रधानमंत्री के जलवायु प्रदूषण, जल संरक्षण और वैश्विक आतंकवाद से लड़ने की विचारधारा के लिए प्रतिबद्ध होना होगा तभी विकास संभव है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ.संजय पासवान  ने इन प्रयासों कि सराहना करते हुए यह कहा कि श्री इंद्रेश कुमार भारत के जड़ों के लिए चिंतित है l डा.पासवान ने हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज ब्रह्माण्ड में तीन ‘पी” अर्थात –प्लेनेट, पीपुल और पीस को सबसे ज्यादा खतरा है l इन राष्ट्र समूह के देशों को इनके संरक्षण के लिए के लिए सबसे ज्यादा चिंतित रहना होगा क्यूंकि 80% जनसँख्या और 80% अर्थव्यवस्था इसी क्षेत्र से सम्बन्धित है । सेंटर फॉर पॉलिटिकल  स्टर्डीज, इंडोनेशियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, जकार्ता (इंडोनेशिया) की प्रतिनिधि डॉ. श्री नूरियान्ति ने प्राचीन सामाजिक-सांस्कृतिक संबंधों की निरंतरता का उल्लेख करते हुए यह कहा कि इस राष्ट्र समूहों की सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक विविधता का सम्मान करते हुए तीन मूल विचारो को ध्यान में रखना होगा यह विचार है – विविधता में एकता, धर्म निरपेक्षता और अस्मिता के पहचान की सुरक्षा का है के माध्यम से आज हम देशों को नही अपितु समाजों के एकीकरण कि ओर बढ़ रहे हैं ।

बुद्धिस्ट यूनिवर्सिटी वाराणसी के सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर सम्पा दोर्जी नेगी ने बताया कि इस राष्ट्र समूह के गठन के पीछे इन देशों के विचारों की समानता और स्वतंत्र रूप से जीने की इच्छा है । उन्होंने कहा कि मूल रूप से तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार यद्यपि अन्य देशों की तुलना में सबसे बाद में हुआ, किन्तु स्थानीय भाषा में प्रचार प्रसार होने से तिब्बत का बौद्ध साहित्य अपेक्षाकृत ज्यादा विशाल और बृहद है ।

पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर डॉ. मोहम्मद खालिद ने समूह देशों – के महत्व को रेखांकित करते हुए यह कहा कि चीन के बढ़ते दबाब के परिपेक्ष्य में इन देशों के प्रति हमारी नीति और इनके बहुआयामी मदद की परम्परा को अब नया स्वरुप और आयाम देना होगा l ये द्वीपीय देश सामरिक और आर्थिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण भोगोलिक परिवेश की प्रमुख धुरी है l मुख्य वक्ता के रूप में भारती विद्या भवन नई दिल्ली की डॉ शशिबाला ने भारत और विश्व की सांस्कृतिक प्रगति में संस्कृत के योगदान की चर्चा करते हुए यह कहा कि ज्ञान की भूमि भारत में विदेशी विद्वान् तमाम बाधाओं को पार करके आए और संस्कृत सीख कर उनका प्रसार किया । हम अपने ज्ञान, शक्ति और धन की देवी की उपासना करते हैं जो सत्यम शिवम् और सुन्दरम की धारणा को पुष्ट करता है जो इस क्षेत्र के सभी देशों के लिए समान है । शक्ति शान्ति का मूल आधार है । भारत की भोगोलिक विविधता में विकसित साहित्य में ही शांति और समरसता का भाव निहित है । जबकि भौगोलिक रूप से बंजर और रेगिस्तानी धरती का साहित्य अस्तित्व के लिए संघर्ष को ही बढ़ावा देने वाला है । वाणिज्य और व्यापार सम्बन्ध वाले सत्र में वाणिज्यिक एवं व्यापारिक सम्बन्धों विमर्श हुआ और शोधपत्र भी प्रस्तुत किये गए । इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल सिक्युरिटी स्टर्डीज के निदेशक
डॉ. शेषाद्रिचारी ने कहा कि हिमालय-हिन्द महासागर क्षेत्र के देशों में भारतीय संस्कृति के अंश विद्यमान हैं l इस क्षेत्र में गरीबी पर भी ध्यान देना चाहिए। यहाँ संस्कृति, भाषा और धर्म के क्षेत्र में भी विविधता है इस पर ध्यान देने कि आवश्यकता है। इस क्षेत्र में व्यापार एवं वाणिज्य को बढ़ावा देने के लिए आवागमन प्रबंध समझौते एवं सहमतियाँ, बैंकिंग व्यवस्था चलने वाली मुद्रा पर भी विचार करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने आह्वान किया कि हर्ष को साकार करने के लिए कर्मयोगी बने ।

बहीरदार यूनिवर्सिटी, इंडोनेशिया के प्रोफ़ेसर डॉ. असलम खान ने ‘भारत–अफ्रीका नीति : अवसर एवं चुनौतियाँ’ विषय पर बोलते हुए कहा कि भारत-अफ्रीका सम्बन्ध गाँधी के पूर्व समय के है  गाँधी जी ने इनको नया स्वरुप दिया, परन्तु बाद के समय में यह सम्बन्ध कमजोर हुए ।1990 के बाद यहाँ से व्यापार मुख्यतः निजी क्षेत्रों में चला गया। मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद इस क्षेत्र में बदलाव आया है और भारत–अफ्रीका सम्बन्ध भारतीय विदेश नीति में प्रमुख रहा है । आगरा के सांसद प्रो. एस.पी.सिंह ने सम्मेलन में सहभागी प्रतिनिधियों का स्वागत किया उन्होंने बताया कि भारत का अतीत बहुत शानदार रहा है l भविष्य में भारत पुनः विश्व गुरु बनेगा ।

सम्मलेन के दूसरे दिन का पहला सत्र हिमालय-हिन्द महासागर क्षेत्र के राष्ट्रों में ‘विज्ञान प्रौद्योगिकी’ संबंधों पर केन्द्रित था । इस सत्र की अध्यक्षता इंस्टीट्यूट फॉर डिफेन्स स्टर्डीज एंड एनालिसिस, नई दिल्ली के वरिष्ठ शोध एसोसिएट डॉ. राजीव नयन ने किया। उन्होंने कहा कि भारत के सक्षम सुरक्षा की चुनौती है और इसके लिए टेक्नोलॉजी विकसित करने की जरुरत है। उन्होंने भारत को एक नया ब्रांड बनाने का सुझाव दिया। इस सत्र में डी.आर.डी.ओ. के पूर्व निर्देशक डॉ. सुदर्शन कुमार ने तकनीकी वरीयता पर सारगर्भित विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान अन्तर्राष्ट्रीय परिदृश्य में नवीनतम तकनीकी को अपनाया जाना अतिआवश्यक है, इसको हासिल करके भविष्य में भारत महाशक्ति बन सकता है ।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ श्री जितेन जैन ने साइबर सुरक्षा के विविध पक्षों को उद्घघाटित करते हुए बताया कि वर्तमान में इस क्षेत्र में अमेरिका का वर्चस्व है । भारत इस क्षेत्र में अच्छा काम कर सकता है और हर्ष देशों को यह सुविधा साइबर सुरक्षा प्रदान कर सकता है। चीन इस क्षेत्र में अपनी कंपनियों के माध्यम से साइबर जासूसी करवा रहा है। आने वाले समय में डेटा का महत्व और अधिक बढ़ने वाला है है । डेटा ही शक्ति होगी । अगली क्रांति डाटा क्रांति होगी ।  इसलिए इस क्षेत्र में नियोजित ढंग से कार्य करने कि आवश्यकता है।

पूसा इंस्टिट्यूट बिहार के वैज्ञानिक डॉ.जे.पी. शर्मा ने खा कि भारत में विश्व का 2% जमीन है, परन्तु हम 18% आबादी का भरण-पोषण कर रहे हैं । हरित क्रांति के बाद के वर्षों में कृषि उत्पादन बढ़ा और आज अतिरिक्त उत्पादन हो रहा है । आज इसके प्रबंधन की आवश्यकता है । आज किसान को उत्पादन के साथ-साथ विपणन एवं विक्रय कला की जानकारी एवं प्रशिक्षण कि आवश्यकता है, क्योंकि ऐसा न होने से किसान को सही उत्पाद मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का चौथा सत्र समापन सत्र के रूप संपादित हुआ l इस सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच, आगरा चैप्टर के अध्यक्ष कर्नल ए.के. सिंह ने की l जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण जैव-विविधता और पारिस्थितिकी विज्ञान पर आधारित इस सत्र की शुरुआत श्री मुकेश त्यागी के वक्तव्य से हुई l उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर भारत की शक्ति संपन्नता भारत को भविष्य में महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगी l भारत के पास विकास की बेहतरीन क्षमता है l  किर्गिस्तान के भूतपूर्व राजदूत और लद्दाख इंटरनेशनल सेंटर के अध्यक्ष श्री पी. स्टोब्दन ने बताया कि सांस्कृतिक रूप से पूरा दक्षिण एशिया एक है l हिमालय से हिन्द महासागर परस्परावलंबन का एक घेरा है l उन्होंने कहा कि तिब्बत का पानी दक्षिण एशिया में जाता है l चीन की कारगुजारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चीन बौद्ध धर्म की कमियों में हेरफेर कर संघर्ष पैदा करने की कोशिश कर रहा है l हमें इससे सावधान रहना है l लद्दाख पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है l उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राचीन भारत के कुछ ऐसे पहलू हैं जो संस्कृति के माध्यम से पूरे एशिया को जोड़ने में एक अहम् कड़ी हो सकती हैं l उन्होंने चीनियों द्वारा हिमालय को तिब्बत बनाने के खतरे को रेखांकित किया l ग्लेशियर का पिघलना हिमालय के अस्तित्व को चुनौती दे रहा है l इसे संरक्षण की जरूरत है l श्री स्टोब्दन ने ‘ट्रांस हिमालयन आथरिटी’ बनाने की जरूरत पर बल दिया l प्रो. वी पी नील रतन ने पर्यावरण पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भारत में पर्यावरण के खतरे बढ़ गए हैं l विकासशील राष्ट्र ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से पीड़ित है l उन्होंने विभिन्न प्रकार की पर्यावरणीय चिंता का जिक्र करते हुए इसके संरक्षण के लिए मिलकर प्रयास करने की जरूरत बताई l नेहरू म्यूजियम एवं लाइब्रेरी नई दिल्ली के सीनियर फेलो डॉ. उत्तम कुमार सिन्हा ने विश्व में बदलते मानसून को लेकर चिंता जताई l उनका कहना था कि बदलते पर्यावरण से एशिया के कई देश चिंतित हैं, लेकिन इन चुनौतियों से निबटने में भारत पथ-प्रदर्शक हो सकता है l स्थानीय लोगों और प्रभावित लोगों से मिलकर उपाय ढूँढना होगा l नदियों पर आधारित समझौतों को बेहतर बनाने की जरूरत है l सीएसआईआर-निस्केयर के निदेशक डा. मनोज कुमार पटेरिया ने आतंरिक सुरक्षा में उत्पन्न खतरे को समझते हुए बुद्ध को रेखांकित करते हुए कहा कि बुद्ध ने कहा था किसी भी तथ्य को जांच कर ही स्वीकार करो l उसी प्रका आतंरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक सोच के साथ तथ्यों के साथ आगे बढ़ाने पर बल दिया l

इस हिमालय-हिंद महासागर बहुराष्ट्रीय सम्मलेन में स्थानीय सांसद प्रो. एस.पी.सिंह बघेल, आगरा के मेयर डॉ. नवीन जैन और राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के महामंत्री श्री गोलोक बिहारी राय समेत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक और भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तरप्रदेश सरकार के मंत्री भी उपस्थित थे l

डॉ. अनिल सौमित्र

9425014260

 

  

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