अद्वैत दर्शन ही मानवता का एकमात्र विकल्प हैः प्रो0 तिवारी

मानवतावादी दर्शन पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में 08-10 दिसम्बर को

अद्वैत दर्शन ही मानवता का एकमात्र विकल्प है। अद्वैत वेदान्त दर्शन एवं आचार्य शंकर के मानवतावादी दर्शन विषयक तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी हरीसिंह गौर केंद्रीय विष्वविद्यालय, सागर, मध्यप्रदेष में दिनांक 08-10 दिसम्बर, 2019 को आयोजित की जा रही है।  विश्व की एकता एवं मानवीय उन्नतता के लिए सागर में हो रहे इस वैचारिक समागम में देश -विदेश  के कई प्रमुख वैदांति एवं विचारक आचार्य शंकर के अद्वैत दर्शन का मंथन कर अमृत बिन्दु  का निकर्ष करेंगे। जिसमें स्वामी परमानंद प्रमुख चिंतक एवं विचारक डॉ. गुलाब कोठारी, श्री सुरेश  सोनी, हरी किरन बादलमानी, डॉ. एलेक्सहेंकी, प्रो0 कपिल कपूर, डॉ. मणीद्रवीड़ शास्त्री, डॉ. गौतमभाई पटेल, डॉ. पंकज जोशी, प्रो0 शिशिर राॅय, मुकुल कनिटकर, प्रो0 कुटुम्ब शास्त्री, डॉ. महेशचन्द्र शर्मा, सांसद श्री सत्यपाल सिंह, लेखक एवं सांसद श्री पवन वर्मा, डॉ. कपिल तिवारी,  प्रो0 रामनाथ झा इस तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्र्ीय संगोष्ठि में मुख्य वक्ता के रूप में वेदांत दर्शन के विभिन्न आध्यात्मिक, सामाजिक सांस्कृतिक  अवदानों पर मंथन करेंगे।

सागर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 आर पी तिवारी ने भारतीय विष्वविद्यालय संघ, नई दिल्ली में आयोजित इस राष्ट्र्ीय पत्रकार वार्ता में बताया कि आचार्य शंकर के अद्वैत दर्शन का विचार संपूर्ण विष्व को भारत की अनुपम देन है। जो समूची सृष्टि को समरूप करते हुए मानवीय एकरूपता की बात करता है।  यह सम्मेलन सागर विष्वविद्यालय ऐसे समय में आयोजित कर रहा है जब संपूर्ण मानवता अतिरेकों के दौर से गुजर रही है।  जिसमें जाति, पंथ, संप्रदाय के बरक्स व्यक्तिगत एवं सामुहिक अस्तित्वमूलक संकट गहरा रहा है। न केवल विकासीय उपक्रम के दोहनतावादी रवैये से मानवता जूझ रही है बल्कि मानवता के समक्ष पर्यावरणीय उपभोक्तवादी संकट भी एक चुनौती बन गया है।  ऐसे में अद्वैत दर्शन का विकल्प ही मानवता को एक नई दिषा दे सकता है।  इसके लिए सागर विष्वविद्यालय कृत संकल्प है।

मानवता को बचाने के लिए केवल सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक पहलू ही पर्याप्त नहीं हैं वरन् आध्यात्मिक चिंतन एवं दर्शन सही मायने में मानवता की नैसर्गिक अनिवार्यता है।  यह तीन दिवसीय संगोष्ठि आध्यात्मिक चिंतन से अनुप्राणित है।  आध्यात्मिक चिंतन के लिए आचार्य शंकर के विभिन्न अनुयायी एवं चिंतक जिनमें आनंदमूर्ति गुरू मां, सोनीपत, स्वामी सम्वित सोमगिरी, बीकानेर, स्वामी परमात्मानंद जी, राजकोट, स्वामी आत्मप्रियानंद, कोलकाता, स्वामी मित्रानंद, चैन्नै, स्वामी शुद्धिधानंद, चंपावत, स्वामी अद्वैयानंद, एरनाकुलम, स्वामी मुक्तानंदपुरी, अलवर, स्वामी हरब्रहमानंद, उत्तरकाषी, श्री श्याम मनोहर गोस्वामी, मुंबई, स्वामिनी विद्यानंद सरस्वती, कोयंबटुर सहभागिता करेंगे।

प्रो0 तिवारी ने बताया कि यह संगोष्ठि अपने आप में समरूप एकाकार के दर्शन से अनुप्राणित है जिसमें आचार्य शंकर के अद्वैत दर्शन को न केवल व्याख्यानों एवं चिंतन के माध्यम से जन सामान्य के लिए सुलभ बनाया जायेगा बल्कि 8 और 9 दिसम्बर को शंकर संगीत का सांस्कृतिक आयोजन किया जायेगा जिसमें सुप्रसिद्ध गायिका सुधा रघुरामन शंकराचार्य रचित श्रोतों का गायन करेंगी एवं विष्व प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना सुजाता महापात्रा जी अद्वैत दर्शन को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सजीव करेंगी।

इस संगोष्ठि में देश -विदेश  के कई रूपांकर कलाकार सम्मिलित होंगे जो अपनी हस्तकलाओं के माध्यम से अद्वैत दर्शन के अमूर्त चिंतन को जन-सामान्य तक मूर्त रूप देंगे।  ऐसे सर्वश्रेष्ठ कलाकारों को प्रश स्ति प्रदान की जायेगी।  आचार्य शंकर के संपूर्ण वाग्मय को तीन दिवसीय संगोष्ठि में जन-सामान्य के लिए सुलभ कराया जायेगा।  यह साहित्य देश -विदेश  की विभिन्न प्रकाश न संस्थाएं स्टाल के माध्यम से प्रदर्षित करेंगी।

प्रो0 तिवारी ने बताया कि इस ज्ञान महाकुंभ में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक, अकादमिक, शोध संस्थाएं विभिन्न स्वरूपों में सहयोग कर रही हैं जिनमें प्रमुख हैं – आचार्य शंकर सांस्कृतिक न्यास, मध्य प्रदेश  सांस्कृतिक विभाग, भोपाल,  भारतीय दार्षनिक अनुसंधान परिश द, नई दिल्ली, भारतीय समाज विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, इंडिक एकेडमी, सिंगापुर, पंडित मदन मोहन मालवीय, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा मिशन, सागर आदि संस्थाएं सहयोग कर रही हैं।

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