शिक्षा में कला के समावेशन से होगा सर्वांगीण विकास: चैंगसन

  • विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का कला उत्सव में शामिल होना भी उत्सव की सफलता: संयुक्त सचिव, विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता, लाम्छन्गोइ स्वीटी चैंगसन
  • थोड़ा सा प्रोत्साहन भी कला को निखारने में होता है सहायक: प्रमुख सचिव शिक्षा, मध्य प्रदेश शासन, रश्मि अरुण शमी
  • कला का समावेशन करेगा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन: प्रो. हृषिकेश सेनापति

भोपाल। विद्यालयी शिक्षा में कला अधिगमों को बढ़ावा देने और शिक्षण अधिगम को सुरुचिपूर्ण बनाने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में चार दिवसीय (2 से 5 जनवरी 2020) कला उत्सव 2019 का आयोजन क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भोपाल में किया जा रहा है। उत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि संयुक्त सचिव, विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता, सुश्री लाम्छन्गोइ स्वीटी चैंगसन, प्रमुख सचिव शिक्षा, मध्यप्रदेश शासन, सुश्री रश्मि अरुण शमी, निदेशक एनसीईआरटी प्रो. हृषिकेश सेनापति और प्राचार्य क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल, प्रो. नित्यानंद प्रधान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। उत्सव के उद्घाटन समारोह में प्रतिभागी छात्रों ने “हिंद देश के निवासी सभी जन एक हैं…” गीत की प्रस्तुति कर उपस्थित सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और देश के नागरिकों को एकता का संदेश दिया।

संयुक्त सचिव, विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता, चैंगसन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कला उत्सव “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की अवधारणा को साकार करते हुए सांस्कृतिक विविधता वाले देश में अनेकों भाषा, संस्कार, भोजन, कलाएँ और जीवन शैलियों कों एक मंच पर लाने का कार्य बखूबी कर रहा है। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विज्ञान और कला क्षेत्र में विशेष प्रतिभा वाले बच्चों के लिए ध्रुव कार्यक्रम की शुरुआत की है। मंत्रालय के मुताबिक कला, संगीत, संस्कार व संस्कृति अकादमिक शिक्षा में शामिल होने चाहिए। उन्होंने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के कला उत्सव में शामिल होने को उत्सव की सफलता बताया। प्रमुख सचिव शिक्षा, मध्यप्रदेश शासन, सुश्री रश्मि शमी ने संबोधन वक्तव्य में निर्णायक मंडल को बच्चों की प्रतिभा के निर्णय में नरमी से पेश आने की सलाह देते हुए कहा कि बच्चों को दिया गया थोड़ा सा प्रोत्साहन भी उनकी कला को निखारने में सहायक होता है।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् के निदेशक, प्रो. हृषिकेश सेनापति ने प्रतिभागियों से संवाद करते हुए कहा कि अंक प्रणाली की शिक्षा में कला का समावेशन विद्यालय से दूर जाने वाले बच्चों को भी शिक्षा की ओर आकर्षित करेगा और आज की शिक्षा जो कि आंकड़ों यानी अंकों के पैमाने पर आधारित हो गई या कर दी गई है की व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन करेगा।

उत्सव की राष्ट्रीय संयोजक और कला एवं सौंदर्यबोध शिक्षा विभाग, एनसीईआरटी की अध्यक्ष एवं प्रो. पवन सुधीर ने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि कला उत्सव में 8 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में प्रतिभागी छात्र-छात्राएँ दोनों ही समान संख्या में प्रतिभाग कर रहे हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बच्चे हमारी संस्कृति और समृद्ध परंपरा के संवाहक हैं, वे अपने राज्यों की समृद्ध संस्कृति एवं परंपरा के प्रतिनिधि हैं।

परिषद के क्षेत्रीय शिक्षण संस्थान (क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान), भोपाल के प्राचार्य प्रो. नित्यानंद प्रधान ने धन्यवाद ज्ञापन में सभी प्रतिभागियों, शिक्षक-प्रशिक्षकों, उत्सव की समस्त आयोजन समितियों और सभी कर्मचारियों को धन्यवाद दिया। ऐसे उत्सवों के महत्व पर रोशनी डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन, आयोजक की रचनात्मकता, कला शिक्षा के प्रति उनकी निष्ठा को और बेहतर करते हुए उनमें नई ऊर्जा का संचार करते हैं। कला उत्सव 2019 के दौरान अगले 4 दिनों तक देश के सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों तथा जवाहर नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालयों से आए लगभग 400 से अधिक प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। उत्सव में मध्यप्रदेश दर्शन के दौरान सभी प्रतिभागियों को प्रदेश की राजधानी के समीप स्थित प्रमुख पर्य़टन स्थलों का भ्रमण कराकर उनके ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व को बताया जाएगा।

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