अमृत माटी अमृत जल बनाम दीपक सचदे

रितु शर्मा
जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री दीपक सचदे जी के दुखद निधन की खबर आई।  प्रयोग यात्रा के बीच में ही सांसों की यात्रा थम गई। नेमावर नर्मदा के आंचल में बसा बजवाड़ा  दीपक जी की कर्म स्थली है। दीपक जी डॉ श्रीपद अच्युत दाभोलकर ( गणितज्ञ और कृषि वैज्ञानिक, ‘प्रयोग परिवार’, कोल्हापुर, डॉ नरेन्द्र दाभोलकर के बड़े भाई ) के शिष्य थे। श्रीपद दाभोलकर को महात्मा गाँधी ने खेती पर कार्य करने की प्ररेणा उस समय दी जब देश में हरित क्रांति नहीं आई थी। श्रीपद जी के सानिध्य में दीपक जी ने तीन साल भारत भ्रमण किया। मिट्टी, पानी,खेती, जंगल और प्रकृति का बारीकी से अध्ययन किया। जिसके परिणाम स्वरूप ही ‘नेचुको कृषि’ का जन्म हुआ। 
अपने गहन और विशद अध्ययन के बलबूते ही जल-ज़मीन-जंगल पर प्रमाणिक विन्यास और विज्ञान खड़ा किया। अपने खेत में वे पेड़-पौधों के साथ ऊर्जा के तल पर काम करते थे। इनका यह विश्वास था कि यदि कोई भी काम शुद्ध चेतना के साथ किया जाने पर वह अपने पूरे प्रकाट्य के साथ आता है और ऊर्जा का संतुलन बना रहता है।जिससे  कोई भी रोग पैदा नहीं होता। इसे  प्रमाणित करने के लिए उन्होंने पौधों पर यह अनोखा प्रयोग किया। उनके उपजाये मौसमी जैसे फल बाजारों में उपलब्ध फलों की तुलना में अविश्वसनीय रूप से अलग हैं।
 वे एक एकड़ जमीन पर आदर्श खेती का तरीका और जीने का सलीका हमारे लिये छोड़ गए। जैविक खेती को सीखने की चाह रखने वालों के लिए दीपक जी सानिध्य मिलना आसान नहीं था। केवल वही उनका शिष्य हो सकता था जो उनके साथ उस आदिवासी इलाके में तीन साल रह सके। इसे अहंकार नहीं कहा जा सकता क्योंकि जो ज़मीन को समझने में अपना पूरा जीवन झोंक आया हो वही अधिकारी है शिष्य चुनने का ।
माटी के बाबा की सूरत और सीरत किसी फ़कीर-सी रही। सीधे-सच्चे सफ़ेद दाढ़ी, ऐसा लगता है कि कोई संत खेत में साधना में लीन हो …। प्राकृतिक तरीके से जीने वाले वीगन भोजन के पक्षधर दीपक जी उन गिने चुने लोगों में से हैं जो अपनी सहज सोच से चलकर दूसरों के लिए मिसाल क़ायम करते हैं मिट्टी को सोना बना देते हैं। ईश्वर उन्हें चिरशांति प्रदान करे!!धरती के साथ अंतरिक्ष भी धन्य हुआ दीपक सचदे को पाकर!!

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