आलेख

भाषा और संस्कृति का परस्पर पूरक नाता

. मनोहर भण्डारी एम.बी.बी.एस.,एम.डी.             मातृभाषा किसी व्यक्ति,  समाज, संस्कृति या राष्ट्र की पहचान होती है l वास्तव में भाषा एक संस्कृति है,  उसके भीतर भावनाएं,  विचार  और सदियों की जीवन पध्दति समाहित होती है l मातृभाषा ही परम्पराओं और संस्कृति से जोड़े रखने की एक मात्र कड़ी है ... Read More »

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बचा सकती हैं बाजरे की संकर किस्में

 शुभ्रता मिश्रा Twitter handle : @shubhrataravi (इंडिया साइंस वायर) : जलवायु परिवर्तन का असर फसल उत्पादन पर भी बड़े पैमाने पर पड़ रहा है। यदि शुष्क क्षेत्रों में सूखा एवं तापमान सहन करने में सक्षम फसलों की संकर किस्मों का उपयोग किया जाए तो पैदावार पर पड़ने वाले जलवायु परिवर्तन ... Read More »

मृदा प्रदूषण से निजात दिलाने में मददगार हो सकती है फफूंद की नई प्रजाति

राजेश अग्रवाल Twitter handle : @agrrajesh (इंडिया साइंस वायर) : बरसात के मौसम में लकड़ियों के ढेर या फिर पेड़ के तनों पर पाए जाने वाले फफूंद अक्सर दिख जाते हैं। भारतीय वैज्ञानिकों ने एपीसी5 नाम के ऐसे ही एक नए फफूंद की पहचान की है, जो मिट्टी में पाए ... Read More »

जनजातियों का पारंपरिक खगोलीय ज्ञान वैज्ञानिकों को दे सकता है नई दिशा

शुभ्रता मिश्रा Twiter handle : @shubhrataravi  (इंडिया साइंस वायर) : भारत की जनजातियों का खगोल-विज्ञान संबंधी पारंपरिक ज्ञान अनूठा है। मुंबई स्थित टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के वैज्ञानिकों ने मध्य भारत की चार जनजातियों के पारंपरिक ज्ञान पर किए गए गहन अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है। ... Read More »

धन्य है ऐसी शिक्षा व्यवस्था !

शुकदेव और क्यूटू सुरेश गुप्ता क्यूटू।  हाँ उसे हम प्यार से क्यूटू ही कहते हैं। क्यूटू मेरी पत्नी की बड़ी बहन के इकलौते पुत्र मानस और मेधा का पुत्र है। अभी दो माह पहले हमने भोपाल में उसकी पहली वर्षगाँठ का जश्न मनाया। दो-चार दिन पहले जब दफ्तर से घर ... Read More »

संघ बढ़ रहा है, देश बदल रहा है

डा. अनिल सौमित्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 92 साल का हो चुका है l आज से आठ साल बाद संघ स्थापना के 100 साल पूरे हो जायेंगे l 1925 में दशहरे के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी l राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का ... Read More »

आरुषी को अधूरा न्याय, हत्यारा कौन?

 -ऋतुपर्ण दवे rituparndave@gmail.com आरुषी हत्याकाण्ड बेहद सुर्खियों में रहा और क्येंकि संवेदनशील तो थी ही उससे ज्यादा यह उस नोएडा में घटा जो टीवी चैनलों का हब है। बैठे बिठाए देश-दुनिया की नजरें इस पर टिक गईं। एक से एक मोड़ आए, नित नए किस्से सुनाई देने लगे। पुस्तक तक ... Read More »

परिवर्तन यात्रा :

विजयलक्ष्मी सिंह ……..तेज झटके के साथ जैसे ही एयरपोर्ट रनवे से हवाई जहाज़ आसमान की ओर उठा , पहली बार हवाई यात्रा कर रहे सोनू को थोड़ा डर सा लगा । एक अजीब सी सिहरन उसे रीढ़ में दौड़ती महसूस हुई। मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के छोटे से गांव सिरौल ... Read More »

आर्थ‍िक मोर्चे पर व्‍यर्थ मचता हाहाकार!

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी देश में इन दिनों आर्थ‍िक मोर्चे पर जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार को घेरना का प्रयास हो रहा है, उसे देखकर बार-बार यही प्रश्‍न खड़ा हो रहा है कि आखिर इस तरह का वातावरण क्‍यों निर्मित किया जा रहा है क्‍या प्रधानमंत्री नरेंद्र ... Read More »

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और हिंदी की उन्नति

रवि रतलामी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ क्या हिंदी उन्नति के लिए वास्तव में कुछ योगदान कर रही हैं? माफ़ कीजिएगा सच यही है कि कंपनियाँ केवल और केवल अपने मार्केटिंगऔर बाजार के हिसाब से स्ट्रेटेजी बनाती हैं और यदि उनमें फायदा दिखता है और मिलता है, तभी वे कोई काम करती हैं, ... Read More »