आलेख

ज्यादा खाने से हो रही हैं ज्यादा मौतें

राकेश दुबे कम खाएं, थोड़ा-थोड़ा खाएं, बार-बार खाएं, ताजा खाएं, घर का पका हुआ खाएं. भारत में प्रति व्यक्ति भोजन खर्च घटता जा रहा है, भोजन के नाम पर लोग कुछ भी खा लेते है | खान-पान की इस बिगडती आदत का परिणाम मौत के रूप में सामने आता है ... Read More »

विटामिन की कमी से ग्रस्त हैं स्वस्थ दिखने वाले शहरी लोग

मोनिका कुंडू श्रीवास्तव Twitter handle: @monikaksrivast1 एक नए अध्ययन से पता चला है कि भारत में स्वस्थ दिखने वाले अधिकतर शहरी लोग विटामिन की कमी से ग्रस्त हैं। हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पोषण संस्थान के वैज्ञानिक 30-70वर्ष के लोगों में विटामिन के स्तर का अध्ययन करने के बाद इस नतीजे पर ... Read More »

दुआ में उठ चुके हैं, किसानों के हाथ

राकेश दुबे देश चुनाव में लगा है, किसान के हाथ दुआ मांग रहे है| उसे  अनुमान लग गया है कि कोई भी जीते उसके अच्छे दिन नहीं आ रहे हैं |  जून-जुलाई में मॉनसून के कमजोर रहने की आशंका हर किसान के लिए चिंताजनक है.|बारिश का अनुमान लगानेवाली निजी संस्था ... Read More »

कुपोषण से हृदय रोग तक लड़ने में मदद कर सकते हैं गांधी के सिद्धांत

दिनेश सी. शर्मा Twitter handle: @dineshcsharma पैदल चलना, शारीरिक गतिविधियां, ताजा सब्जियों व फलों का सेवन, शर्करा, नमक तथा वसा वाले खाद्य पदार्थों का कम सेवन, तंबाकू तथा शराब से दूरी और पर्यावरणीय एवं व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना। कुछ लोगों को ये बातें विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी गैर-संचारी एवं ... Read More »

हिम तेंदुओं के संरक्षण में मदगार हो सकती है सामुदायिक भागीदारी

एस. सुरेश रमणन Twitter handle: @sureshramanan01 हिम-तेंदुओं के संरक्षण में स्थानीय समुदायों को शामिल करना और उनकी आजीविका सुनिश्चित करना एक बेहतर रणनीति हो सकती है। भारतीय शोधकर्ताओं के एक ताजा अध्ययन में यह बात उभरकर आयी है। हिम-तेंदुओं के प्रमुख आवास स्थल लद्दाख में यह अध्ययन किया गया है। ... Read More »

आखिर देश को क्या हो गया है!

राजीव खण्डेलवाल ‘‘पुलवामा’’ में हुई बड़ी वीभत्स आंतकी घटना में 40 सैनिकों के शहीद हो जाने की प्रतिक्रिया स्वरूप पाकिस्तान में घुस कर बालाकोट में किये गये हवाई हमलों के द्वारा ‘‘जैश-ए-मोहम्मद’’के आंतकवादी कैम्प (प्रशिक्षण शिविर) को नष्ट करने के बाद सम्पूर्ण देश ने एक जुट होकर सेना व सरकार ... Read More »

कामकाजी महिलाओं की समस्याएं समाधान और विकल्प

अन्नपूर्णा वाजपेयी बदलते वक्त ने महिलाओं को आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक रूप से सशक्त किया है और उनकी हैसियत एवं सम्मान में वृद्धि हुई है. इसके बावजूद अगर कुछ नहीं बदला तो वह है महिलाओं की घरेलू जि़म्मेदारी. खाना बनाना और बच्चों की देखभाल अभी भी महिलाओं का ही काम ... Read More »

कांग्रेस का घोषणा-पत्र : क्या “जनआवाज़” और क्या निभाएंगे ?

राकेश दुबे “जनआवाज” “हम निभाएंगे शीर्षक से कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया । राहुल गांधी का कहना है कि यह घोषणापत्र बंद कमरे में बैठकर नहीं बल्कि देश के कोने-कोने में बैठे लाखों लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। अब सवाल से ज्यादा ... Read More »

बेमानी होगा कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के बिना समस्या का हल ढूंढना

डा. रविन्द्र अरजरिया विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र में चुनावी घमासान शुरू हो गया है। जम्मू-कश्मीर को लेकर आरोपों-प्रत्यारोपों का बाजार गर्म है। कांग्रेस पार्टी में मुख्य सलाहकार की अप्रत्यक्ष भूमिका निभाने वाले सैम पित्रोदा के बयानों ने जहां पाकिस्तानी सरकार को आतंकवाद के मसले पर क्लीन चिट दे दी ... Read More »

कन्हैया : छात्र राजनीति में कलुषित मानसिकता का दावानल

डा. रवीन्द्र अरजरिया भारत गणराज्य को टुकडों-टुकडों में विभक्त करने का मंसूबा पालने वाले कन्हैया कुमार को भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी ने न केवल बेगूसराय से लोकसभा की चुनावी जंग में उतारा बल्कि अपने सिद्धान्तों से भी समझौता करते हुए पहली बार क्राउड फंडिग को धन संग्रह का हथियार भी बना ... Read More »