आलेख

वेलेंटाइन डे का सच

विजय कुमार बाजार भी बड़ी अजीब चीज है। यह किसी को भी धरती से आकाश  या आकाश से धरती पर पहुंचा देता है। यह उसकी ही महिमा है कि भ्रष्टाचारी नेताओं को अखबार के पहले पृष्ठ पर और समाज सेवा में अपना जीवन गलाने वालों को अंदर के पृष्ठों पर ... Read More »

माओवादियों का सच

विश्वरंजन माओवादी दस्तावेजों में यह बात साफ है कि उनकी लोकतांत्रिक व्यवस्था और इस देश की न्याय व्यवस्था में कोई आस्था नहीं है और मूलत: वे उसे हिंसा तथा अन्य तरीकों से ध्वस्त करेंगे। जब मैं एक गिरफ्तार सी.पी.आई. (माओवादी) केसेन्ट्रल कमेटी के सदस्य से पटना में बात कर रहा ... Read More »

राष्ट्रहित में बाधक काला धन

अमल कुमार श्रीवास्तव आम जनता काले धन से जितना आर्थिक रूप से चिंतित है उससे कहीं अधिक सफेदपोशों द्वारा विदेशों में जमा किए जा रहें लाखों करोड़ों रूपए के काले धन के आकड़े सुनकर और इसे रोकने में नीति नियंताओं की लापरवाही देखकर मानसिक रूप से पीड़ीत हो रही है। ... Read More »

गुरु संस्मरण भाग -१

तनुजा ठाकुर पिछले एक वर्षसे हमारे कुछ मित्र हमें पुस्तक लिखनेके लिए बारबार कह रहे हैं वस्तुतः पिछले चौदह वर्षोंसे पूर्ण समय आध्यत्मिक जीवन जीने के कारण यदिकुछ लिख भी सकी तो इसी विषय पर लिखूंगी परन्तु मेरे श्रीगुरु ने ऐसा कोई विषय छोड़ा ही नहीं है कि मैं कुछ ... Read More »

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आतंकवादी नहीं राष्ट्रवादी संगठन है

नीरज कुमार दुबे पिछले कुछ समय से संघ परिवार को लगातार आड़े हाथ ले रहे कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द को स्थापित करने के बाद अब ‘संघी आतंकवाद’ शब्द को स्थापित करने में जी जान से जुट गये हैं इसके लिए उन्होंने 30 जनवरी 2011 को महात्मा गांधी ... Read More »

काला-धन-काली कमाई और राजनीति

पवन सिह देश के एक अरब से ज्यादा देशवासियों से जिसमे मैं स्वयम भी शामिल हूँ जानना चाहता हूँ ,साथ ही सभी सहित अपनी अंतरात्मा से पूछना एक नैतिक दायित्व मानते हुवे प्रश्न करता हूँ ,की देश की खून पशीने की गाढी कमाई का बड़ा भाग लगभग ६७००० हज़ार अरब रूपये अवैध रूप से ... Read More »

मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् विकास में जनभागीदारी का ताना-बाना

अनिल सौमित्र सभी के विकास के लिए यह आवश्यक है कि हम सभी साथ चलें, साथ बोलें और साथ-साथ सोचें। विकास के हितग्राही बनने से पहले हमें विकास में सहभागी बनना होगा।  अर्थात् – संगच्छध्वम् संवद्ध्वम्। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् का यही सूत्र वाक्य है। विकास को सर्वस्पर्शी और सर्वग्राही ... Read More »

मानव व्यवहार की जटिलताएं

लवली कुमारी/Lovely kumari मनुष्य का व्यवहार किन चीजों से निर्धारित होता है? उसमे सामाजिकता का क्या प्रभाव है? क्या व्यक्ति विशेष के लिए आक्रामकता का प्रदर्शन एक सीखी हुई प्रक्रिया है? जैविक द्वन्द और सामाजिक नियमन में अधिक प्रभावी क्या है, और कब है? क्या आदर्श व्यक्तित्व का खाका खिंच ... Read More »

आचार्य गिरिराज किशोर : राजपथ से रामपथ पर

विजय कुमार विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक आचार्य गिरिराज किशोर का जीवन बहुआयामी है। उनका जन्म 4 फरवरी, 1920 को एटा, उ.प्र. के मिसौली गांव में श्री श्यामलाल एवं श्रीमती अयोध्यादेवी के घर में मंझले पुत्र के रूप में हुआ। हाथरस और अलीगढ़ के बाद उन्होंने आगरा से इंटर की ... Read More »

भोपाल गैस कांड : अदालती फैसले पर मचा हाहाकार

अपने देश की अदालत भी अपनों को न्याय नहीं दे सकती भोपालवासियों के साथ अब न्याय की चैखट पर हुई दूसरी त्रासदी भोपाल। भोपाल के अनेक परिवार बिखर गए उस गैस त्रासदी में। आज 25 साल से भी अधिक हो गए न्याय की आस लगाए। उस समय जो मां के ... Read More »