आलेख

मानव व्यवहार की जटिलताएं

लवली कुमारी/Lovely kumari मनुष्य का व्यवहार किन चीजों से निर्धारित होता है? उसमे सामाजिकता का क्या प्रभाव है? क्या व्यक्ति विशेष के लिए आक्रामकता का प्रदर्शन एक सीखी हुई प्रक्रिया है? जैविक द्वन्द और सामाजिक नियमन में अधिक प्रभावी क्या है, और कब है? क्या आदर्श व्यक्तित्व का खाका खिंच ... Read More »

आचार्य गिरिराज किशोर : राजपथ से रामपथ पर

विजय कुमार विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक आचार्य गिरिराज किशोर का जीवन बहुआयामी है। उनका जन्म 4 फरवरी, 1920 को एटा, उ.प्र. के मिसौली गांव में श्री श्यामलाल एवं श्रीमती अयोध्यादेवी के घर में मंझले पुत्र के रूप में हुआ। हाथरस और अलीगढ़ के बाद उन्होंने आगरा से इंटर की ... Read More »

भोपाल गैस कांड : अदालती फैसले पर मचा हाहाकार

अपने देश की अदालत भी अपनों को न्याय नहीं दे सकती भोपालवासियों के साथ अब न्याय की चैखट पर हुई दूसरी त्रासदी भोपाल। भोपाल के अनेक परिवार बिखर गए उस गैस त्रासदी में। आज 25 साल से भी अधिक हो गए न्याय की आस लगाए। उस समय जो मां के ... Read More »

सभ्यता और संघर्ष की कहानी है नर्मदा

रमेश शर्मा मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा गंगा से भी प्राचीन नदी है। भारतीय पुराण परंपरा में विषयों का वर्णन करने की एक शैली है। यह नर्मदा की महत्ता और उसके स्थायी भाव की ही विशेषता है कि नर्मदा का वर्णन न केवल पुराण में है, बल्कि ... Read More »

मध्यप्रदेश के मेले सभ्यता, संस्कृति और लोक-परंपराओं के पुण्य प्रवाह की अभिव्यक्ति हैं

अनिल सौमित्र प्रख्यात विचारक रवीन्द्रनाथ टैगोर और बाद में ओशो ने कहा – उत्सव आमार जाति, आनंद आमार गोत्र। संत का यह वाक्य मनुष्य की प्रकृति और उसके स्वभाव का सूत्रबद्ध विश्लेषण है। भारतीय मनसा के लिए उत्सव उत्सव-महोत्सव और मेले सि;रंत नहीं, बल्कि जीवनचर्या है। इसीलिए वर्षभर के बारहों ... Read More »

सिमट-सिमट जल भरहिं तलाबा

अनुपम मिश्र आज हर बात की तरह पानी का राजनीति भी चल निकली है। पानी तरल है, इसलिए उसकी राजनीति भी जरूरत से ज्यादा बहने लगी है। देश का ऐसा कोई हिस्सा नहीं है, जिसे प्रकृति उसके लायक पानी न देती हो, लेकिन आज दो घरों, दो गांवों, दो शहरों, ... Read More »