पर्यावरण

सेलफोन टॉवर से सावधान रहना जरूरी

मानव इतिहास में पाषाण काल, पुनर्जागरण काल, अंधकार युग, औद्योगिक युग, अंतरिक्ष युग आदि कुछ प्रसिद्ध काल खंड है। लेकिन मानव इतिहास के बीते दस हजार वर्ष के काल में विद्युत-चुंबकीय युग जैसा कोई काल खंड सुनने में नहीं आया है। जबकि इसके बारे में हमें जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि ... Read More »

अस्तित्व के संकट से गुजर रहे गिद्धों की संख्या स्थिर : रिपोर्ट

दक्षिण एशिया में गिद्धों को बचाने के लिए कई साल की कोशिश के बाद इस संकटग्रस्त प्रजाति की संख्या भारत और नेपाल में स्थिर हो गई है। प्लोस वन नाम के विज्ञान जर्नल में प्रकाशित नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने भारत और नेपाल में गिद्धों की दीर्घकालिक निगरानी के नतीजे ... Read More »

गंगा में प्रदूषण

चित्रा अवस्थी  धर्मपरायण भारतीय समाज में प्रकृति की संरक्षण  तथा उससे तादात्म्य स्थापित करने के कई उपाय सोचे गए, उनमे से एक था प्रकृति को धर्म से जोड़ना. इसी सोच के चलते प्रकृति पूजन की परम्परा जन्मी , नदियों को माता, पर्वतराज  हिमालय को शिव की  शक्ति पार्वती का पिता , वृक्षों को पुत्र, और सागर ... Read More »

पानी के लिये मचेगा हाहाकार

देश में सिर्फ 30 फीसदी बचा भूजल भंडार वैज्ञानिकों ने चुनौती दी है कि भारत में सिर्फ 30 फीसदी भूजल भंडार बचा हुआ है। अभी सचेत नहीं हुए तो आने वाले 20 वर्षों में यह भंडार समाप्त होने की कगार पर पहुंच जाएगा। यहां चल रहे विश्व स्तरीय पांचवें भूजल ... Read More »

अंडा लेकर चींटी जाए तो बरखा भरपूर

– संजय रोकड़े आ ज से कई वर्षों पहले जब मौसम विभाग जैसा कोई विभाग न था और न ही ऐसी मशीनें और कम्प्यूटर थे जो कि मौसम की भविष्यवाणी कर सकें तब लोग अपनी सूझबूझ से आसमान की सजीव प्रयोगशाला के आंकड़े पढ़कर मौसम की भविष्यवाणी करते थे। पारंपरिक ज्ञान ... Read More »

पर्यावरण के लिए व्यक्ति, संस्था और समुदाय का जोश और जुनून

पर्यावरण संरक्षण से बदली तकदीर तस्वीर अनिल सौमित्र जोश एवं जुनून के बेजोड़ संगम ने कुछ ऐसा कर दिखाया कि देवास जिले का ही नहीं, कई दूसरे गांवों की तस्वीर और हजारों किसानों की तकदीर बदल गई। किसी गांव में सभी के पक्के मकान हों, आधे से ज्यादा के पास ... Read More »

..तो 2030 तक दुर्लभ हो जाएगा जल

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न उबरे, मोती मानूष चून। सैकड़ों साल पहले लिखा गया यह दोहा कभी नीति वाक्य लगता था, लेकिन अब डराता है। सचमुच वह दिन आने वाला है, जब पानी के कारण सब सूना होने वाला है। अगर मनुष्य जाति समय रहते ... Read More »

खनिज संपदा के दोहन की होड़

विश्व संसाधन रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि खनिजों की प्रति व्यक्ति खपत औद्योगिक व विकसित देशों में विकासशील देशों से कहीं अधिक है। इन देशों में कोयले और तेल की प्रति व्यक्ति खपत नौ गुना अधिक है। अल्यूमिनियम की खपत बीस गुना अधिक है और ... Read More »

प्लास्टिक की बोतलों से बन रहा घर

नाईजीरिया: दो बेडरूम, किचन और आंगन का मकान ६.२२ लाख रु. में एजेंसी. सैबोन येल्वा (नाईजीरिया)। नाईजीरिया के एक गांव में लोग अब प्लास्टिक की बोतलों से घर बना रहे हैं। इन बोतलों से आप कम से कम तीन मंजिला मकान बना सकते हैं, पर सही और नियंत्रित गणना के ... Read More »

इसलिए खराब नहीं होता गंगाजल

सहारनपुर। गंगा जल आखिर खराब क्यों नहीं होता ? पतित पावनी गंगा नदी का नाम आते ही ये सवाल अक्सर दिमाग को खटखटा देता है। लेकिन इसका भी जवाब मिल गया है। दरअसल, हिमालय की कोख गंगोत्री से निकली गंगा का जल इसलिए कभी खराब नहीं होता, क्योंकि इसमें गंधक, ... Read More »