फीचर्स

सभ्यता और संघर्ष की कहानी है नर्मदा

रमेश शर्मा मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा गंगा से भी प्राचीन नदी है। भारतीय पुराण परंपरा में विषयों का वर्णन करने की एक शैली है। यह नर्मदा की महत्ता और उसके स्थायी भाव की ही विशेषता है कि नर्मदा का वर्णन न केवल पुराण में है, बल्कि ... Read More »

मध्यप्रदेश के मेले सभ्यता, संस्कृति और लोक-परंपराओं के पुण्य प्रवाह की अभिव्यक्ति हैं

अनिल सौमित्र प्रख्यात विचारक रवीन्द्रनाथ टैगोर और बाद में ओशो ने कहा – उत्सव आमार जाति, आनंद आमार गोत्र। संत का यह वाक्य मनुष्य की प्रकृति और उसके स्वभाव का सूत्रबद्ध विश्लेषण है। भारतीय मनसा के लिए उत्सव उत्सव-महोत्सव और मेले सि;रंत नहीं, बल्कि जीवनचर्या है। इसीलिए वर्षभर के बारहों ... Read More »

सिमट-सिमट जल भरहिं तलाबा

अनुपम मिश्र आज हर बात की तरह पानी का राजनीति भी चल निकली है। पानी तरल है, इसलिए उसकी राजनीति भी जरूरत से ज्यादा बहने लगी है। देश का ऐसा कोई हिस्सा नहीं है, जिसे प्रकृति उसके लायक पानी न देती हो, लेकिन आज दो घरों, दो गांवों, दो शहरों, ... Read More »

किसान और गरीब के लिये स्वयं को दांव पर लगा दूंगी : उमा भारती

उत्तरप्रदेश में भाजपा के लिए ब्लैंक चेक हूं : उमा भारती उमा भारती राज सत्ता से नही संघर्ष और तपस्या की सत्ता से गाय और गरीब की रक्षा करेंगी। 31 जनवरी को भोपाल में किसान संघर्ष मोर्चा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि किसान और गरीब के मै ... Read More »

डरपोक थे पंडित नेहरू : प्रो. टेंग

डॉ. मोहन कृष्ण टेंग कश्मीर विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे दिसम्बर 1991 में विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर समस्या का गहनतम अध्ययन किया है। उनकी कश्मीर मामले पर कई पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं; जिनमें- कश्मीर अनुच्छेद-370, मिथ ऑफ ऑटोनामी, कश्मीर स्पेशल स्टेटस, ... Read More »

न्यू मीडिया: चुनौतियाँ और संभावनाएं” का लोकार्पण

इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित किताब “न्यू मीडिया: चुनौतियाँ और संभावनाएं” का लोकार्पण 29 जनवरी को माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अच्युतानंदन मिश्र ने मालवीय स्मृति भवन में किया। इस किताब में, न्यू मीडिया के इतिहास, समस्याएं, संभावनाएं, चुनौतियां समेत विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला गया है। वरिष्ठ पत्रकार, ... Read More »

विकास की बात विज्ञान के साथ, विज्ञान की बात सबके साथ

विज्ञान के क्षेत्र में बहुत कुछ हुआ है, लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकि है। विज्ञान जब तक खास लोगों का विषय बना रहेगा तब तक इसका पूरा-पूरा उपयोग नहीं किया जा सकता। विज्ञान को विकास से जोड़ना होगा। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के महानिदेशक प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा ... Read More »

किसानों को कर्महीन बनाया जा रहा है

कहते हैं हर शाम के बाद सुबह होती है हर दुःख के बाद सुख आता है, विदर्भ के भी कुछ इलाकों में ऐसा ही हुआ, बेहाल और बदहाल विदर्भ को जिस व्यक्ति से रोशनी मिली उसके पास भी एक सपना था वो सपना था विदर्भ को देश में उन्नत कृषि ... Read More »