आलेख

कर्तव्यपरायणता के मूल मंत्र से लक्ष्य भेदन सम्भव

डा. रवीन्द्र अरजरिया राजनैतिक दलों की सरकारों और प्रशासनिक तंत्र के मध्य सहयोगात्मक व्यवहार के साथ-साथ अधिकारों की सीमाओं का भान होना राष्ट्रीय विकास के निर्धारित मापदण्डों का सर्वाधिक महात्वपूर्ण कारक होता है। दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के मध्य हो रही अधिकारों की जंग ने न्यायपालिका को संवैधानिक विवेचना के ... Read More »

हिंदूत्व को कांग्रेसी उपहार: “भगवा आतंकवाद” के बाद “हिंदू पाकिस्तान”

प्रवीण गुगनानी विश्व के सुप्रसिद्ध कूटनीतिज्ञ, राजनयिक, शासक व ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि “इतिहास  पढ़िए ,इतिहास  पढ़िए . इतिहास  में  ही राज्य  चलाने  के सारे  रहस्य छिपे हैं”.  इस बात को यदि हम हम कांग्रेस की भाषा में कहें तो यह बात कुछ इस ... Read More »

कांग्रेस अपने गिरेबां में भी तो झांके

– लोकेन्द्र सिंह पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह सहित कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भाषण-शैली पर आपत्ति दर्ज कराई है। कर्नाटक के हुबली में दिए गए भाषण को आधार बनाकर पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वह ... Read More »

बच्चों का निर्माणाधीन संसार

कौशलेंद्र प्रपन्न यदि हमें यह देखना-समझना हो कि बच्चों का संसार कैसा और कैसे बनाया जा रहा है, तो हम किसी भी स्कूली कक्षा चाहे पहली कक्षा हो या कक्षा आठ, में बैठ कर अनुमान लगा सकते हैं। वयस्कों द्वारा निर्माणाधीन बच्चों के संसार को समझने के लिए शिक्षकों की ... Read More »