राष्ट्रीय सुरक्षा के सन्दर्भ में भारत की चुनौतियां

डा. अंशुल उपाध्याय
भारत गुटनिरपेक्षता, बंधुत्व, अनेकता में एकता, का भाव लिए ना जाने कितने वर्षो से इस संसार के अस्तित्व में हैं। मगर वैदिक काल से अब तक लगातार भारत के सामने एक के बाद एक चुनौतिया आयी है, जिनसे निपटने के लिए हम लगातार प्रयासरत है। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान अस्तित्व में आया। और भारत को 15 अगस्त 1947 में स्वतंत्रता मिली। उस समय भारत और पाकिस्तान दोनों के सामने अपने राष्ट्र निर्माण का प्रश्न था। ऐसी स्थिति में जहाँ एक ओर भारत अपने राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रयासरत हो रहा था, वही दूसरी ओर पाकिस्तान कश्मीर पर आक्रमण की योजना बना रहा था। अंततः अक्टूबर 1947 में पकिस्तान ने अपने सैनिकों को कबालियो का भेष धरवाकर भारत पर हमला बोल दिया। तब से अब तक पाकिस्तान ने भारत पर कई बार हमले किये और नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया।
परंतु, भारत ने पाक को हर बार धूल चटाई और साथ साथ भारत के निर्माण पर भी बल दिया।इस दौरान कई पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ किया गया और विभिन्न क्षेत्रो को उन्नत बनाने की दिशा में प्रयत्न किये गए। पर अब प्रश्न ये उठता है कि, आज जब हम 21 वी सदी में प्रवेश कर गए है, तब भी, भारत के सामने देश की सुरक्षा के सन्दर्भ में विभिन्न चुनौतियां खड़ी हुई है, जिनसे समय रहते निपटना अति आवश्यक है, जिनमे आंतरिक चुनौतियो में भाषावाद, राज्यवाद, जातिवाद, भरष्टाचार, बेरोजगारी, कुपोषण, गरीबी, अस्पृश्यता, आदि है।और बाहरी चुनौतियो में आतंकवाद, ग्लोबल वार्मिंग, नक्सलवाद, गुटबंदी, परमाणु संकट आदि है। ये सभी चुनौतिया ऐसी है कि, विभिन्न प्रयासों द्वारा समय के साथ साथ इनसे निपटा जाना अति आवश्यक है तभी हम विश्व राजनीती में उच्च स्थान ग्रहण कर पाएंगे साथ ही भारत की अर्थव्यवस्थता को भी अन्य देशों की अपेक्षा अत्यधिक गति दे पाएंगे। हॉल ही में फोब्स पत्रिका में मोदी जी को दुनिया का 9 वा सबसे ताकतवर व्यक्ति बताया गया है। साथ ही इंडियन आर्मी को विश्व की 4 थी सबसे बड़ी आर्मी का दर्जा प्राप्त हुआ है। ये बात विश्व राजनीती में ये साबित करती है कि, इण्डिया लगातार तरक्की पर है। किंतु चिंता अब हालिया में हुए वाक्ये से उठ रही है जिसमे ये बात सामने आयी है कि अमेरिका ने ईराक के साथ 2015 में हुए पमाणु समझौते से हाथ खींच लिए है। इस बात का असर ना केवल अमेरिका और ईराक पर पड़ेगा बल्कि संपूर्ण विश्व पर भी पड़ने वाला है। जिसमे भारत को भी चिंता करने की आवश्यकता है, क्योंकि भारत अपने तेल का अधिकांश हिस्सा मध्य एशिया से ही आयत करता है।तेल के दाम बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए अब इस चुनौती से निपटने के लिए भारत के प्रधान मंत्री को ही नहीं वरन भारत के प्रत्येक व्यक्ति को प्रयास करने की जरुरत है। तेल की छोटी छोटी बचत हर रोज़ करने की आवश्यकता है।
जो साईकिल रिटायर्ड कर दी गयी है उन्हें दोबारा निकालिये। गाड़ियों का उपयोग आवागमन हेतू कम से कम कीजिये। बात छोटी है, पर बहोत असरदार है।क्योंकि , आज हम जो करते है आने वाली पीढ़ी को  उसका ही परिणाम देते है। साथ ही भारत के हर साधारण व्यक्ति के प्रयास के साथ ही हम धीरे धीरे पर्यावरण प्रदूषण, और संसाधनों की कमी जैसे संकट से भी शीघ्र ही निपटते नजर आयेंगे। बूंद बूंद से घड़ा भरता है। जीतने के लिए एक एक वोट गिना जाता है, उसी तरह अगर वाकई में हमे अपने देश के लिए कुछ अच्छा करना है तो शुरुवात अपने घर से किजिए। पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने में सहयोग करे। साथ ही संसाधनों की भी बचत करे। एक साकक्षर, सुदृर्णय, संम्पन्न भारत के सपने को साकार करने के लिए सतत प्रयत्न करते रहे। ” करत करत अभ्यास के, जड़मति होत सुझान। रसरी आवत जाट ही सिल पर, पड़त निशान”।। आज की बचत ही कल का राशन है।
लेखिका ‘भारत-पाक मामलों” की अध्येता व विशेषज्ञ हैं

One comment

  1. सही बात है,देश का प्रत्येक व्यक्ति यदि पेट्रोल-डीजल की बचत करे तो एक ओर प्रदूषण में कमी आएगी साथ ही तेल की इस राष्ट्रीय समस्या से आसानी से निपट लिया जाएगा।

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