बाग़ी कांग्रेसी विधायकों का दिल मांगे More !

गद्दी के लिए बग़ावत, कहीं पलट ना दे बाज़ी !

भोपाल : आख़िरकार चार दिन की लंबी खींचतान के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने 28 कैबिनेट मंत्रियों को विभाग बांटने में कामयाब रहे। विभाग बंटवारे के बाद मंत्रियों के बीच कामकाज संभालकर अपना नंबर बनाने की होड़ लग रही है, लेकिन कुछ विधायकों को मंत्री बनने का मौक़ा नहीं मिला तो उन्होंने बग़ावत के रास्ते पर क़दम बढ़ाते हुए दिल्ली दरबार पहुंच गए, और अपनी फ़रियाद सुनाते-सुनाते लगे इस्तीफ़े की धमकी देने। एमपी कांग्रेस में समन्वय बिठाने का ज़िम्मा संभाल रहे दिग्विजय सिंह ने पहले मंत्रियों के विभागों का तालमेल बिठाया और फिर पहुंच गए दिल्ली, जहां डेरा डाले बग़ावती विधायकों के मान-मनौव्वल का दौर जारी है। उन्हें लगातार समझाया जा रहा है कि उन्हें भी मंत्री का पद दिया जा सकता है, इस बीच ख़बर ये भी गर्म हो रही है कि बीजेपी के एक कद्दावर मंत्री रहे चमकदार नेता, दिल्ली में डेरा डालकर पार्टी आलाकमान को ये समझाने में एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रहे हैं, कि कांग्रेस के कम से कम 10 से 11 बाग़ी विधायकों का इस्तीफ़ा, और निर्दलीय विधायकों को साथ मिलाकर, मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनाने का रास्ता साफ हो सकता है। ज़ाहिर तौर पर कांग्रेस के लिए ये ख़बर सिरदर्द पैदा करने वाली हो सकती है, कि अभी तो सरकार ने ठीक से काम करना भी शुरू नहीं किया, कि सरकार को हिलाने-डुलाने की साज़िशें शुरू हो गईं। हालांकि सियासी गलियारे में ये भी चर्चा है कि बीजेपी सरकार एमपी में अपनी सरकार बनाने के लिए, निर्दलीय और कुछ बाग़ी कांग्रेसी विधायकों के आसरे कुछ सियासी खेल करती भी है, तो लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा करना बीजेपी के लिए सेल्फ़ गोल करने जैसा हो जाएगा। लिहाज़ा बीजेपी के रणनीतिकार आलाकमान को ये ज़रूर समझाने की कोशिश कर रहे होंगे कि फ़िलहाल ऐसा करना ठीक नहीं है, और धीरे सुलगते रहने दिया जाए, ताकि जब पूरी तरह सियासी चूल्हा गर्म हो जाए तो उसे जमकर भड़काकर उसमें अपनी सत्ता की रोटी सेंक ली जाए। वैसे भी सियासत के खेल में सबकुछ संभव है, लिहाज़ा इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कुछ महीनों के बाद सरकार की शक्ल बदल सकती है, जैसा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल में बयान भी दिया था कि कांग्रेस की एमपी सरकार ज़्यादा दिन नहीं चल पाएगी। अब सवाल यही है कि क्या मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज़ कांग्रेसी विधायक सरकार गंवाने वाली बीजेपी को सत्ता की चाबी फिर से देने की सियासत में तो नहीं जुट गए हैं।

 

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