गौ-अभ्यारण्य की बॉयो फेसिंग होगी : मुख्यमंत्री चौहान

दान में भूसा प्राप्त करने का चलेगा अभियान

भोपाल : 18 सितम्बर, 2017

बैठक में प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग श्री प्रमोद अग्रवाल, जल संसाधन श्री पंकज अग्रवाल, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री मनोज गोविल, पशुपालन विभाग श्री अजीत केसरी, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री अशोक वर्णवाल, श्री एस.के. मिश्रा, आयुक्त शहरी एवं नगरीय विकास श्री विवेक अग्रवाल, संभागायुक्त उज्जैन श्री एम.बी. ओझा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि गौ-अभ्यारण्य के साथ समाज को जोड़ने के प्रभावी प्रयास किये जायें। अभ्यारण्य के लिए दान में भूसा प्राप्त करने का अभियान निकटवर्ती क्षेत्रों में चलाया जाये। इससे अभ्यारण्य के साथ जनभावनाएँ जुड़ेंगी। समाज की भागीदारी बढ़ेगी। उन्होंने अभ्यारण्य में बॉयो फेंसिंग करवाने के निर्देश दिए। श्री चौहान आज मंत्रालय में गौ-अभ्यारण की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर कार्यपरिषद गोपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष स्वामी श्री अखिलेश्वरानंद उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि गौ-अभ्यारण्य का संचालन प्रेम श्रद्धा और आस्था के साथ किया जाए। अभ्यारण्य गौ-सेवा से इंसान सेवा का प्रयास है। अभ्यारण्य का उद्देश्य तभी सफल होगा जब इसकी व्यवस्थाओं के संचालन में समाज की सक्रिय भागीदारी हो। व्यवस्थाओं में जनभागीदारी के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं और प्रावधान भी निर्धारित किए जाएं। अभ्यारण्य संचालन का भविष्य समाज के द्वारा आत्मनिर्भर संचालन में ही है। अभ्यारण्य में नस्ल सुधार जैविक खाद और जैविक कीट नियंत्रण के क्षेत्र में शोध और अनुसंधान के कार्य भी किए जाएं। अभ्यारण्य की क्षमता अनुसार ही गौवंश को रखा जाए। स्वास्थ्य परीक्षण उपचार की समुचित व्यवस्था हो। चारा पेयजल और घास की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में हो।

उन्होंने अभ्यारण्य से संबंधित विभागों के जिला एवं राज्य स्तरीय अधिकारियों की समिति गठित कर प्रतिमाह कार्य की समीक्षा के निर्देश दिए। कहा कि गौ-वंश की नस्ल सुधार और उसके गोबर, मूत्र आदि के प्रभावी उपयोग के लिए शोध और अनुसंधान के कार्यों पर चिंतन, मनन किया जाना जरूरी है। वैज्ञानिकों का दल गठित कर इस दिशा में प्रयास किए जाए। स्वस्थ शुष्क गौधन के पालन में किसानों की भागीदारी के विकल्प पर विचार करने को कहा।

बैठक में बताया गया कि अभ्यारण्य में 20 करोड़ रूपए से अधिक की अधोसंरचना का निर्माण किया जा चुका है। गोवंश के लिए 24 शेड, 12 भूसा शेड, अनुसंधान केन्द्र, पंचगव्य उत्पादन केन्द्र, कृषक प्रशिक्षण केन्द्र, आवासीय परिसर, बायोगैस संयंत्र, नॉडेप एवं केंचुआ खाद उत्पादन इकाईयाँ और 10 किलोवॉट क्षमता के सोलर पैनल लग गए हैं।

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