भाजपा नेतृत्व के लिये संकट!

अजय खेमरिया
अगर ये खबर सही है और रिपोर्टर ने मौके पर जाकर लिखी है तो यह भाजपा नेतृत्व के लिये एक संकट के बराबर है और अगर सिर्फ नए लोकनिर्माण मन्त्री के इनपुट पर लिखी गई है तो मुख्यमंत्री कमलनाथ जी के लिये सोचना पड़ेगा।दोनो के मध्य की खबर है तब भी प्रदेश की गरीब जनता के लिये यह जख्मों पर नमक रगड़ने के समान फिर भी है।
सबसे पहले  बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री जी को एक स्वतंत्र टीम बनानी चाहिए जिसमें संघ के स्वयंसेवक हो जो इस समाचार में उल्लेखित मंत्रियो के पुराने बंगलों की रिपोर्ट की तस्दीक करें।अगर इस खबर के अनुरूप बीजेपी के पूर्व मंत्रियों का आचरण तनिक भी साबित हो तो ऐसे गन्दे औऱ चरित्रहीन लोगों को तत्काल पार्टी से बाहर निकाल फेंकना चाहिये क्योंकि जिन्हें हम मन्त्री पद की शपथ दिलाकर भी देश समाज से अनुराग नही सीखा पाए वो राजव्यवस्था में सहभागी होने के हकदार नही है ये तो देश और समाज के दुश्मन है। जो फर्नीचर,टाइल्स,टोंटी, पर्दे पर ईमान बेच गए हो उन्होंने किस भावना से इस राज्य की सेवा 15 वर्ष की होगी समझा जा सकता है?अगर ये खबर सही है तो पार्टी नेतृत्व को इस विषय पर गंभीरता से सोचना ही चाहिये क्योंकि आम जन इन कारनामों से जनमत को बनाता है ऐसे लोग जिन्होंने इस दुष्कर्म को अंजाम दिया है उन्हें हम पार्टी में ऊपर क्यों रखें?फैक्ट तो यही है स्वर्णिम मप्र के निर्माण का शिवराज जी का सपना आखिर इन निकृष्ट लोगो के रहते पूरा होता भी कैसे?मप्र के स्वर्णिम सपनों के इन चिन्हित हत्यारों को आदरणीय राकेश सिंह जी ,आदरणीय सुहास जी दण्डित कीजिये,ये पार्टी विद डिफरेंस की आमधारणा का सवाल है…..
अब अगर ये खबर सिर्फ नए मंत्रियो को संतुष्ट करने के लिये है तो वक्त है बदलाव का नारा देने वाले कमलनाथ जी,सिंधिया जी,और राजा साब को बैठकर चिंतन करने का सबब है कि जो सत्ता इस 15 बरस बाद जनता से मिली है उसका उनके मंत्रि दोहन करना चाहते है या शोषण?दो दिन पहले तक जिस बंगले में एक मंत्री ठाठ से रहता था वह आज 25 लाख से 1 करोड़ तक की मरम्मत क्यों मांग रहा है?फिर तो पुराने मंत्री जी का अभिनंदन करना चाहिये उनकी सादगी पर। अगर नए मन्त्री औसत 25 लाख बंगलों की मरम्मत पर खर्च कर रहे है औऱ लोकनिर्माण मन्त्री कह रहे है कि बीजेपी के मंत्री बंगले से टोंटी,टाइल्स,पार्टिशन उखाड़ कर ले गए तो एक राज्य के मंत्री के नाते उनकी क्या जबाबदेही बनती है?यही न कि वे पुलिस में प्रकरण दर्ज कराए बीजेपी वालों के खिलाफ।उनकी पेंशन पर रोक के लिये लिखे स्पीकर ऑफिस को,लेकिन वे ऐसा नही करेंगे क्योंकि उन्होंने भी शपथ वही ली है जो उनसे पहले वालों ने पढ़ी थी।यानी हमाम के अंदर ……
#आदरणीय लोकनिर्माण मन्त्री जी 25 लाख की मरम्मत से 5 गरीबों के घरौंदे खड़े हो जाते है.
#पक्का भरोसा है इस धनखर्ची पर कोई कुछ नही बोलेगा क्यों?क्योंकि मुखिया यानी सीएम साहब के बंगले पर ही 2 करोड़ खर्च हो रहे है पीडब्ल्यूडी इसे जर्जर घोषित कर चुका है।
#प्रश्न हमारे राजकाज में सलंग्न लोगो को हमारी व्यवस्था घर,सुविधा, क्यों देती है इसीलिए की उनकी जनसेवा,और समर्पण में एकाग्रता बनी रहे लेकिन मन्त्री,विधायक, सांसद बनते ही सबका ध्यान बंगलों पर जाता है जरा सोचिए क्यों????
इस हमाम में केवल नेता नही है अफसर भी बराबर है नया कलेक्टर जैसे ही जिले में आता है बंगलों के डायमेंशन, डेकोरेशन बदलने लगते है।
हो भी क्यों नही आखिर कितना कठिन है जनसेवा का कंटकाकीर्ण पथ…….

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