बेटी ही आज की नारी और कल की शक्ति

अंशुल उपाध्याय
upadhyayanshul181@gmail.com
बेटी,ईस्वर का दिया हुआ वरदान साबित होती है। जिनके भी घरों में बेटियाँ होती है वह सदा चहल पहल और खुशहाली होती है। और जिनके घर बेटियां नहीं होती उनके घर,दया,करुणा, छमा कम ही देखने को मिलती है। भारत आज विश्व राजनीती पे लोकतांत्रिक देशो की सूची में उच्च स्थान रखने में अग्रणी हो रहा है।ये वही भारत है जहाँ गार्गी जैसी विदुषिया हुयी थी, लक्ष्मीबाई,दुर्गावती,पदमावती जैसी वीर और इंदिरा गाँधी, सरोजनी नायडू जैसी साहसी स्त्रियां हुयी।
समय के साथ नवीनता और तकनीकी ने जहाँ एक और रफ़्तार पकड़ी है वही दूसरी और आज कुछ लोग इसी तकनीकी का गलत इस्तेमाल कर रहे है। लड़कियों को आते जाते परेशान किया जाता है,उनके वीडियो बना के ब्लैक मेल किया जाता है,वो आपकी बात मान ले तो सही न माने तो रेप या एसिड अटैक करके लड़के ये कहते है कि,जो हमारी नहीं तो किसी की नहीं। कुछ लोग जिसके साथ आज संबंध में है,विवाह परिवार की मर्जी से करते है और लड़की को ये कह कर छोड़ देते है कि,जैसे तुम मेरे साथ रह ली तो औरों के साथ भी संबंध बनाकर रखी होगी। मुझे तो पाक साफ लड़की चाहिए।,,,,,,ऐसे लोगो से मै पाक,साफ़ की परिभाषा जानना चाहती हूँ। और ये पूछना चाहती हूँ कि, अगर आपकी बहन बेटी किसी व्यक्ति को पसंद करती है तो क्या वह अब पवित्र नहीं रही। या वो महिला जिसका बालात्कार किया गया वो अब, इतनी पवित्र नहीं रही की उससे कोई विवाह नहीं कर सकता। बल्कि कई मामलो में उसको उसके अपराधी से ही विवाह करने पर मजबूर कर दिया जाता है। पुरुष के चाहे कितनी भी स्त्रियों से सम्बन्ध हो उनको कोई अपवित्र नहीं कहता, फिर महिला के साथ ये भेदभाव क्यों??? आज कल तो छोटी बच्चियों के साथ ज्यातिया हो रही है। कोई कहता है, छोटे कपडे वजह है,कोई कहता कि उसकी सुंदरता भा गयी वो सिर्फ मेरी हो सकती थी,कोई कहता माँ बाप को बच्चो का धयान ज्यादा रखना चाहिए। मै ऐसे लोगो से पूछना चाहती हूँ।कि,जिसने अपराध किया वो बड़ा दोषी है या जिसके साथ हुआ वो?? इन कृत्यों से महिला शारीरिक और मानसिक के साथ साथ सामाजिक पीड़ा भी उठती है। क्या महिला की अपनी स्वतंत्र पसंद या विचार नहीं हो सकते की उसको किसके साथ संबंध रखने है और किसके साथ नहीं? प्रेम संबंधों में जबरजस्ती कैसी? मै भारत की प्रत्येक महिला से कहना चाहूँगी कि, आप बिल्कुल भी कमजोर नहीं है आप अगर एक समय में घर चला सकती है,बच्चे पैदा कर सकती है,नोकरी कर सकती है,तो समाज में इज्जत से जी भी सकती है। किसी पुरुष के आपको छोड़ के चले जाने या रेप हो जाने के बाद आपका अस्तित्व कभी भी समाप्त नहीं होता न ही आप अपवित्र होती है। शारीरिक घाव दवाइयां भर देती है।और मानसिक घाव आपको अपने साहस,बुद्धि,और आत्मविश्वास से भरना होगा।,,,जो दुनिया आज नकार रही है उससे नजरे मिलाकर बात करे और अपने पैरों पर खड़े होकर समाज को अपनी इज्जत करवाने पर मजबूर कर दे। आप अगर कामयाब हो गयी तो आपके अपराधियो को भी आपके सामने नतमस्तक होना ही पड़ेगा।
…..नारी दुर्गा रूप लिए,बुद्धि से सरस्वती है,
सत कर्मो से नारी लक्ष्मी तो,अपने क्रोध से काली भी है।।
हर रूप और दशा में नारी का सम्मान होना ही चाहिए।

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