पीपुल्स समाचार के सम्पादक से रिपोर्टर पर कार्यवाई की मांग

गलत समाचार प्रकाशित करने पर पीपुल्स समाचार के रिपोर्टर के खिलाफ कार्यवाई की मांग l 

तथ्यों का उदघाटन इसलिए जरूरी हुआ है कि गलत और मिथ्या खबरों से पीपुल्स समाचार अखबार, हिंदी विश्वविद्यालय तथा मेरे जैसे व्यक्तियों की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई है l रिपोर्टर के दुराग्रहपूर्ण और मूर्खतापूर्ण कृत्य से एक समाचार प्रतिष्ठान, एक शैक्षणिक संस्थान और मेरी स्वयं की मानहानि हुई है l गलत समाचार के कारण कुलपति, मा. मुख्यमंत्री और महामहिम कुलाधिपति (मा. राज्यपाल) को भी लांछित किया गया है l ऐसा प्रतीत होता है कि आपके रिपोर्टर द्वारा जानबूझकर बहकावे में आकर, पैसे के लोभ में या फिर किसी षडयंत्रवश यह आपराधिक कृत्य किया गया है l आपसे विनम्र निवेदन है कि इस विषय पर गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेते हुए उक्त खबर का खंडन प्रकाशित करें ताकि पीपुल्स समाचार के साथ ही हिंदी विश्वविद्यालय और मेरी स्वयं की मानहानि का परिमार्जन हो सके l संभव हो तो कृपया उक्त रिपोर्टर के प्रति संस्थान दंडात्मक कार्यवाई भी करे ताकि आपके संस्थान और मीडिया के लिए यह उदाहरण बने l

प्रति,

सम्पादक

पीपुल्स समाचार

भोपाल संस्करण, 6 मालवीय नगर, भोपाल – 462003, म.प्र.

विषय : आपके समाचार पत्र के रिपोर्टर श्री रामचंद्र पाण्डेय द्वारा दुराग्रहपूर्ण, अपमानजनक एवं  असत्य खबर प्रकाशित करने के सम्बन्ध में l

महोदय,

यह पत्र पीपुल्स समाचार में 13 नवम्बर, 2017 को अंतिम पृष्ठ (सेकंड फ्रंट) पर “हिन्दी विवि में समाजशास्त्र का शिक्षक पढ़ा रहा पत्रकारिता” शीर्षक से प्रकाशित समाचार (कतरन संलग्न) के सम्बन्ध में लिख रहा हूँ l सम्बंधित रिपोर्टर द्वारा यह समाचार किसी विघ्नसंतोषी व्यक्ति के बहकावे में आकर व्यक्तिगत दुराग्रह के आधार पर प्रकाशित की गई है l इस असत्य खबर से न सिर्फ मेरी व्यक्तिगत छवि खराब हुई है, बल्कि हिन्दी विश्वविद्यालय और पीपुल्स समाचार पत्र के बारे में भी पाठकों में अनास्था और अविश्वास पैदा हुआ है l ऐसे समाचारों के कारण पाठक अन्य समाचारों को झूठा और प्रायोजित मानने लगता है l

महोदय, मैं आपके लोकप्रिय दैनिक “पीपुल्स समाचार” का नियमित पाठक हूँ l कई कारणों से अखबार का प्रशंसक भी हूँ l लेकिन उक्त खबर ने अखबार के प्रति मेरे विश्वास को खंडित किया है l कृपया खबर में प्रकाशित झूठी और असत्य जानकारी से आप भी अवगत हों-

प्रकाशित मिथ्या एवं असत्य जानकारी/आरोप तथ्यात्मक प्रामाणिक जानकारी
1. शिक्षकों की योग्यता को दरकिनार कर स्टूडेंट के भविष्य से खिलवाड़ किस शिक्षक की योग्यता को दरकिनार किया गया है, यह उल्लेख करने की
बजाये रिपोर्टर आरोप क्यों लगा रहा है?
2. पूर्व कुलपति प्रो. छीपा के बेतुके निर्णयों को ठीक करने में ही वर्त्तमान कुलपति प्रो. आर डी भारद्वाज का अधिकाँश समय जा रहा है l कौन से बेतुके निर्णय हैं ? क्या वर्त्तमान कुलपति ने यह बताया कि बेतुके निर्णयों को ठीक करने में उनका अधिकाँश समय जा रहा है?
3. पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग का सबसे बुरा हाल है l विभाग के प्रभारी के पास न ही मीडिया की शैक्षणिक योग्यता है और न ही मीडिया में कार्य करने का अनुभव l साल भर पहले विभाग के प्रभारी बने डा. अनिल एस. की पीएचडी समाजशास्त्र में है, लेकिन प्रबंधन से सांठगाँठ के चलते पत्रकारिता विभाग की कमान संभाले हुए हैं l  हिन्दी विश्वविद्यालय में अनिल एस. अध्ययन केंद्र समन्वयक बनकर आये थे, लेकिन वर्त्तमान स्थिति में एक भी अध्ययन केंद्र संचालित नहीं है l रिपोर्टर ने दुराग्रहवश बहकावे में आकर तथ्यहीन और निराधार जानकारी दी है l

पत्रकारिता विभाग में सबसे अधिक नामांकन हैं l विभागाध्यक्ष डा. रेखा राय   प्रभारी डा. अनिल सौमित्र हैं. श्री संदीप श्रीवास्तव अतिथि विद्वान हैं l समय समय पर पत्रकारिता एवं जनसंचार के विषय विशेषज्ञ कक्षा के लिए आमंत्रित किये जाते हैं l रिपोर्टर द्वारा जानबूझकर इन जानकारियों को क्यों छुपाया गया ? प्रभारी की योग्यता के बारे में भी रिपोर्टर द्वारा गलत जानकारी दी गई है l उल्लेखनीय है कि पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रभारी डा. अनिल सौमित्र वर्ष 1997 में भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से पत्रकारिता (हिंदी) में स्नातकोत्तर पत्रोपाधि (डिप्लोमा) तथा वर्ष 2011 में गुरू जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी आफ साइंस एंड टेक्नालाजी, हिसार से जनसंचार में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त हैं l यहाँ यह भी उल्लेख जरूरी है की डा. अनिल सौमित्र की पीएच.डी. उपाधि समाज विज्ञान किन्तु “जनसंचार माध्यमों की पहुँच, उद्भासन एवं प्रभाव” विषय पर है l आपके रिपोर्टर को यह पता होना चाहिए कि विभाग में प्रभारी का काम विभागाध्यक्ष के मार्गदर्शन में सिर्फ प्रशासनिक समन्वय का होता है l हाँ मैं अपनी योग्यता और अनुभव के आधार पर विद्यार्थियों को शैक्षणिक व् अकादमिक सहयोग जरूर करता हूँ l जहां तक अध्ययन केन्द्रों के समन्वय की बात है तो सभी केन्द्रों के निदेशक और उप-निदेशक केन्द्रों के संचालन के लिए जिम्मेदार हैं l

4. इसी तरह कई अन्य विषय ऐसे हैं जिनमें यूजीसी के नियमानुसार कई शिक्षक कहीं कहीं तक फिट नहीं बैठ रहे हैं, लेकिन वह स्टूडेंट को पढ़ाकर उनका भविष्य बर्वाद कर रहे हैं l

शिक्षक                   योग्यता                     पढ़ा रहे

अनिल एस             समाजशास्त्र में पीएचडी          पत्रकारिता

योगेश यादव            एमएसडब्ल्यू में नेट             समाजशास्त्र

संजय प्रबुने             एप्लाइड कैमिस्ट्री में योग्यता     प्लेन कैमिस्ट्री

रिपोर्टर द्वारा उक्त जानकारी भी गलत प्रस्तुत की गई है l तीनों शिक्षकों के नाम गलत और अपूर्ण हैं l योग्यता के साथ ही पढाये जाने वाले विषय की जानकारी भी सही नहीं है l

महोदय, आपके समक्ष उक्त तथ्यों का उदघाटन इसलिए जरूरी हुआ है कि गलत और मिथ्या खबरों से पीपुल्स समाचार अखबार, हिंदी विश्वविद्यालय तथा मेरे जैसे व्यक्तियों की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई है l रिपोर्टर के दुराग्रहपूर्ण और मूर्खतापूर्ण कृत्य से एक समाचार प्रतिष्ठान, एक शैक्षणिक संस्थान और मेरी स्वयं की मानहानि हुई है l गलत समाचार के कारण कुलपति, मा. मुख्यमंत्री और महामहिम कुलाधिपति (मा. राज्यपाल) को भी लांछित किया गया है l ऐसा प्रतीत होता है कि आपके रिपोर्टर द्वारा जानबूझकर बहकावे में आकर, पैसे के लोभ में या फिर किसी षडयंत्रवश यह आपराधिक कृत्य किया गया है l आपसे विनम्र निवेदन है कि इस विषय पर गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेते हुए उक्त खबर का खंडन प्रकाशित करें ताकि पीपुल्स समाचार के साथ ही हिंदी विश्वविद्यालय और मेरी स्वयं की मानहानि का परिमार्जन हो सके l संभव हो तो कृपया उक्त रिपोर्टर के प्रति संस्थान दंडात्मक कार्यवाई भी करे ताकि आपके संस्थान और मीडिया के लिए यह उदाहरण बने l शीघ्र कार्यवाई की अपेक्षा के साथ l

सादर,

भवदीय

डा. अनिल सौमित्र

प्रभारी, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल

9425008648, 9425014260

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