एक पादरी की ऐसी कहानी जिसे जानकर आपके रूह कांप जाएंगे

गौतम चौधरी
मैं जालंधर के एक अखबर में काम कर रहा था। उन दिनों एक बड़ी खबर आयी कि चर्च के किसी पादरी ने चर्च के साथ जुड़ी एक नन का रेप किया है। उस नन ने उक्त पादरी के खिलाफ केस की है। खबर हमारे यहां भी छपी। चूकि उक्त पादरी के बारे में मुझे कोई ज्यादा जानकारी नहीं थी इसलिए मैंने उस खबर पर ध्यान नहीं दिया। दूसरी बात पादरी का नाम कुछ दक्षिण भारतीय टाइप का था इसलिए मेरे मन में आया कि मामला दक्षिण भारत से संबद्ध होगा लेकिन मेरे मित्र अखबारी मित्र विकास शर्मा ने बताया कि यह पादरी बेशक केरल का है लेकिन इसके साम्राज्य पंजाब में हैं। इसके तुरंत बाद 22 अक्टूबर 2018, रविवार के दिन इसी से संबंधित एक और बड़ी खबर आयी। पंजाब के होशियारपुर जिले के दसुया के स्थानीय कैथलिक चर्च के एक पादरी की मौत हो गयी। मौत के इस मामले में पुलिस अपनी जांच आज भी कर रही है लेकिन जानकार बताते हैं कि मामला मुकम्मल तौर पर रहस्यमय है। 62 साल के कुरीकोज कट्टुथरा की मृत्यु हो चुकी है। मृतक पादरी जालंधर प्रांत में 1983 से अपनी सेवा दे रहे थे। आम परस्थितियों में कट्टुथरा की मौत को सामान्य मान लिया गया है लेकिन स्थितिजन्य साक्ष्य रहस्य की ओर इषारा कर रहे हैं। उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियां आम नहीं है। 
दरअसल, एक महीने पहले जालंधर प्रांत के 54 साल के पादरी फैंको मुलक्कल को रेप के अरोपों में गिरफ्तार किया गया था। रेप के आरोप में भारत में गिरफ्तार होने वाले वे पहले पादरी हैं। मुलक्कल को एक नन की शिकायत के 85 दिनों बाद गिरफ्तार किया गया। पीड़ित नन, मिशनरी आॅफ जीजस से जुड़ी हुई थी। यह जालंधर धर्म प्रांत की एक मण्डली है। नन ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि मुलक्कल ने उसके साथ 13 बार यौन हिंसा का शिकार होना पड़ा है। इस मामले में मृतक पादरी कट्टुथरा मुख्य गवाह थे। इसलिए भी इस केस को सामान्य नहीं माना जा रहा है।
केरल में 25 दिन जेल में बिताने के बाद मुलक्कल को रिहा कर दिया गया। जालंधर लौटने पर उनका शानदार स्वागत हुआ। इस मामले में उनके विरोधी कहते हैं कि यह कोई स्वगत-वागत नहीं था। इस आधार पर मुलक्कल ने अपनी ताकत दिखाई और उसके बाद पादरी की मौत से यह भी साबित हो गया कि जो पादरी मुलक्कल का विरोध करेगा उसकी यही दुर्गति होगी। कट्टुथरा की प्रथामिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट समाने आई है। इसे दसुया सिविल हास्पिटल के चार सरकारी डाॅक्टरों ने वीडियो रिकाॅर्डिंग के बीच तैयार किया है। इस मौत को सामान्य नहीं बताया गया है। उन दिनों के अखबार को आप पढ़े तो मौत के रहस्य की बात साफ-साफ झलकने वाली खबर देखने को मिलेंगे। आंत से मिले सैंपलों का केमिकल जांच होना बाकी है। विरोधी तो यहां तक आरोप लगाते हैं कि मुलक्कल अपनी राजनीतिक पहुंच का लाभ उठाकर इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। यही नहीं विरोधी तो यहां तक कहते हैं कि मुलक्कल वर्तमान केन्द्र सरकार के साथ बेहद नजदीकी से जुड़े हैं इसलिए उनके खिलाफ कुछ भी होना संभव नहीं है। यहां तक कि वे आरोपमुक्त हो जाएंगे और उन्हें एक बार फिर धर्म प्रांत का मुखिया बना दिया जाएगा। वैसे कहने के लिए औई और मुखिया होगा लेकिन नियंत्रण आज भी मुलक्कल के पास में ही है।
केरल पुलिस ने मुलक्कल को 21 सितंबर 2018 को गिरफ्तार किया था। 25 दिन जेल में बिताने के बाद आरोपी को बेल पर रिहा कर दिया गया। मुलक्कल के साम्राज्य के बारे में चर्चा यहां जरूरी है। इससे यह पता चल पाएगा कि आखिर किस प्रकार रजनीति और धर्म का घालमेल है। इससे यह भी पता चल पाएगा कि दिखने के लिए चाहे जो भी किया जाए लेकिन आर्थिक हित और राजनीतिक हित जहां भी सधता है प्रभू वर्ग के लोग आपस में इकट्ठे हो जाते हैं। हमें यह भी जानना चाहिए कि चर्च भारत में किस प्रकार से काम कर रहा है और यह अपनी संपत्ति का विस्तार किस प्रकार कर रहा है। मसलन जानकार बताते हैं कि जब जालंधर धर्म प्रांत का गठन किया गया था तो शुरुआती सालों में यह कर्ज में था लेकिन 1980 से 1990 तक इसने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कुछ जिलों में चर्च के द्वारा शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना की गयी। आज इस प्रांत के चर्च के पास अरबों की संपत्ति है। साथ ही कई कंपनियां भी है, जो फायदे में चल रही हैं। जानकार तो यहां तक बताते हैं कि इन कंपनियों में पंजाब के कई नामचीन व्यापारी और नेताओं के साथ ही साथ कई ब्यूरोक्रेट के पैसे लगे हुए हैं। यह विस्तार मुलक्कल के कार्यभारत संभालने के बाद हुआ है। चर्च ने सहोदय नाम की एक निर्माण कंपनी बना रखी है। इसके बाद चर्च के पास एक ट्रांसपोर्ट कंपनी भी ह,ै जो स्कूलों के लिए बस चलाती है और सुरक्षा सेवा भी देती है। धर्मांतरण के लिए चर्च इन कंपनियों का बेहतर उपयोग करता है।
मुलक्कल की राजनीतिक पहुंच के बारे में बताया जाता है कि उनकी नजदीकी भारतीय जनता पार्टी के साथ ही साथ बादल गुट वाले शिरोमणि अकाली दल के साथ भी है। भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी 2009 में दिल्ली आर्कडायसिस के गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन के दौरान मुलक्कल के चीफ गेस्ट बने थे। उसी समय से मुलक्कल भाजपा के निकट हैं। कांरवा मैग्जिन की एक रिपोर्ट के मुताबिक नरेन्द्र मोदी मंत्रिमंडल के खास मंत्री अल्फांसो कन्नाथनम को मुलक्कल की पैरवी पर ही केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गयी है। हालांकि चर्च इस बात से इनकार करता है।
कुल मिलाकर देखें तो विपरीत धर्म और विचारधारा के लोग आर्थिक और राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर एक साथ आ जाते हैं लेकिन समाज में वही विभेद पैदा करते हैं। ईसाई मिशनरियों को पानी पी-पी कर गाली देने वाली भाजपा किस तरह मुलक्कल के मामले में लचीला रवैया अपना रही है इसका एक उदाहरण हमारे सामने है। इसलिए समाज के आम लोगों को इस बात को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

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