चित्रकूट में उद्यमिता विकास कार्यशाला

‘राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नासी) एवं दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट के संयुक्त तत्वाधान में उद्यमिता विकास पर

15-16 नवम्बर 2017 को दो  दिवसीय कार्यशाला

चित्रकूट,  नवम्बर 2017. चिन्तक पं0 दीनदयाल उपाध्याय  के एकात्म मानवदर्शन  चिन्तन को व्यवहारिक धरातल पर साकार करने के लिये पंडित जी के अभिन्न मित्र राष्ट्रऋषि नानाजी द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान सामाजिक पुर्नरचना  के नित-अनुकरणीय प्रयोग अपने प्रकल्पों के माध्यम से सतत् कर रहा है। इन प्रयोगों को सम्पादित करने के लिए समाज के विविध घटकों के साथ-साथ शासन की परियोजनाओं का भी सहयोग रहता है। इस समय सम्पूर्ण राष्ट्र उक्त दोनों महापुरूषों की जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विविध अनुकरणीय कार्यक्रमों के माध्यम से अपने श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहा है। इसी श्रृंखला  में ‘राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नासी)’ एवं दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के संयुक्त तत्वाधान में उद्यमिता विकास पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो0 (श्रीमती) मंजू शर्मा (नासी) द्वारा की गयी एवं कार्यक्रम की रूपरेखा प्रो0 वी.पी. कम्बोज पूर्व निदेशक, सी.डी.आर.आई. लखनऊ द्वारा रखी गयी। उद्घाटन उद्बोधन महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ0 नरेशचन्द्र गौतम द्वारा दिया गया। उद्घाटन सत्र में उपस्थित सभी विद्ववत्जन का स्वागतीय दीनदयाल शोध संस्थान के सचिव डॉ0 अशोक पाण्डेय द्वारा किया गया। प्रधान सचिव (नासी) प्रो0 नीरज शर्मा ने सभी वैज्ञानिकों एवं प्रशिक्षणार्थियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया ।

प्रो0 (श्रीमती) मंजू शर्मा ने विचार रखते हुए कहा कि किसी भी कार्य को आगे बढ़ाने के लिये प्रषिक्षणार्थियों के अन्दर एक जिज्ञासा का भाव होना चाहिए, तभी कोई भी कार्य अनुकरणीय प्रस्तुत होता है। उन्होंने प्रसिद्ध वैज्ञानिक होमी भाभा के विचारों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि, ‘‘विज्ञान को आगे बढ़ाने के लिये महिला-पुरुष दोनों को ही मिलकर एक उदाहरण प्रस्तुत करना होगा, तभी समाज में नव युवाओं के अन्दर स्वप्रेरणा से एक जिज्ञासा का भाव उत्पन्न होगा और कुछ नया प्रस्तुत करने का उत्साह होगा।’’ हमारे देश के प्रधानमंत्री ने जो नारा दिया है, ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ इस दिशा में व्यवहारिक धरातल पर अनुकरणीय कार्य प्रस्तुत किया जा सकता है। यह कार्यशाला  इस दिशा में विशेष सफल सिद्ध होनी चाहिए। महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ0 नरेशचन्द्र गौतम  ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जहाँ कहीं भी विज्ञान के साथ कौशल विकास की चर्चा हो यदि वहाँ राष्ट्रऋषि  नानाजी के व्यवहारिक अनुकरणीय विचारों की चर्चा न हो तो मेरे विचार से वह चर्चा अधूरी है। नानाजी ने चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के विविध पाठ्यक्रमों के साथ कौशल विकास को भी प्रारम्भ किया किया। इसके परिणाम भी अनुकरणीय हैं। हम जिस वातावरण में रहते हैं वहॉं की परिस्थिति एवं सुविधाओं के अनुकूल ही ऐसी शिक्षा व्यवस्था का वातावरण विकसित किया जाना चाहिए जिससे नई पीढ़ी अपने स्वाभिमान के साथ समाज की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर सके। दीनदयाल शोध संस्थान के सचिव डॉ0 अशोक पाण्डेय ने दीनदयाल शोध संस्थान के प्रकल्पों द्वारा किये जा रहे सामाजिक पुर्नरचना के प्रयोगों के बारे में अपने विचार व्यक्त किये। एम.पी.सी.एस.टी. भोपाल के डॉ. राजेश सक्सेना एवं उद्यमिता विद्यापीठ के मनोज सैनी ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

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