खसरा और रुबैला से दो-दो हाथ करेंगे पंथ-प्रतिनिधि

डा. अनिल सौमित्र

टीकाकरण अभियान को लेकर कई सवाल अभिभावकों और बच्चों के हो सकते हैं, मसलन- टीका लगवाने से कोई तकलीफ तो नहीं होगी ? जब एक बार खसरे का टीका लग चुका है फिर क्यों लगायें ? टीका लगने के कितने दिन बाद बच्चे बीमारी से सुरक्षित हो जाते हैं ? इन सवालों का जवाब बहुत सहज और विश्वसनीय है l टीकाकरण विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 10 फीसदी बच्चों को सामान्य प्रतिक्रिया के तहत हल्का बुखार आ सकता है l जिन बच्चों को पहले ही टीका लग चुका है, उनके लिए अतिरिक्त खुराक नुकसान की बजाये फ़ायदा ही होगा l टीका लगने के छह हफ्ते बाद बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जायेगी l  यह टीकाकरण बिल्कुल मुफ़्त है l स्कूल सहित वैसे सभी स्थानों पर  टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है जहां बच्चे होते हैं l  इस अभियान में विभिन्न पंथों के प्रतिनिधि और जन-प्रतिनिधि सक्रिय हैं l इस प्रयास के द्वारा धर्मगुरु (पंथ-प्रतिनिधि) और राजनेता मिलकर धर्मं और राजनीति की सामाजिक बनाने की कवायद कर रहे हैं l

साल 2019 का दूसरा पखवाड़ा शुरू होने वाला है l  नए साल में सभी कोई न कोई बड़ा काम करने की तमन्ना रखते हैं l हर व्यक्ति, संगठन और सरकार की विभिन्न इकाइयां यह मंशा लिए होती हैं कि कोई न कोई उल्लेखनीय काम से साल की शुरुआत की जाए l  इस लिहाज से जनवरी माह का तीसरा हफ़्ता बहुत महत्वपूर्ण होगा l इसी समय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में “खसरा और रुबैला” बीमारियों से पूर्णतया निजात पाने का अभियान मध्य्प्रदेश में चलाया जाने वाला है l इस अभियान में सभी राज्य सरकारों के साथ यूनिसेफ सहित अनेक स्वैच्छिक संस्थाएं सहभागी हो रही हैं l मध्यप्रदेश में यह अभियान 15 जनवरी से 15 फरवरी, 2019 तक चलेगा l

खसरा और रुबैला टीकाकरण एक राष्ट्रव्यापी अभियान है l इसके अंतर्गत खसरा और रुबैला से सुरक्षा प्रदान करने के लिए खसरा-रुबैला (एमआर) का एक टीका बच्चों को लगाया जाएगा l टीकाकरण का काम विभिन्न स्कूलों और टीकाकरण केन्द्रों पर किया जाएगा l उल्लेखनीय है कि इस अभियान के अंतर्गत 9 माह से 15 वर्ष तक के आयु वर्ग के बच्चों को टीका लगाया जाएगा l विशेषज्ञों के अनुसार यह टीका उन्हें भी लगाया जाएगा जिन्हें भले ही पहले भी एम.आर./एम.एम.आर. का टीका दिया जा चुका हो l  दरअसल भारत सरकार ने खसरा और रुबैला बीमारी का काम तमाम करने की ठान ली है l सरकार की मंशा है कि खसरा और रुबैला के लिए किसी भी प्रकार की अनुकूल स्थिति न छोडी जाए l टीकाकरण विशेषज्ञ डा. संतोष शुक्ला के अनुसार, खसरा और रुबैला को खत्म करने का सबसे अच्छा उपाए यही होगा कि इस वायरस के लिए कोई ठिकाना ही न छोड़ा जाए l  मध्यप्रदेश में प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर खसरा से प्रति वर्ष पांच हजार बच्चों की मौत हो जाती है l इसी प्रकार प्रति एक लाख बच्चों में लगभग 150 बच्चों को रुबैला से संक्रमित होने का खतरा रहता है l प्रभावी टीकाकरण अभियान के द्वारा दुनिया के 123 रुबैला मुक्त हो चुके हैं l देश अन्य राज्यों टीकाकरण अभियान या तो पूर्ण हो चुका है या अपने अंतिम चरण में है l किन्तु मध्यप्रदेश में यह अब शुरू होने वाला है l 

विशेषज्ञों के अनुसार, खसरा एक जानलेवा रोग है जो वायरस द्वारा फैलता है l यद्यपि समाज के बड़े हिस्से में इसे आज भी एक दैवी प्रकोप मानते हैं l इसका वायरस सूक्ष्म किन्तु अत्यंत तेजी से फ़ैलने वाला है l विशेषज्ञ खसरे के सावधान करते हुए बताते हैं कि इसका परिणाम खतरनाक है l खसरे के कारण निमोनिया, दस्त के साथ घातक विकलांगता भी आ सकती है, यहाँ तक कि उसकी असमय मृत्यु हो सकती है l इसी प्रकार रुबैला भी एक संक्रामक रोग है l इसका फैलाव भी वायरस द्वारा ही होता है l इसका लक्षण भी खसरा के जैसे ही होता है l यह वायरस लैंगिक भेद नहीं करता, बल्कि लडके या लड़की दोनों को संक्रमित कर सकता है l यदि कोई महिला गर्भावस्था के शुरुआती चरण में इससे संक्रमित हो जाए तो कंजेनिटल रुबैला सिंड्रोम (सी.आर.एस.) हो सकता है जो कि उसके भ्रूण तथा नवजात शिशु के लिए घातक सिद्ध हो सकता है l गर्भ की पहली तिमाही में रुबैला होने से गर्भपात होने, बच्चे के गर्भ में दम तोड़ने या जन्मजात विकृति का बहुत ज्यादा ख़तरा रहता है l खसरा और रुबैला के लक्षण एक जैसे होते हैं l शरीर में दाने, नाक बहाने के साथ ही तेज बुखार आता है l

एम.आर. (मिज़ेल-रुबैला) अभियान के तहत जागरूकता सन्देश देते हुए धर्मगुरू, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि बार-बार लोगों को ताक़ीद कर रहे हैं कि यह टीका 9 माह से 15 वर्ष तक की उम्र के सभी बच्चों को जरूर लगवाया जाना चाहिए l इसे सभी स्कूलों, सामुदायिक केन्द्रों, आंगनवाड़ी केन्द्रों और सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर लगाया जाएगा l वे यह भी बता रहे हैं कि यदि किसी बच्चे को एम.आर./एम.एम.आर. का टीका पहले लगाया जा चुका हो तो उसे भी यह टीका लगाया जा सकता है l अभिभावकों और उत्प्रेरकों को यह भी बताया जा रहा है कि खसरा-रुबैला का टीका पूर्ण रूप से सुरक्षित है एवं इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं l सरकार ने टीकाकरण अभियान के तहत पूर्ण सावधानी और सतर्कता बरतते हुए टीका के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी की व्यवस्था की है l

गौरतलब है कि इस टीकाकरण अभियान को सफल बनाने और खसरा और रुबैला का काम तमाम करने के लिए सरकारी अमले के साथ-साथ धर्मगुरू, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों ने साझा प्रयास करने का संकल्प लिया
है l  इस अभियान के लिए सुरक्षात्मक और उत्साहवर्धक माहौल बनाने के लिए परम्परागत मीडिया के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल मीडिया का भी बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है l सामुदायिक सभाओं के साथ पत्राचार, एस.एम.एस. और व्हाट्सेप सन्देशों और आपसी बातचीत के माध्यम से न सिर्फ जानकारी और सूचनाओं का आदान-प्रदान हो रहा है, बल्कि खसरा-रुबैला को जड़-मूल से उखाड़ फेंकने के लिए लोगों को तैयार भी किया जा रहा है l  इस टीकाकरण अभियान के मुख्य किरदार बच्चे हैं l कोशिश है उन्हें इस तरह तैयार किया जा सके कि वे खसरा और रुबैला से दो-दो हाथ करने के लिए आगे आ सकें l  मध्यप्रदेश में 2 करोड़, 32 लाख बच्चों को इसका लाभ मिलेगा l 9 महीन से 15 साल के ये बच्चे ही मुख्य लक्ष्य समूह हैं l

टीकारण अभियान को लोकप्रिय, सर्वसुलभ और प्रभावी बनाने के लिए संसद सदस्यों और विधानसभा सदस्यों के साथ ही  विभिन्न निकायों के जनप्रतिनिधि भी सहभागी हो रहे हैं l  अपनी क्षेत्र की जनता के बेहतर स्वास्थ्य के लिए वे हर संभव कोशिश करने लिए तत्पर हैं l मध्यप्रदेश के 29 सांसद और 230 विधायक, जिला और जनपद पंचायत से लेकर नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश को स्वस्थ करने का बीड़ा उठा लिया तो सफलता सुनिश्चित है l सभी पंथों के प्रतिधियों ने खसरा-रुबैला को एक चुनौति के रूप में स्वीकार किया है l इन तैयारियों के आधार पर यह मान लेना चाहिए कि खसरा-रुबैला की अब खैर नहीं !

पंथ-प्रतिनिधि और जन प्रतिनिधि मीडिया के सहयोग से बीमारियों से दो-दो हाथ करने सामने आ रहे हैं l वे प्रवचन, भाषण और चिट्ठी के द्वारा जागरूकता के लिए प्रयासरत हैं l हर संभव कोशिश है कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रह पाए l जनप्रतिनिधि न सिर्फ अपने क्षेत्र के सभी स्कूली बच्चों को टीका लगवाने के लिए उत्प्रेरित करेंग, बल्कि सभी अभिभावकों को टीकाकरण के महत्त्व से अवगत भी करायेंगे l राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता सामुदायिक या नुक्कड़ सभाओं, पोस्टकार्ड, वीडियो सन्देश और मीडिया के द्वारा अपना टीकाकरण सन्देश अपने क्षेत्र की जनता तक प्रेषित करने का लागातार प्रयास कर रहे हैं l

आम जनता के स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्ध ये जनप्रतिनिधि राजनीति की नई इबादत लिख रहे हैं l इनके प्रयासों से न सिर्फ जनता का लाभ होगा, बल्कि प्रदेश का शुभ होगा और राजनेताओं को यश भी मिलेगा l  इस टीकाकरण अभियान में पंथ-प्रतिनिधियों एवं जनप्रतिनिधियों से महत्वपूर्ण भूमिका और योगदान की अपेक्षा प्रत्येक नागरिक को है l यह ऐतिहासिक अवसर है जब पांथिक और राजनीतिक गतिविधियों को सामाजिक रूप दिया जा सकता है l

(लेखक मीडिया अध्येता और विश्लेषक हैं )

 

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