भगोड़ा आर्थिक अपराधी अध्यादेश से घबराये माल्या

कृष्णमोहन झा
सरकारी बैंकों के हजारों करोड़ रुपये लेकर विदेश भाग गए शराब कारोबारी विजय माल्या अब इस बात को लेकर दुखी है कि उन्हें बैंक ने ऋण लेकर नही चुकाने वाला पोस्टर बॉय बना दिया है,जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है। अतः अब उन्होंने भारत मे अपनी संपत्तियां बेचकर कर्ज चुकाने की पेशकश की है। बैंकों का बकाया चुकाने के लिए वे भारत मे अपनी लगभग 13900 करोड़ रुपए की संपत्तिया बेचने को तैयार हो गए है। माल्या की इस पेशकश के बाद विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर की यह टिप्पणी वास्तविकता को ही प्रकट करती है कि माल्या यदि भुगतान करना ही चाहते थे तो उनके पास पहले काफी समय था, जिसमे वे ऐसा कर सकते थे,लेकिन उन्होंने किया नही।
शराब कारोबारी विजय माल्या ने दो साल बाद अपनी चूप्पी थोड़ी है,तो इसका प्रमुख कारण प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मुंबई की विशेष अदालत में लगाई गई वो अर्जी है, जो भगोड़े कानून के तहत भारत मे उनकी संपत्ति जब्त करने दाखिल की गई है। इस अर्जी के बाद ही माल्या ने चूप्पी तोड़ते हुए बकाया वापस करने की पेशकश की है, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय ने उनकी पेशकश को ठुकरा दिया है। मुम्बई की विशेष अदालत ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत माल्या को नोटिस जारी कर 27 अगस्त तक अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यदि माल्या इस तारीख तक हाजिर नही होते है तो अदालत उनकी संपति जब्त करने का आदेश दे सकती है।
दरअसल केंद्र सरकार द्वारा संसद के पिछले सत्र में बैंकों से भारी भरकम कर्ज लेकर भागने वाले लोगो के खिलाफ जो भगोड़ा कानून विधेयक पारित किया था, उसी कानून के तहत होने वाली कार्यवाही से माल्या को घबराहट हो रही है। इसी के बाद सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अध्यादेश जारी किया था जिसके अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने माल्या की भारत स्थित विभिन्न संपतियां अटेच कर चुका है।
हजारों करोड़ रुपये लेकर विदेश भागे विजय माल्या अब तर्क देकर यह साबित करने की कोशिश कर रहे है कि वे गलत मंशा से विदेश नही भागे है। उन्होंने अब यह सिध्द करने की कोशिश शुरू कर दी है कि वे बैंको का कर्ज चुकाने के लिए तत्पर थे लेकिन उन्हें इसका अवसर ही नही दिया गया। अब ईडी एवं सीबीआई पर आरोप लगाकर यह साबित करना चाहते है कि इन दोनो संस्थाओं की मंशा कुछ और ही है। माल्या की दलील है कि दोनों संस्थाएं उनकी कर्ज वापसी की पेशकश को ठुकराकर शायद अपना एजेंडा पूरा करना चाहती है।
माल्या पिछले दो सालों से लंदन में ऐशो आराम की जिंदगी गुजार रहे है। इस बीच उन्होंने कभी भारत आकर बैंकों का पैसा लौटाने की पेशकश नही की। आज जब कानूनी शिकंजा इस तरह कस चुका है कि उनके बच निकलने के सारे दरवाजे बंद हो चुके है, तब माल्या द्वारा भारत मे अपनी संपत्ति बेचकर बैंकों का कर्ज चुकाने की पेशकश केवल उनकी विवशता ही दर्शाती है।
 माल्या आज यह कह रहे है कि इस पूरे मामले में अपना पक्ष  रखने के लिए दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री एवं वित्तमंत्री को पत्र लिखे,किन्तु सरकार की औऱ से कोई जवाब नही आया। सवाल यह उठता है कि उस समय माल्या ने स्वयं ही भारत सरकार के सामने आकर अपना पक्ष रखने की कोशिश क्यों नही की? शायद उन्हें गिरफ्तार होने का डर सता रहा था।  माल्या यह भी सोच रहे थे कि वे भारत नही लौटेंगे तो सरकार उनपर पैसा लौटाने का दबाव नही बना पाएगी औऱ मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा,परंतु ऐसा हुआ नही। अब बेहतर यही होगा कि विजय माल्या जल्द से जल्द स्वदेश लौटकर अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखे औऱ कानूनी प्रक्रिया का सामना करे। यदि वे पोस्टर बॉय बने तो आखिर इसके लिए जिम्मेदार भी तो वह स्वयं ही है।
 (लेखक राजनीतिक विश्लेषक और आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)