बचपन में ही कला संस्कार दिये जायें : पी नरहरि

भोपाल, म.प्र. के जनसंपर्क आयुक्त पी. नरहरि ने कहा है, कि बच्चों को बचपन से ही कला संस्कार दिये जायें जिससे वह बड़ें होकर कला संस्कृति के संवर्द्धन और संरक्षण का कार्य कर सकते हैं, साथ ही अपनी कला प्रतिभा को निखार सकते है। श्री पी. नरहरीदास आज संस्था की कला दीर्घा बरखेड़ी (जहांगीराबाद) में रेखांकन कलां समिति के वार्षिक उत्सव में पुरूस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपना उधबोधन व्यक्त कर रहे थे उन्होंने कहा कि बच्चों की सही दिशा में प्रगति करने के लिए बच्चों की कलात्मक प्रतिभा को तरासने का कार्य रेखांकन ललितकलां अकादमी जैसी संस्थाए बखुबी कर रही है समारोह की अध्यक्षता बाल कल्याण सवं साहित्य शोध केन्द्र के निदेशक श्री महेश सक्सेना ने की कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार श्री योगेश शर्मा ने किया कार्यक्रम में डॉक्टर गौरी शंकर शर्मा गौरीश, लेखक संघ की डॉक्टर प्रीति प्रवीण खरे, वरिष्ठ कवि गोकुल सोनी, नेहरू युवा केन्द्र के डॉक्टर सुरेन्द्र शुक्ला, कलां समीक्षक सतीश पुरोहित, वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रहार शुक्ल सहित अनेक गणमान्य कलां सेवी पत्रकार समाज सेवी उपस्थित इस अवसर पर ऑर्ट स्कूल ऑफ इण्डिया चेन्नई द्वारा चित्रकलां में सफल प्रतिभागियों को स्वर्ण पदक अर्थक भवालकर, रजत पदक अंशिका पुरोहित, कलां पदक रितिका पुरोहित को दिया गया। हिन्दी भाषा सामान्य ज्ञान मे अंशलेषा भटनागर को स्वर्ण पदक से अलंकृत कर प्रसस्ति पत्र प्रदान कियें गये। कार्यक्रम की भूमिका डॉक्टर बी. रेखा भटनागर ने रखी। इस कार्यक्रम में दिव्यांग बाल गायिका फाल्गुनी को मुख्य अतिथि द्वारा दिया गया। कार्यक्रम के आरम्भ में मंजु मणी हतवलनें के निर्देशन मंे बाल कलाकार कनिष्का द्वारा, वर्णिका उइके, अनन्या नायर तथा हर्षिता श्रीवास और संजना पाटनकर द्वारा मुख्य अतिथि के सम्मान में भरत नाट्यम की प्रस्तुति की गई।

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