मध्य प्रदेश : गढ़ाकोटा वाले गोपाल भार्गव बने नेता प्रतिपक्ष, लगातार 8 बार से हैं बीजेपी के विधायक

स्पंदन फीचर्स की ख़बर पर मुहर

गोपाल भार्गव को नेता प्रतिपक्ष की कमान

पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने दिया नाम का प्रस्ताव

नरोत्तम मिश्रा और राजेंद्र शुक्ल भी थे दावेदार

भोपाल: मध्य प्रदेश में बीजेपी के दिग्गज नेता गोपाल भार्गव नेता प्रतिपक्ष पद के लिए चुन लिए गए। भोपाल में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रभारी डॉ विनय सहस्रबुद्धे की मौजूदगी में संपन्न बीजेपी विधायक दल की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गोपाल भार्गव के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और कुंवर सिंह ने समर्थन दिया।

मध्यप्रदेश में बीजेपी के विधायकों का नेता चुनने के लिए सोमवार को केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में बैठक हुई। इस दौरान राजनाथ ने पार्टी विधायकों से चर्चा की। बीजेपी में नेता प्रतिपक्ष पद के लिए जो तीन नेता दावेदार थे उनमें पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव और राजेन्द्र शुक्ल का नाम चर्चा में था, और इत्तेफ़ाक़ से ये तीनों दावेदार ब्राह्मण वर्ग से थे। जबकि इस पद के लिए चौथा नाम राज्य के पूर्व गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह का था, जिसे शिवराज सिंह की तरफ़ से आगे बढ़ाए जाने की चर्चा थी। इस बारे में चार दिन पहले ही स्पंदन फ़ीचर्स ने सबसे पहले बताया था। पिछले दिनों जब गोपाल भार्गव संघ कार्यालय गए थे तभी से ये माना जा रहा था कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष का पद बीजेपी दे सकती है।

दूसरी तरफ़ एक नए सियासी घटनाक्रम में मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष पद पर बीजेपी ने कांग्रेस केे ख़िलाफ़ अपना कैंडिडेट उतारने का फ़ैसला किया है। कांग्रेस के एनपी प्रजापति के सामने बीजेपी ने पूर्व शिक्षा मंत्री और पार्टी के आदिवासी चेहरे कुंवर विजय शाह को प्रत्याशी बनाया है. विजय शाह हरसूद से विधायक हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुनने की परंपरा को बीजेपी ने तोड़ा है। ऐसे में वो उसे उपाध्यक्ष पद नहीं देगी। वहीं बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति में वरिष्ठतम विधायक को चुनने की परंपरा को नहीं निभाया है। विधानसभा में कांग्रेस के पास विधायकों का आंकड़ा बहुमत से 2 कम है, लेकिन सपा-बसपा और निर्दलियों की मदद से उसे भरोसा है कि वो अध्यक्ष का चुनाव जीत लेगी।

जानिए कौन हैं गोपाल भार्गव

जन्म तिथि: 1 जुलाई 1952

शैक्षणिक योग्यता: बीएससी, एमए-एलएलबी

व्यवसाय: कृषि एवं सिनेमा हॉल

स्थाई निवास: गढ़ाकोटा, सागर

गढ़ाकोटा से नेता प्रतिपक्ष तक का सियासी सफ़र

– छात्र राजनीति में सक्रिय भार्गव 1970-73 तक डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय छात्र संघ के विभिन्न पदों पर रहे।

– 1980 से 82 तक गढ़ाकोटा नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष रहे

– छात्रों, बीड़ी मज़दूरों एवं किसानों के कई आंदोलन में जेल गए।

– आठवीं विधानसभा 1985 के लिए पहली बार निर्वाचित होकर विधायक बने। तब से लगातार  8 बार विधायक

– 1998 में विधानसभा की लोकलेखा समिति, सार्वजनिक उपक्रम समिति, प्राक्कलन समति के सदस्य और प्रश्न एवं सदर्भ समिति के सभापति रहे।

– बीजेपी के सागर के जिलाध्यक्ष रहे।

– 2003 में बारहवीं विधानसभा में निर्वाचित होकर पहली बार मंत्री बने।

– कृषि, सहकारिता, धार्मिक न्यास, पुनर्वास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण  विभाग के मंत्री रहे

– पंचायत एवं ग्रामीण विकास, सामाजिक न्यास सहित कई अन्य विभागों के मंत्री रहे

– उमा भारती, बाबूलाल गौर सहित शिवराज सिंह चौहान सरकार में पिछले 15 साल से कैबिनेट मंत्री

साल में दो बार सामूहिक विवाह सम्मेलन करवाने वाले भार्गव को ‘शादी बाबा’ के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने अपने बेटे की शादी भी ऐसे ही समारोह में की थी. फिलहाल वे मध्य प्रदेश विधानसभा के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं.

गोपाल भार्गव बुन्देलखंड अंचल के बीजेपी के कद्दावर नेता हैं. वे सन 1984 से 2018 तक लगातार सागर जिले की रहली विधानसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं. उन्होंने सभी 8 चुनाव जीते।

सागर जिले के रहली क्षेत्र से 1984 से लगातार विधायक

बीजेपी सरकार में 15 साल तक लगातार मंत्री रहने वाले इकलौते विधायक 

 

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