डॉक्टर बाबा आदम का लेब्स पर गुस्सा और मेडिकल कॉलेजों से खुशी

डॉ.मनोहर भण्डारी

अचानक सुबह सुबह चार बजे मुझ सोते हुए को किसी ने बिस्तर से उठा लिया और मेरे ही बैठक कक्ष में सोफे पर जबर्दस्ती बिठा दिया I आँखें मलते हुए मैंने देखा तो घुटनों के नीचे तक का सफ़ेद झक एप्रन पहने छह फुटा व्यक्ति खड़ा था, नेम प्लेट पर लिखा था, डॉ.बाबा आदम, एल.एम.पी., एफ.आर.सी.एस.(लन्दन) I मैंने तत्काल उन्हें विश किया और हड़बड़ा कर अपने सीनियर के आदर में खड़ा हो गया I बहुत नाराजी भरे शब्दों में लताड़ते हुए बोले, इन पैथोलॉजी वालों ने तो हेल्थ सर्विसेस और मेडिकल एजुकेशन का पूरा कबाड़ा ही कर दिया है, सबके लाइसेंस रद्द नहीं करवाए तो मेरा नाम भी डॉक्टर बाबा आदम नहीं I

मैं बोला, सरजी, क्यों भला, ऐसा क्या हो गया है ?

पिछले दस दिनों से मैं लगभग सौ से ज्यादा लेब्स में गया हूँ, सब स्साले, बेवकूफ बना रहे हैं I मैं सीबीसी की जांच करवाने जाता हूँ और कहता हूँ कि रिपोर्ट जरा जल्दी दे देना, तो बोलते हैं, सर बैठिए, बस दस मिनट लगेंगे, लाइए सेम्पल ले लेते हैं I अरे भाई, जब आरबीसी काउंट करने में ही डेढ़ घन्टा लगता है, तो ये स्साले सीबीसी की तीन चार घंटे की जांचों की रिपोर्ट दस मिनट में कैसे दे सकते हैं ? मुझे दिखाने के लिए एक लेब के टेक्नीशियन ने वहां आए एक रोगी के रक्त की एक माइक्रो बूंद एक छोटे से पिपेट में डाली और कुछ सेकण्ड्स में प्रिंटआउट निकल आया I इन स्सालो की हिम्मत तो देखो, फर्जीवाड़े को कैसे कैसे तरीकों से विश्वसनीय बना डाला है और धड़ल्ले से लोगों को सरेआम लूटे जा रहे हैं I

सब तरफ फर्जीवाड़ा चल रहा है, इनका पाला मुझसे पड़ा है, मैं एम.सी.आई. का बरसों तक पदाधिकारी रहा हूँ, मेरी रिकमण्ड से इंस्पेक्शन और मान्यता मिलती रही है, देख लूँगा सबको I जनता को बेवकूफ बना रहे हैं, लूट रहे हैं I और तो और खून की जांचों के ऐसे ऐसे पैरामीटर्स की सूची लगा रखी है, जो ना कभी मैंने सुनी और ना ही हमारे लर्नेड प्रोफेसर्स ने कभी पढ़ाया था, ना ही इतनी कांफ्रेंसेस में देश-विदेश में गया, वहा किसी ने जिक्र किया I सबके रेट देखकर तो ऐसा लगता है, मूर्ख बनाने और लूटने का लाइसेंस ही ले रखा हो I

एक आई स्पेशिलिस्ट के पास पेरिफेरल विज़न के लिए गया तो एक फर्जी मशीन के सामने बैठा दिया, मैं तो उठकर चला आया I क्या क्या घोटाले चल रहे हैं ?

फिर बोले, हाँ एक बात अच्छी देखी, मैं देश के कई मेडिकल कॉलेजों में गया हूँ, वहां सब ठीकठाक चल रहा है, वो ही पैटर्न, वे ही उपकरण, वे ही न्यूबार्स चेम्बर्स, वही स्टेथोग्राफ, वे ही पेरिमेटर, वो ही स्पाइरोमीटर, सब कुछ वही I वे ही मेंढकों के विच्छेदन के उपकरण, इलेक्ट्रिक कनेक्शन्स, कुत्ते पकड़ने और बेहोश करने के यंत्र, कुत्तों के डिसेक्शन के उपकरण, उन्हें लिटाकर ग्राफ रिकार्ड करने के उपकरण और ऑपरेशन टेबल सब कुछ वही, जो मेरे एडमिशन के समय थे I आखिर तुम मेडिकल कॉलेजों के टीचर्स ने देश के साथ किसी भी प्रकार का धोखा नहीं किया है, आई एप्रिशिएट योर डेडिकेशन टुवर्ड्स I वे बड़े आश्वस्त थे I

मैंने पूछा, सर, आप कौन सी बैच के हैं ? उन्होंने गर्व से कॉलर ठीक की और बोले, मैं 1939 बैच का हूँ I मैंने चौककर उनकी नेमप्लेट को गौर से देखा, उस पर लिखा था स्वर्गीय डॉ.बाबा आदम I मैं पसीने पसीने हो गया I मुझे पसीने से तरबतर देख बोले, तुम काहे घबराते हो, तुमसे तो मैं बेहद खुश हूँ I बस कल देखना, इन सब लेब्स और फर्जी डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द होंगे, सबको जेल पहुंचाकर ही दम लूँगा I तुम्हें बतादूं मैं प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू का पर्सनल फिजिशियन हूँ, अभी पोस्ट ऑफिस जाकर उनको कॉल करता हूँ, समझते क्या हैं, अपने आपको I इतना कहकर वे मेरे घर से निकल गए I

मैं उन स्वर्गीय डॉक्टर के जाने से बेहद खुश और आश्वस्त हुआ, परन्तु मैं सोच रहा था कि क्या स्वर्ग में उनकी किसी नई पीढी के डॉक्टर से मुलाक़ात नहीं हो पाई है या कि उसने बताई हो और इन्होंने उसे डांट कर चुप कर दिया हो I

वे तो चले गए, परन्तु प्रश्नों की एक लम्बी कतार मेरी नजरों के सामने खड़ी हो गई थी I

 

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