देश के कल्याण के लिए नेक इंसान बनना जरूरी

अंशुल उपाध्याय

हम एक कट्टर देशभक्त है। पर देश से बढ़कर हम विश्व और विश्व से बढ़कर इंसानियत को महत्व देते है। कुछ दिन पहले कुछ सज्जनों से हमने सुना कि, भारत के लोग पाश्चमि सभ्यता की तरफ भाग रहे है। मोबाइल,पे सारा दिन जाने क्या क्या देखते है। संस्कारो को भूलते जा रहे है। हर जगह मशीने आ गयी है। तब हमने निर्णय लिया की अब हमको fb पोस्ट पर कुछ अपने विचार लिखना चाहिए की ये आज के समय में कितने सही है। और हमने fb पर आलेख लिखना शुरू कर दिया। नतीज़न 5 से 7 दिनों में ही हमारी फ्रेंड लिस्ट 100 और 120 से 1400 हो गयी है और अभी भी 1200 रिक्वेस्ट पेंडिंग है। भारत के हर कोने से लोग हमको मेसेज भेज रहे है बधाइयां दे रहे है। ये सब के लिए हम आप सभी के बहुत आभारी है। पर इसका नतीजा ये निकाला जा सकता है कि, भारत का आदमी चाहे दुनिया में कही भी न चला जाये भारतीय ही रहता है। हमारे संस्कार हमारी रगों में बहते है। हम कितने भी आधुनिक क्यों न हो जाये इंसानियत हमारे लिए सर्वोपरि है। आज भले ही हर काम हम मशीनों से करते है। पर जहा भी राम,अल्लाह,का नाम सुनते है ह्रदय से जय सिया राम।। याह अल्लाह जरूर बोलते है। तो कहने का तात्पर्य ये है कि, अपने धर्म और जस्बे को अपनी ताकत बनाइये। किसी के बरगलाने पर देश का सौदा न करे। जहाँ इंसानियत मारी जा रही हो उस कृत्य को न करे। मासूम बेटियों की बात हो या अन्धविश्वस में फांसी लगा लेना या स्वमं खुद को प्रेमी साबित करने के लिए आत्महत्या का रास्ता। ये सब गलत है। इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं। मासूम बच्चो में ईश्वर का वास होता है।और जिनको लगता है वे जिससे प्रेम करते है वो न मिले तो जीने का क्या अर्थ है? तो उनसे कहना चाहूंगी कि, प्रेम पाने का सबसे उचित्त मार्ग समर्पण है। प्रेम किसी व्यक्ति विशेष के शरीर से नहीं किया जाता ।उसके बारे में थोड़ा विचार करे जिससे आप प्रेम करते है कि आपको उसकी किस बात से सबसे ज्यादा प्रेम है तो आपको जबाब मिलेगा वो बहोत अच्छा है इसलिए। मतलब की उसके मन से आपको प्रेम हुआ फिर उस मन को खुदखुसी करके ख़त्म करना क्या उचित्त है?? शरीर तो मिट्टी होता है।जलाओ या दफनाओ मिट्टी ही पुनः बन जाता है। जो बहुमूल्य है वो इंसान के कर्म, मन और विचार है।सो अपने मन को मजबूत बनाये और अच्छे विचारों को ह्रदय में जगह दे। नेक कर्म करे। मेरा आलेख पोस्ट करने का उद्देश्य पूरा हुआ। अब अगर आपको मेरा आलेख पढ़ने न मिले तो निराश न होइयेगा। ईस्वर बनने से भी मुश्किल काम है नेक इंसान बनना। नेक इंसान बनिए। देश और विश्व का कल्याण स्वमं ही हो जायेगा।।

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