कुठियाला बहाना हैं, विचारधारा निशाना है

 

डॉ. अनिल सौमित्र

बहाने अलग-अलग रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के निशाने पर एक विचारधारा हमेशा रहा है l  कांग्रेस का निशाना वर्षों पुराना है l कांग्रेस का वैचारिक डीएनए भारतीयता विरोधी है l भारतीयता की बात करने वाला व्यक्ति, संगठन और विचार कांग्रेस का स्वाभाविक विरोधी है l समय और परिस्थितियों के हिसाब से कांग्रेस अपनी चालें बदलती रही, नीयत वही रही l ताजा मामला माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला को जांच के नाम पर लांछित करने का है l आये दिन, लगभग प्रतिदिन प्रो. कुठियाला अखबारों की सुर्ख़ियों में होते हैं l हालिया खबर में अखबारों ने लिखा है कि – एमसीयू के पूर्व कुलपति कुठियाला की गिरफ्तारी पर रोक, सुप्रीम कोर्ट के जज बोले ह्त्या और रेप के मामलों में ऐसी असाधारण चिंता नहीं देखी, हम अपराध की जांच करायेंगे l  

वैसे कांग्रेस पार्टी या श्री कमलनाथ सरकार भारतीय संस्कृति से जुड़े व्यक्तियों और संगठनों के साथ जो व्यवहार कर रही है उसमें नया कुछ नहीं है l श्री नेहरू, श्रीमती इंदिरा फिरोज गांधी और श्री राजीव गांधी के जमाने में षडयंत्र, दमन और छल होता ही रहा है l गत विधानसभा चुनाव में जारी अपने वचन-पत्र में कांग्रेस ने स्पष्ट घोषणा की थी कि – शासकीय परिसरों में आरएसएस की शाखाएं लगाने पर प्रतिबन्ध लगायेंगे तथा शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शाखाओं में छूट संबंधी आदेश निरस्त करेंगे l यद्यपि इस घोषणा पर सरकार ने कोई प्रत्यक्ष कार्यवाई तो नहीं की है l लेकिन देशभक्त संगठन के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने, लांक्षित करने और उनके चरित्र हनन करने का प्रयास निरंतर जारी है l राष्ट्रीयता के विरोध में सरकार बेसुध है l कमलनाथ सरकार को यह परवाह भी नहीं है कि किसी व्यक्ति, संगठन और विचारधारा को टार्गेट करने में कहीं प्रदेश की ही छवि तो धूमिल नहीं हो रही है l

वैसे विश्वविद्यालय स्थापना काल से ही विवादों में रहा है l यहाँ की अधिकाँश नियुक्तियां नोटशीट के हवाले से की गई हैं l कांग्रेस के शासन काल में संविदा और दैनिक वेतनभोगी के रूप में रखे गए अनेक कर्मचारी प्रो. कुठियाला के समय निश्चित प्रक्रिया के तहत नियमित किये गए l 27 वर्षों बाद प्रो. कुठियाला के विशेष प्रयासों से यूजीसी की धारा 12 बी के तहत विश्वविद्यालय को मान्यता मिली l पत्रकारिता विश्वविद्यालय लम्बे समय से विभिन्न परिसरों में संचालित था l प्रो. कुठियाला के कुलपति काल में ही भोपाल का मुख्य परिसर स्वयं के भवन में स्थापित हुआ l इन्हीं विशेष प्रयासों के कारण भोपाल में विवि का स्वतंत्र और व्यापक परिसर विकसित हो सका है l इस दौरान पाठ्यक्रमों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की संख्या में गुणात्मक और संख्यात्मक दोनों प्रकार की वृद्धि हुई l  जो काम प्रोफ़ेसर कुठियाला ने भारतीयता की धारणा के कारण किया वही कांग्रेस के लिए अपराध हो गया l क्या किसी विश्वविद्यालय में विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा करना अपराध है ? क्या पत्रकारिता विवि में संचार विधाओं के सिद्धांतकार देवर्षि नारद मुनि को स्थापित करना गुनाह है ? किसी विश्वविद्यालय में भारतीयता के मनीषियों का जुड़ाव दुराग्रह का कारण क्यों होना चाहिए ?

किसी भी सरकार में दलीय विचारधारा, परम्परा और व्यक्तित्वों को प्राथमिकता और प्रोत्साहन स्वाभाविक तौर पर होता ही है l सरकार के काम में वैचारिक झुकाव और अंतर दिखाई देना लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपेक्षित है l देश की आजादी के बाद से कांग्रेस का झुकाव अंग्रेजी नीतियों और कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रति रहा ही है l कांग्रेस को जब कभी, जहां कहीं मौक़ा मिला उन्होंने अंग्रेजों की नीति और कम्युनिस्ट विचारधारा को स्थापित करने और बढाने का भरसक प्रयास किया l भाजपा की सरकारों में इस तरह का वैचारिक हस्तक्षेप न के बराबर हुआ l नियम और प्रक्रिया विरुद्ध नियुक्ति या हस्तक्षेप तो इक्का-दुक्का मिलना भी मुश्किल है l आज जब मध्यप्रदेश या अन्य प्रदेशों कांग्रेस का शासन है तो उनकी नीतियाँ और विचारधारा का प्रभाव भी स्वाभाविक है l किन्तु भारतीयता के वाहकों और राष्ट्रीय विचारधारा कि पोषक व्यक्तियों और संगठनों के प्रति कांग्रेस का दुराग्रह न सिर्फ़ चिंता की बात है, बल्कि आपत्तिजनक भी है l

शिक्षा और मीडिया से जुड़े विद्वान् दुःखी और चिंतित हैं l राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के 10 वर्षो तक कुलपति रहे प्रो. बृजकिशोर कुठियाला और वहां के शिक्षकों के साथ जो व्यवहार हो है उससे बौद्धिक वर्ग हतप्रभ है l बौद्धिक क्षेत्र के लोग मध्यदेश सरकार के मुखिया से जानना चाहते हैं कि भाजपा सरकार के 15 वर्षों में कितने पूर्व कुलपतियों और कितने शिक्षकों पर आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया
गया ? इन वर्षों में कब ऐसा हुआ कि राजनीतिक व्यक्तियों की समिति द्वारा शिक्षण संस्थानों की जांच हुई ?  विश्वविद्यालय में ऐसा कब हुआ जब सत्रारंभ में देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ बोला गया? कब पत्रकारिता विश्वविद्यालय के मंच से पत्रकारिता के पतन के लिए प्रधानमंत्री को दोषी बताया गया ?  अपने को बड़ा बताने के लिए किसी को छोटा दिखाना-बताना क्या जायज तरीका है ? अपनी विचारधारा या अपने व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बताने के लिए अन्य विचारधारा को निकृष्ट या घटिया बताना उचित है ? अपनी कमीज की सफेदी बेहतर बताने के लिए किसी और की कमीज़ पर कीचड़ उछालना जरूरी तो नहीं!

मध्यप्रदेश में यह पहली बार हुआ है कि किन्हीं राजनीतिक व्यक्तियों की अनुशंसा पर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और शिक्षकों पर मध्यप्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में प्रकरण दर्ज हुआ है l एक बहुत ही गलत परम्परा की शुरुआत कांग्रेस सरकार ने कर दी है l कल कोई भी सरकार राजनेताओं की समिति बनाकर किसी नौकरशाह या शिक्षाविद को जांच में फंसा सकती है l संभव है इस पूरे मामले में सरकार के मुखिया को अँधेरे में रखा गया हो l अगर ऐसा है तब भी मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ के लिए जरूरी है कि वे पूरे मामले को उच्च स्तर पर मॉनिटर करें l क्योंकि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का मामला बहुत बिगड़ चुका है l पूरे मामले से दुराग्रह, साजिश और एक विचारधारा के विरोध की बू आने लगी है l इस मामले में कार्यवाई कम, दुष्प्रचार अधिक
है l लांछन और चरित्रहनन की कुचेष्टा स्पष्ट दिखाई दे रही है l इस पूरी प्रक्रिया में कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं और व्यक्तिगत विध्न्संतोषियों की भूमिका उजागर हो चुकी है l विश्वविद्यालय के जानकारों के मुताबिक़ कुछ लोग प्रो. कुठियाला के खिलाफ अपनी व्यक्तिगत खुन्नस निकाल रहे हैं l भोपाल से लेकर दिल्ली तक चर्चा यही है कि प्रो. कुठियाला संघ विचारधारा को पोषित करने के कारण कांग्रेस के आँख की किरकिरी बन गए थे l इसीलिये कांग्रेस सरकार प्रो. कुठियाला के कार्यकाल में हुए सभी अकादमिक, शैक्षिक, प्रशासनिक और बौद्धिक निर्णयों को पलटने की भरसक कोशिश कर रही है l

कांग्रेस ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए प्रदेश की छवि को धूमिल करने में भी संकोच नहीं किया l व्यापम के नाम पर देश-दुनिया में कांग्रेस ने ऐसा हंगामा बरपाया कि मध्यप्रदेश व्यापम घोटाले का पर्याय बन गया l प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों और नौजवानों को इसका खामियाजा आज भी भुगतना पड़ रहा है l कांग्रेस की स्वार्थी राजनीति ने व्यापम-कथा से लाखों विद्यार्थियों को सन्देश के घेरे में खड़ा कर दिया l  अब पत्रकारिता विवि में हुए कथित घोटाले या आर्थिक अनियमितता के हल्ले से पत्रकारिता के हजारों विद्यार्थी सन्देश के घेरे में आ जायेंगे l वे जहां भी नौकरी के लिए जायेंगे एक अदृश्य लांछन दबाव से ग्रस्त रहेंगे l

दरअसल कुछ अत्यंत नए और उत्साही नेताओं ने पूरी सरकार और कांग्रेस को पशोपेश में डाल दिया है l वे अत्यंत कमजोर मुद्दे के आधार पर प्रदेश की छवि बिगाड़ने का पाप कर रहे हैं l पहले संघ प्रचारक, स्वदेशी विचारक  और लेखक-पत्रकार माणिकचंद वाजपेयी के नाम स्थापित सम्मान-पुरस्कार को समाप्त कर सरकार के वैचारिक दुराग्रह का परिचय दिया l फिर कांग्रेस सरकार के एक मंत्री ने आरएसएस पर आतंकवादी संगठन होने और एटम बनाने वाला संगठन बता कर संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार कर दिया l मीडिया के सहारे प्रो. कुठियाला की जांच, गिरफ्तारी और चरित्र हनन का हल्ला को बनाया l हल्ला इसलिए कि राष्ट्रीयता की सोच रखने वालों में भय पैदा हो l ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति भारतीय विचारधारा के आधार पर पहल और प्रयोग का साहस न कर सके l

पत्रकारिता विवि के मामले में जांच से ज्यादा प्रचार पर जोर दिया गया प्रतीत होता है l जांच प्रकरण में
प्रो. कुठियाला को विशेषरूप से टार्गेट किया गया l यह इसलिए कि वे आरएसएस से जुड़े रहे हैं l लेकिन यह पत्रकारिता विवि में वे अकेले संघ से जुड़े हों ऐसा नहीं है l शायद कांग्रेस यह पता नहीं लगा पाई कि इसी विश्वविद्यालय में एक कुलपति संघ के अधिकारी रहे हैं और वे वर्त्तमान में भी निष्ठावान स्वयंसेवक हैं l इसी प्रकार विवि में अनेक ऐसे अधिकारी रहे जो संघ से जुड़े रहे, किन्तु उनकी कर्तव्यपरायणता असंदिग्ध रही l सिर्फ़ पत्रकारिता विश्वविद्यालय ही क्यों, मध्यप्रदेश का हर विश्वविद्यालय और सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थान कांग्रेस की दुराग्रही रडार पर है l सभी जगह विवादों को पैदा करने और उसे हवा देने की पुरजोर कोशिश की जा रही है l देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन, अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भारत भवन, जन अभियान परिषद् आदि संस्थानों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है l ये सभी संस्थाएं अकादमिक, शैक्षिक और प्रशासनिक पक्षाघात की शिकार हैं l इसी प्रकार कांग्रेस सरकार मध्यप्रदेश की हर बुराई या दुर्घटना के लिए भाजपा या आरएसएस को ही दोषी जताने की कोशिश करती है l सरकार के शुरुआती दिनों में अनेक भयावह आपराधिक घटनाएं हुई l इन सभी घटनाओं में भाजपा और संघ से जुड़े लोगों को फंसाने का सरकारी प्रयास हुआ l कांग्रेस सरकार ने अपनी संवैधानिक दायित्वों और जिम्मेदारियों को कांग्रेस पार्टी की प्रतिबद्धता में विलीन कर दिया है l वे पार्टी और सरकार की मर्यादा सीमा-रेखा को पाट देने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं l सरकार जांच के नाम पर भयादोहन का वातावरण बना रही है l इन्हीं स्थितियों के न्यायालय ने सरकार के रवैये पर विपरीत टिप्पणी की है l दुष्प्रचार के गुनाहगार अनावृत्त हो चुके हैं l अपने निहित व्यक्तिगत स्वार्थ और द्वेष के कारण विश्वविद्यालय, शैक्षिक संस्थान और प्रदेश की छवि को बट्टा लगाने वाले निश्चित ही दंड के भागी हैं l

दरअसल कांग्रेस हर वो काम करना चाहती है जिससे राष्ट्रीय विचारधारा को कटघरे में खड़ा किया सके l  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बदनाम करने का कोई मौक़ा कांग्रेस छोड़ना नहीं चाहती l पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह परम्परागत रूप से संघ विरोधी रहे हैं l वे व्यक्तिगत, सरकार और संगठन सभी स्तरों पर आरएसएस की विचारधारा का विरोध करते रहे हैं l मध्यप्रदेश सरकार और प्रदेश कांग्रेस में उनकी भूमिका जगजाहिर है l गत विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा तैयार ‘वचन-पत्र’ में स्पष्ट तौर पर संघ विरोध प्रदर्शित किया गया l लेकिन सरकार के मुखिया श्री कमलनाथ सहित कांग्रेस के नेताओं को मालूम है कि आरएसएस से जुड़ा मामला  पूरी तरह राजनीतिक और विचारधारात्मक है और इन मोर्चों पर कांग्रेस का पक्ष बेहद कमजोर है l

चाहे विचारधारा हो या राजनीति, स्वयं को श्रेष्ठ जताने के लिए दूसरे को निकृष्ट या कमतर बताना कांग्रेसी तरीका रहा है l वे लांछन और भय को दंड की तरह इस्तेमाल करने के माहिर हैं l क्योंकि भारतीयता के वाहकों, पोषकों को वैचारिक और संगठनात्मक रूप से कमतर कर पाना कांग्रेस के लिए मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है l इसलिए कांग्रेस के पूरे तंत्र ने बदनाम करने, लांछित करने और चरित्र-हनन का तरीका अपनाया है l कांग्रेस नेतृत्व ने बहुत जतन से शीशे का वैचारिक घर बनाया है l वे खुन्नस में दूसरे के घर पर पत्थर फेंक रहे हैं, बिना यह जाने कि दूसरे का घर शीशे का है या पत्थर का l जाहिर है इस पत्थरबाज़ी का नुकसान उनका ही होगा जिनका घर कमजोर होगा, शीशे का
होगा l फिलहाल तो संघ वज्र-सा है और कांग्रेस शीशे का l

बहरहाल कांग्रेस का निशाना चूक गया लगता है l कांग्रेस पार्टी की सरकार भले ही प्रो. कुठियाला के बहाने  भारतीय वैचारिकता और एक विचारधारा की छवि धूमिल करने की कुचेष्टा करे, लेकिन वह अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सकती l भारतीय विचारधारा को जब-जब दबाने का प्रयास किया गया तब-तब वह संगठनात्मक और बौद्धिक रूप से विकसित व सशक्त ही हुआ है l हर बार कांग्रेस सरकार का निशाना चूकता या बूमरैंग होता रहा है l

(लेखक मीडिया अध्येता और राजनीतिक विश्लेषक हैं l )

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