मध्य प्रदेश : शिवराज सिंह नहीं होंगे नेता प्रतिपक्ष, नए नेता का चुनाव 6 जनवरी को

एमपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कौन होगा, इस सवाल को लेकर अटकलों का दौर भले ही जारी हो, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस रेस से ख़ुद को बाहर कर लिया है। शिवराज की स्वाभाविक दावेदारी को पार्टी हाईकमान के स्तर पर भी स्वीकार नहीं किए जाने की ख़बरें आ रही हैं। पार्टी आलाकमान ने नया फॉर्मूला तय करते हुए अब दूसरी कतार के नेताओं को आगे लाने का फ़ैसला किया है। लिहाज़ा सियासी गलियारों में शिवराज सिंह चौहान के अलावा अब दो से तीन और नाम चर्चा में हैं। शिवराज के अलावा दतिया से बीजेपी के विधायक नरोत्तम मिश्रा और रहली क्षेत्र के विधायक गोपाल भार्गव और पूर्व गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह भी नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश का सह प्रभारी बनाए जाने के बाद नरोत्तम मिश्रा का नाम लिस्ट से बाहर माना जा रहा है। गोपाल भार्गव पिछले दिनों संघ के कार्यालय पहुंचे थे, लिहाज़ा उनके नेता प्रतिपक्ष बनने की चर्चा ज़ोरों पर है। इस बीच शिवराज सिंह चौहान ने भी नेता प्रतिपक्ष पद पर ख़ुद की दावेदारी से इनकार किया है।

चौहान ने अपने आवास पर मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में माना कि पार्टी का नेता छह जनवरी को चुन लिया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष के चयन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी ने राजनाथ सिंह और विनय सहस्त्रबुद्धे को ऑब्ज़र्वर बनाया है, जो 6 जनवरी को भोपाल आकर नेता प्रतिपक्ष का चयन तय करेंगे। नेता प्रतिपक्ष के चयन में हो रही देरी को लेकर कांग्रेस भी बीजेपी पर तंज कस रही है, और 7 जनवरी से शुरू हो रहे विधानसभा के नए सत्र से पहले नेता प्रतिपक्ष का चयन ज़रूरी है, लिहाज़ा बीजेपी में अब इस पद के नाम को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। माना ये जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष के लिए किसी भी अगड़ी जाति के नेता के नाम पर मुहर लग जाए ताकि विधानसभा चुनाव में एट्रोसिटी एक्ट के मुद्दे पर पार्टी को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई हो जाए, और सवर्ण जातियों में पार्टी नया संदेश दे सके। हालांकि माना ये भी जा रहा है कि भूपेन्द्र सिंह के नाम को आगे बढ़ाने में पर्दे के पीछे शिवराज सिंह चौहान हैं, ताकि अपने चहेते भूपेन्द्र को नेता प्रतिपक्ष का पद दिलाकर पार्टी में अपना प्रभाव बनाए रखा जा सके। चर्चा ये भी है कि एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्रियों को बीजेपी केन्द्र में नई ज़िम्मेदारी देकर उन्हें राज्य की राजनीति से किनारे कर सकती है। इसका आधार छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के बजाय धर्मलाल कौशिक को नेता प्रतिपक्ष का पद देना माना जा रहा है।

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