मीडिया में समाज को बेहतर बनाने की ताकत : राजयोगी बी. के. करूणा जी

ब्रम्हाकुमारीज का मीडिया सम्मलेन और एडिटर्स मीट संपन्न
भोपाल 8 सितंबर 2018 । हम सब एडिटर एक साथ मिलकर यह संकल्प करें कि ईश्वर नें समाज को बेहतर बनाने का कार्य हम एडिटर्स को दिया है, उसे हम सब मिलकर करेंगे। उक्त उद्गार ब्रह्माकुमारीज के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से पधारे संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी एवं मीडिया प्रमुख राजयोगी ब्रह्माकुमार करूणा भाई नें आज रोहित नगर में आयोजित एडिटर्स मीट के दौरान व्यक्त किए। उन्होने ब्रह्माकुमारीज संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि कां स्मरण करते हुए बताया कि दादी जी अक्सर कहतीं थीं कि स्वपरिवर्तन से विश्वपरिवर्तन। ईश्वर भी एडिटर्स से चाहते हैं कि पहले आप अपनें में परिवर्तन लाएं तो आपकी कलम की ताकत से समाज में प्रभाव पड़ेगा एवं समाज अवश्य ही बेहतर बन जाएगा। । उन्होनें आगे कहा कि एडिटर्स नें हमेशा से समाज को बेहतर बनानें की सेवा की है, वर्तमान में भी कर रहे हैं, एवं आगे भी आप यह कार्य करते रहेंगे ऐसा पूर्ण विश्वास है।
दिल्ली से पधारे वरिष्ठ टी.व्ही. पत्रकार एन. के. सिंह नें कहा कि आज मीडिया में दिखाए जानें वाले कई विज्ञापनों में रिश्तों की मर्यादा का भी ध्यान नहीं रखा जाता। आजकल देखा गया है कि मीडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार करनें के लिए पहले नैतिक मूल्यों को कमजोर करनें का कार्य किया जाता है, एक बार नैतिक मूल्य कमजोर होने के बाद लोगों को अपनी ओर मोड़ना आसान हो जाता है। उन्होने आगे कहा कि जब जनता मीडिया को हेय दृष्टि से देखनें लगे तो यह एक खतरनाक स्थिति है। हमें इन स्थितियों से बचना होगा। एडिटर्स को बिना सकारात्मक उद्देश्य के अपनी निष्पक्षता नहीं छोड़नी चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार व मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति के राष्ट्रीय संयोजक प्रोफेसर कमल दीक्षित ने कहा कि संपादक यदि ठान लें तो वह कुछ भी कर सकता है। वह बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकता है। उन्होनें ब्रम्हाकुमारीज एवं मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति के द्वारा मीडिया में मूल्यों की स्थापना के लिए किए जा रहें प्रयासों की चर्चा की।
कार्यक्रम में ब्रम्हाकुमारीज सेवाकेन्द्र प्रभारी बी. के. डॉ. रीना बहन नें कहा कि यदि मीडिया एवं आध्यात्मिकता  साथ मिलकर कार्य करें तो वह दिन दूर नहीं जब एक ऐसा संसार स्थापित हो जाएगा जैसा हम चाहते हैं। उन्होनें कहा कि कार्यक्रम आयोजन का उद्देश्य यही है कि मीडिया एवं आध्यात्मिकता को साथ लेकर एक बेहतर समाज बनानें के बारे में न केवल चर्चा की जाए बल्कि उस पर कार्य भी किया जाए। उन्होनें कार्यक्रम में आए सभी एडिटर्स का स्वागत किया साथ ही सभी एडिटर्स को कमेन्ट्री के माध्यम से राजयोग की अनुभूति कराई।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार गिरिजा शंकर नें चर्चा आरंभ करते हुए कहा कि अब बोलनें का नहीं बल्कि सोचनें का समय है। हम यदि हम दिक्कतो को परखनें की कला सीख लें तो उनसे उबरनें में आसानी होगी। संपादक को यह समझ हो कि उनहे क्या बात कहनी है और क्या भूमिका निभानी है। पत्रिका के स्थानीय संपादक पंकज श्रीवास्तव जी नें कहा कि आज भी कुछ मीडिया संस्थान ऐसे हैं, जिनमें निष्पक्ष एवं बिना दबाव के कार्य करनें की स्वतंत्रता है। नई दुनिया के संपादक सुदेश गौर नें कहा कि यदि संपादक चाहे तो समाज सरोकारी स्थान निकाजा जा सकता है यह उसके संकल्पों एवं विचारों पर निर्भर करता है।
वरिष्ठ पत्रकार रविन्द्र जैन नें कहा कि संपादको की स्थिति क्रिकेट खिलाड़ी जैसी हो गई है। जिन्हे आउट करनें के लिए सब तैयार खड़े रहते हैं। आज संपादकों को अनेक दबावों से गुजरना पड़ता है। यदि हम संकल्पित हैं तभी समाज को बेहतर बना सकते हैं।
कार्यक्रम में अनेक वरिष्ठ संपादकों एवं पत्रकारों नें अपने विचार व्यक्त किए। जिनमें  सोमदत्त शास्त्री,राधावल्लभ शारदा, ममता यादव, कृष्ण मोहन झा, रिजवान अहमद सिद्दीकी, सरमन नगेले, रविन्द्र सिंह मेहता, मधुकर द्विवेदी, विनोद सूर्यवंशी, सुदेश गौर, विनोद नागर, आर. के. गुप्ता,  रामेश्वर धाकड, आशीष रत्नपारेख, देवेन्द्र जोशी, पवन देवलिया, महेश दीक्षित, विवके शर्मा एवं दिल्ली से पधारी काल्यायिनी चतुर्वेदी जी प्रमुख थे।
कार्यक्रम हेतु दिल्ली से ब्रह्माकुमारीज के मीडिया प्रभाग के राष्ट्रीय संयोजक बी. के. सुशांत जी  विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी एडिटर्स को ईश्वरीय सौगात प्रदान की गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)