विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए संचारकों को राष्ट्रीय पुरस्कार

  • उमाशंकर मिश्र

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (एनसीएसटीसी) की ओर से बुधवार को वर्ष 2017 के लिए विज्ञान संचारकों को राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भू-विज्ञान, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने ये पुरस्कार प्रदान किए हैं। विज्ञान को लोकप्रिय बनाने और संचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रयासों को प्रोत्साहित एवं मान्यता दिलाने और वैज्ञानिक अभिरुचि को बढ़ाने में अपना योगदान देने वाले लोगों एवं संस्थाओं को छह श्रेणियों में यह पुरस्कार हर साल दिया जाता है। इस अवसर पर बोलते हुए डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि “लोगों के बीच विज्ञान की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए गतिशील दृष्टिकोण अपनाने और वैज्ञानिक सामाजिक जिम्मेदारी को अनुकूलित करने की जरूरत है।”

डॉ हर्षवर्धन ने यह भी कहा कि देश विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है, लेकिन हमें सर सी.वी. रामन जैसे वैज्ञानिकों की जरूरत है।राष्ट्रीय विज्ञान दिवस रामन प्रभावकी खोज की याद में हर वर्ष 28 फरवरी को मनाया जाता है। इसी खोज के कारण रामन को नोबेल पुरस्कार मिला था।  विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, आशुतोष शर्मा ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से स्थिरता प्राप्त की जा सकती है और स्थिरता प्राप्त करने के लिए सामाजिक योगदान की आवश्यकता है। इस बार राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम टिकाऊ भविष्य के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीरखी गई है। इस थीम का चयन करने का उद्देश्य इससे संबंधित वैज्ञानिक पहलुओं के बारे में लोगों को जागरूक बनाना है।

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद की ओर से राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार की शुरुआत विज्ञान को लोकप्रिय बनाने और आम लोगों के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करने वाले लोगों को सम्मानित करने के लिए 1987 में की गई थी। एनसीएसटीसी के प्रमुख श्री चंदरमोहन ने इस मौके पर कहा कि हम विज्ञान को निरंतर बढ़ावा दे रहे हैं। हमारी कोशिश विज्ञान एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की है।”  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार में बेहतरीन योगदान के लिए इस बार मोहाली के डॉ रघुबीर सिंह खंडपुर को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार के तहत डॉ रघुबीर सिंह खंडपुर को दो लाख रुपये की नकद राशि, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया है।

जैव चिकित्सा उपकरण के क्षेत्र में डॉ खंडपुर की भूमिका मार्गदर्शक की रही है। उनकी उपलब्धियों में पंजाब के कपूरथला में करीब 100 करोड़ रुपये के निवेश से 72 एकड़ क्षेत्र में स्थापित पुष्पा गुजराल साइंस सिटी का विकास करना प्रमुख है। इस साइंस सिटी में 500 से अधिक संवादात्मक (इंटरैक्टिव) मॉडल हैं। पुष्पा गुजराल साइंस सिटी सभी वर्ग एवं उम्र के लोगों के लिए शिक्षा एवं मनोरंजन का केंद्र है। डॉ खंडपुर ने दस पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें से चार पुस्तकों को अमेरिकी प्रकाशक मैग्रा हिल ने प्रकाशित किया है। डॉ खंडपुर के नाम सात पेटेंट भी पंजीकृत हैं।

पुस्तकों एवं पत्रिकाओं, इंटरनेट समेत प्रिंट मीडिया के जरिये विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए जयपुर के तरुण कुमार जैन, केरल स्थित कोड़िकोड़ के डॉ बी. शशिकुमार और गुवाहाटी के डॉ दिलीप कुमार शर्मा को यह पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसके तहत एक लाख रुपये, स्मित चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाते हैं। गुवाहाटी स्थित कॉटन महाविद्यालय में गणित के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष दिलीप कुमार शर्मा गणित विषय पर असमिया भाषा में नौ पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। डॉ शर्मा ने 12वीं शताब्दी में भास्कराचार्य द्वारा रचित गणित विषयक ग्रंथ का संस्कृत से असमिया में अनुवाद भी किया है।

जगतसिंहपुर, ओडिशा के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ ज्योतिर्मय मोहंती और होशंगाबाद, मध्यप्रदेश की सारिका घारू को बच्चों के बीच विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में उत्कृष्ट प्रयास के लिए पुरस्कृत किया गया। जबकि, जगतसिंहपुर की ही संस्था सोशियो कल्चरल डेवलपमेंट सेंटर को नवाचारी एवं परंपरागत तरीकों से विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए पुरस्कृत किया गया है। देहरादून स्थित इंडियन सोसायटी ऑफ रिमोट सेंसिंग को इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिये प्रभावी विज्ञान संचार के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। (इंडिया साइंस वायर)

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