स्व. श्री वाजपेयी को जन-जन का प्रणाम !

अटल जी जैसा कोई नहीं हो सकता – मुख्यमंत्री श्री चौहान

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। श्री वाजपेयी ने आज दोपहर बाद नई दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस ली। श्री चौहान ने कहा कि स्वर्गीय श्री अटल जी भारत के स्मृति पटल पर हमेशा अटल रहेंगे। भारत देश को उन पर गर्व है। उन्होंने कहा कि अटल जी के देहावसान से भारतीय राजनीति के अत्यंत उज्जवल युग का समापन हो गया है। विपक्ष में रहने के बावजूद स्वर्गीय श्री वाजपेयी सर्वमान्य नेता थे। अटल जी जैसा कोई और नहीं हो सकता। उन्होंने सकारात्मक, रचनात्मक और राष्ट्रहित की राजनीति की। उनका राजनैतिक जीवन भारतीय राजनीति की विरासत बन गया है। वे मूल्य आधारित आदर्श राजनीति के संस्थान थे। ऐसे बिरले सपूत सदियों में जन्म लेते हैं।

      श्री चौहान ने स्वर्गीय श्री वाजपेयी के मध्यप्रदेश से भावनात्मक रिश्ते का स्मरण करते हुए कहा कि स्वर्गीय श्री वाजपेयी जी अभी भी दिलो-दिमाग पर छाए हुए हैं। सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद भी हमारी प्रेरणा और आदर्श थे। उनकी उपस्थिति मात्र से उत्साह मिलता था और जीवन में सकारात्मक करने की प्रेरणा मिलती थी। श्री चौहान ने स्वर्गीय श्री वाजपेयी की कविता – ‘गीत नया गाता हूँ’ दोहराते हुए कहा कि वे बोलते थे तो कल्पना झरती थी। अटल जी, अटल जी थे। उन जैसा कोई और नहीं हो सकता।

     स्वर्गीय श्री वाजपेयी के विदिशा से चुनाव लड़ने के प्रसंग का स्मरण करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा श्री वाजपेयी के स्वभाव में मस्ती थी। राष्ट्र के प्रति अगाध प्रेम था। उनका व्यक्तित्व विशाल था। वे सबको साथ लेकर चलते थे। गठबंधन की अपरिहार्य राजनीति करते हुये उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में कई दलों की सरकार का नेतृत्व किया। सफलतापूर्वक सरकार का संचालन किया। उनके विशाल व्यक्तित्व के कारण वे सर्वमान्य नेता थे।

वे दलीय नहीं सर्वमान्य नेता थे : अजय सिंह (नेता प्रतिपक्ष, मप्र.विधानसभा)

            वे दलीय नेता नहीं थे सर्वमान्य नेता थे । उनकी उपस्थिति से हम जैंसे अनेक लोग जो राजनीति और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं को मार्गदर्शन मिलता था । गैर कांग्रेसी नेताओं से मेरे पूज्य पिताजी श्री अर्जुन सिंह के जो रिश्ते रहे उनमें अटल जी का नाम सबसे ऊपर था । वे हमारे परिवार के गैर राजनीतिक कार्यक्रमों में स्थायी रूप से उपस्थित रहने वालों में से थे । हर साल दिल्ली में पिताजी के निवास पर जन्माष्टमी और रामनवमी पर भजन संध्या होती थी । अटलजी सदैव उस कार्यक्रम में उपस्थित रहते थे । इस नाते अटलजी सदैव हमारे परिवार का एक हिस्सा रहे । राजनैतिक विचारधारा दोनों की अलग-अलग थी लेकिन उससे कभी व्यक्तिगत व्यवहार, सौजन्यता और सद्भाव में कमी नहीं आई ।

            वे पंडित नेहरू की परंपरा के नेता थे । गुजरात में जब दंगे हुए और सरकारी तंत्र नियंत्रण नहीं कर रहा था तब अटलजी ने ही प्रधानमंत्री रहते हुए गुजरात सरकार के मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राजधर्म निभाने का निर्देश दिया था । उन्होंने इस देश को जाति धर्म के आधार पर बांटने की बात नहीं की । अटलजी भारतीय राजनीति के आदर्श थे । उन्होंने कभी दलीय मतभेद को व्यक्तिगत भेद में शामिल नहीं किया । लोकसभा में उनका भाषण हमेशा यादगार रहा । वे उन विरले नेताओं में से थे जिन्हें सुनने के लिए लोगों को ढोकर नहीं ले जाना पढ़ता था बल्कि लोग स्वतः स्फूर्त हो कर उन्हें सुनने हजारों की संख्या में आते थे ! उनके सर्वमान्य व्यक्तित्व का उदाहरण है कि तत्कालीन प्रधाानमंत्री श्री पी.व्ही.नरसिम्हाराव ने उन्हें जेनेवा में होने वाले मानवाधिकार के सम्मेलन मे भारत का पक्ष रखते सरकार का प्रतिनिधि बनाकर भेजा था । इस सम्मेलन में पाकिस्तान कश्मीर मुद्दा उठाने वाला था । अटल जी ऐसी भारतीय राजनीति के आदर्श थे । उनका निधन हम सब भारतीयों के साथ दुनिया के तमाम देशों जिन्होंने उनके व्यकित्व और कृतित्व को जाना है उनके लिए बेहद दुःखद है । उनका न रहना अखरेगा । सच में आज की राजनीति में ऐसे व्यक्ति के चले जाने से लगता है कि कही मतभेद मनभेद में न बदल जाएं और वैचारिक भिन्नता दुश्मनी न बन जाए ।

He was a great human being, poet, leader and above all a statesman :       SHARAD YADAV

  I am saddened on the demise of Shri Atal Bihari Vajpayee, the former Prime Minister of India and one of the greatest leaders the country has produced. As a matter of fact, his qualities have no words to explain.  He was a great human being, poet, leader and above all a statesman. He was a man with full self confidence.  It was in the year 1957 when Shri Vajpayee was amongst those four MPs who were elected on the ticket of Bhartiya Jan Sangh. It was a surprise for President Shri S. Radhakrishnan when Shri Vajpayee was introduced as MP from the party called Jan Sangh as he had not heard of the name of Party.  It showed that he was a very popular leader with whose name the Party became known to the Parliament.

          It may be mentioned that the journey of Shri Vajpayee was not very easy as he was born in a family of lower middle class as his father was a teacher. Having born in a very humble family, he shouldered the responsibilities from Sangh Parcharak to different positions in the Party including President of the Party to the Minister in the Union Cabinet to the highest political office of the Prime Minister of India. Such people are rarely born on this earth.

          I worked very closely with Shri Vajpayee in his Council of Ministers and before that also in Parliament. He had a lot of love and affection for me. In his passing away, I have not only lost my beloved person but the country has lost a great patriot, parliamentarian, statesman and a veteran leader, who was very popular for his non partisan politics in the country.

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