रिजर्व बैंक : साल 2017-18 में जालसाज़ों ने बैंकों को लगाया 41 हज़ार 167 करोड़ रुपये का चूना

विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी जैसे जालसाज कब लौटाएंगे पैसा ?

  • बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों में इस साल के कुल अमाउंट का 80 फीसदी हिस्सा

  • पीएसयू बैंकों में एक लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के 93 प्रतिशत मामले

  • निजी बैंकों में धोखाधड़ी के 6 फीसदी मामले

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2017-2018 में धोखाधड़ी करने वालों ने बैंकिंग प्रणाली से करीब 41 हज़ार 167 करोड़ से ज़्यादा रुपये लूटे हैं, जो पिछले साल 23 हज़ार 933 करोड़ की रकम से 72 फ़ीसदी ज़्यादा है। पिछले साल के 5 हज़ार 76 मामलों के मुकाबले 2017-18 में बैंक धोखाधड़ी के 5 हज़ार 917 मामले आए थे। रिजर्व बैंक से जारी आंकड़े ये बता रहे हैं, कि धोखाधड़ी के मामले पिछले साल के मक़ाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़े हैं।

2013-14 में 10 हज़ार 170 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी के मामले सामने आए थे। जिसकी तुलना में 2017-18 में ये आंकड़ा बढ़कर चार गुना हो गया है।50 करोड़ रुपये और उससे अधिक के बड़े अमाउंट के धोखाधड़ी के मामलों में इस साल के कुल अमाउंट का 80 फ़ीसदी हिस्सा है। जिनमें पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSU) में एक लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के 93 प्रतिशत मामले सामने आए, जबकि निजी बैंकों में धोखाधड़ी की छह प्रतिशत हिस्सेदारी रही।

RBI ने माना है कि “धोखाधड़ी प्रबंधन में सबसे गंभीर चिंता का विषय बन गई है, जिसका 90 प्रतिशत हिस्सा बैंकों के क्रेडिट पोर्टफोलियो में स्थित है”। RBI के अनुसार, बड़े अमाउंट के धोखाधड़ी के तौर-तरीकों में कर्जदारों से बिना किसी अनापत्ति प्रमाण पत्र के ऋणदाताओं के चालू खाते खोल दिए गए, इसके साथ ही थर्ड पार्टी संस्थाओं द्वारा उनकी कमी और धोखाधड़ी वाली सेवाएं को सही तरीके से पहचान नहीं की गई

इसके बाद फरवरी 2018 में, RBI ने भारतीय बैंक संघ (IBA) को उचित डेटा सुरक्षा और नियंत्रण उपायों के साथ IT के सक्षम कर्मचारियों को बुनियादी ढांचा बढ़ाने के लिए कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए।

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