धर्मगुरुओं ने खसरा-रुबैला से समाज को बचाने का लिया संकल्प

भोपाल- 08 जनवरी।  “दो बीमारियों को भगाना है, जीवन को बचाना है” के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के विभिन्न धर्म के गुरुओं और अलग-अलग पंथों के धार्मिक नेताओं ने एक सुर से आवाज़ बुलंद की। धर्म गुरुओं ने केन्द्र सरकार के टीकाकरण अभियान को समाज के हर हिस्से से जोड़ने के लिए नया नारा दिया, “नए साल का पहला काम करो, खसरा रुबैला का काम तमाम करो”। भोपाल में स्पंदन संस्था की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में यूनिसेफ़ ने भी सहयोग किया। यूनिसेफ़ की स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वंदना भाटिया ने पंथ-प्रतिनिधियों के साथ खसरा-रुबैला के खतरे को साझा किया l उन्होंने कहा कि इन दोनों जानलेवा बीमारी का संक्रमण किस तरह से नौ माह के बच्चे से लेकर 15 साल तक के बच्चे में कैसे फैलता है, और इसे फ़ैलने से कैसे रोका जा सकता है। डॉ. वंदना ने धर्म गुरुओं से अपील की, कि समाज का हर वर्ग धार्मिक गुरुओं की बात को सीधे स्वीकार कर उसे अपने जीवन में उतार लेता है, इसलिए धार्मिक आयोजनों के ज़रिए खसरा-रुबैला जैसी ख़तरनाक बीमारी से लड़ने के लिए टीकाकरण जागरुकता अभियान समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जाए। इस बाबत कार्यक्रम में शामिल हुए विभिन्न पंथों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से खसरा-रुबैला टीकाकरण अभियान के बारे में समाज को जागरुक करने के लिए प्रतिबद्धता जताई।
वरिष्ठ पत्रकार व प्रवचनकर्ता पं रमेश शर्मा ने कहा कि हम सामाजिक कार्यक्रमों में खसरा-रुबैला के बारे में अलग से जागरुकता का संदेश देंगे और मीडिया के मंचों पर भी इस बारे में अलग-अलग तरीकों से चर्चा करेंगे। गुना के शहर काज़ी नूर उल्लाह युसूफ़ जई ने कहा कि मस्ज़िद के आसपास और धर्म स्थलों पर ऐसी ख़तरनाक बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरुकता अभियान के लिए हर तरह के उचित क़दम उठाए जाने चाहिए, जहां से लोगों को सीधे पता चलेगा और समाज के सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी खसरा-रुबैला जैसे संक्रामक रोगों के बारे में जागरुकता कार्यक्रम होने चाहिए। ब्रह्मकुमारी प्रजापिता की डॉ. रीना बहन ने कहा कि संस्था की अंतर्राष्ट्रीय दादी बहन कुमारी जानकी का तीन दिन के लिए भोपाल आगमन हो रहा है, जिसमें दादी की मौजूदगी में समाज के नाम एक व्यापक संदेश दिया जाएगा, ताकि बच्चों को खसरा-रुबैला जैसी ख़तरनाक बीमारी की ज़द में आने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि धर्म गुरुओं को धार्मिक तथ्यों के अलावा लोगों की स्वास्थ्य की चिंता करना आज के लिए आवश्यक हो गया है।  सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री नाजिया खान ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की सेहत पर ध्यान देना ज़रूरी है, जहाँ से बच्चे का सृजन और जन्म होता है। सुश्री खान ने कहा कि खसरा-रुबैला से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।  बौद्ध धर्म के भंते शाक्यपुत्र ने कहा कि आज ये सोचना भी ज़रूरी है कि धर्म गुरुओं की भूमिका उन कार्यों में तय हो जो समाज में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि स्पंदन जैसी संस्थाओं को धार्मिक कार्यक्रमों में अलग से जागरुकता अभियान चलाने की ज़रूरत है। सिख धर्मगुरु ज्ञानी हरजीत सिंह ने कहा कि सबसे पहले ज़रूरी है कि टीकाकरण अभियान से उन वर्गों को जोड़ना सबसे ज़रूरी है जिसे टीकाकरण के बारे में कोई जानकारी ही नहीं होता। हमें भविष्य की बहुत चिंता करने की ज़रूरत है और सबसे ज़्यादा फोकस गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य पर करने की ज़रूरत है। ईसाई पंथ के प्रतिनिधि फ़ादर डॉ. साज़ी ने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारे पास स्पंदन और इस जैसी संस्थाओं के लोग आएं और हम इन्हें स्थान देंगे ताकि खसरा-रुबैला जैसी ख़तरनाक बीमारियों के ख़िलाफ़ जागरुकता कार्यक्रम को और बेहतर रूप से उसके अंजाम तक पहुंचाया जा सके। गायत्री परिवार के एस पी सिंह ने कहा कि सरकारी स्तर पर जो भी जागरुकता कार्यक्रम चल रहे हैं उससे दो क़दम आगे जाकर धार्मिक और सामाजिक संगठनों को काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता-शुद्धता और पोषण को बढ़ावा देकर समाज को स्वस्थ रखा जा सकता है। जमायते इस्लामी के डॉ अज़हर ने कहा कि खसरा और रुबैला के टीकाकरण को लेकर और खुलकर तथ्यों को सामने लाने की ज़रूरत है। डॉ. अज़हर ने कहा कि स्पंदन ने समाज की उस नब्ज़ को पकड़ा है, जहां से समाज असल मायने में शिक्षित होता है।
धार्मिक गुरुओं के बीच शिक्षाविद हरिनारायण करण ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शहरों से ज़्यादा खसरा-रुबैला टीकाकरण अभियान की ज़रूरत गांवों में है। कार्यक्रम की शुरुआत स्पंदन के डॉ लक्ष्मीनारायण पाण्डेय ने की । स्पंदन संस्था के सचिव डॉ अनिल सौमित्र, एस जी हसन और अनिल सकरगाएँ ने औषधीय पौधों से पंथ प्रतिनिधियों का स्वागत  किया।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष भारत सरकार द्वारा 9 माह से 15 साल तक के आयु वर्ग के बच्चों के लिए संक्रामक एवं जानलेवा रोग “खसरा एवं रूबैला से सुरक्षा” को लेकर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। केन्द्र सरकार ने “दो बीमारियों को हराएंगे, ये टीका ज़रूर लगवाएंगे” का नारा दिया है l इसी तारतम्य में विभिन्न पंथों के प्रतिनिधियों ने समाज के लिए सर्वसम्मति से संदेश जारी करते हुए कहा कि आज हम भारत विशेषकर मध्यप्रदेश के बच्चों को खसरा-रुबैला से मुक्त करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रकट करते हैं l  खसरा-रुबैला के खात्मे हेतु भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार के साथ ही यूनिसेफ़ और अन्य स्वैच्छिक संस्थाओं के टीकाकरण अभियान को हम सभी पंथ-प्रतिनिधि समर्थन देते हैं l हम सभी एकमत से जनता से अपील करते हैं कि 9 माह से 15 साल तक के बच्चों को खसरा-रुबैला का टीका लगवाकर उन्हें अच्छा स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन देने का प्रयास करें l  हमारा समर्थन व सहयोग इस टीकाकरण अभियान में लगे सभी व्यक्तियों, समूहों और संस्थाओं को है l
कार्यक्रम में यूनिसेफ के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी, स्वास्थ्य विशेषज्ञ डा. वन्दना भाटिया, शिक्षाविद रितु शर्मा, डा. अंशुल उपाध्याय, डा. दीपशिखा हर्ष, एस.जी. हसन और अनिल सकरागायें ने भी सहभागिता की l

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