सदभावना स्कूल-कश्मीर में भारतीय सेना की सराहनीय पहल

जम्मू और कश्मीर राज्य 1947 के समय से ही हिंसा की आग में जल रहा है। हर दिन बढ़ती हिंसा ने यहाँ आम व्यक्तियों का जीवन यापन दुर्लभ कर दिया है। सरकारे बदल गयी पर कश्मीर के हालात नहीं बदले। आय दिन कर्फ़्यू लग जाना पाकिस्तान की तरफ से चाहे जब फायरिंग हो जाना ये सब कश्मीर में आम बात है। ऐसे दहशत के माहौल में स्थानीय जनता के मन में भारतीय सेना की एक नकारात्मक छवि उभर कर आने लगी थी , जिसको दूर करने के लिए भारतीय सेना ने 1999 में कश्मीर में आर्मी गुड विल स्कूलों की शुरुवात की।

      इन गुड विल स्कूलों का उद्देश्य कश्मीर के बालको को एक सुरक्षित माहौल में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा प्रदान करना था। साथ ही कश्मीर के आम नागरिकों के बीच भारतीय सेना की छवि को सुधारना था। धीरे धीरे इन स्कूलों में छात्रों की संख्या में वृद्धि होने लगी।और गुड विल स्कूलों की संख्या में भी बढ़ोतरी करनी पड़ी। तब इनका नाम बदल कर सदभावना स्कूल रख दिया गया। क्योंकि इन स्कूलों को चलाने का मुख्य उद्देश्य कश्मीर के आम लोगो के दिल और दिमाग को जीतना था। आज कश्मीर में लगभग 57 सदभावना स्कूल चालू है जिनमे अधिकांश में शिक्षा का माध्य्म अंग्रेजी है। इन स्कूलों में बच्चो को सेना की तरफ से मुफ़्त किताबे, वर्दी,और भोजन दिया जाता है। जिसके लिए भारत सरकार सेना को एक निशचित राशि उपलब्ध करवाती है। साथ ही इन सदभावना स्कूलों में शिक्षक के तौर पर एक अच्छी तनख़ा के साथ स्थानीय पढ़े लिखे युवाओं का ही चयन किया जाता है। और जो बच्चे इन सदभावना स्कूलों से पढ़कर निकलते है उनको आगे अपना भविष्य चलाने के लिए सेना रोजगार प्रदान करने में भी मदद करती है।

  जम्मू और कश्मीर में स्थानीय लोगो के दिल दिमाग को जीतने और उनके मन में भारतीय सेना की छवि सुधारने के उद्देश्य से चलाये गये इन सदभावना स्कूलों का घाटी में बहोत ही अच्छा परिणाम देखने को मिला है। लगातार इन स्कूलों में छात्रों की संख्या में वर्द्धि ही दर्ज की गयी है। इन स्कूलों में छात्रों की पढाई के साथ साथ खेल में आगे जाने के अवसर भी प्रदान किये जाते है। और स्कूलों के अंदर भी छात्रों के लिए आउट डोर और इनडोर दोनों  तरह के खेल की सुविधा  उपलब्ध होते है। छात्रों को अंतर राज्यीय प्रतियोगिता में भी भाग लेने का मौका दिया जाता है। इस तरह इन स्कूलों में पढ़ने वाला बालक एक सुरक्षित और सुनियोजित शिक्षा को प्राप्त करता है। इन  सदभावना स्कूलों के माध्यम से भारतीय सेना ने तो कश्मीर में अपनी छवि सुधरने का प्रयास शुरू किया है पर अब बारी कश्मीर के रहवासियों की है कि वो भारत सरकार और भारतीय सेना का कश्मीर की शिक्षा व्यवस्थता को सुधारने के लिए कितना साथ देते है। मेरा मानना है कि, प्रयास कभी विफल नहीं होते।अतः कश्मीर में शांति और उन्नति हेतू भारतीय सेना ने जो प्रयास किये है उनका उचित प्रतिफल हम सभी को तब देखने मिलेगा जब कश्मीर का प्रत्येक बालक शिक्षित हो जायेगा और अपना अच्छा बुरा खुद समझ कर किसी के बगलाने में नहीं आएगा।

 भारतीय सेना के साथ श्री नरेंद्र मोदी जी के कश्मीर की उन्नति की दिशा में किये गये प्रयास भी अत्यंत सराहनीय है। जैसे की सुरंगों का निर्माण और रोड निर्माण इन प्रयासों से न केवल घाटी में एक स्थान से दूसरे स्थान पहुँचने में समय कम लगेगा बल्कि मार्ग में सुरक्षा का भी पुख़्ता इंतजाम होगा। अपने अंतिम शब्दो में मैं, बस इतना कहना चाहूंगी कि भारतीय सेना ने आज तक न केवल वीरता और देश सुरक्षा के प्रति अपना योगदान दिया है अपितू इन सदभावना स्कूलों के माध्यम से भारतीय सेना ने कश्मीर के लोगो के सामाजिक जीवन स्तर को सुधारने का भी सटीक प्रयत्न किया है। बालको को शिक्षा देना फिर शिक्षित को रोजगार देने का प्रयास अपने आप में उन्नति की श्रृंखला को परिपूर्ण करता है। भारतीय सेना की इस अदभुत पहल के बाद भी आज कश्मीर के लोग भारत और भारतीय सेना से खुश नहीं है इसका कारण भारत के प्रयासों में कमी नहीं है अपितू स्थानीय लोगो के विचारों में सदभावना और नवीनीकरण की कमी है। जिसको मिटाने के लिए भारत सदैव प्रयासरत रहा है और आगे भी रहेगा। जय हिंद।

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