खाने और उगाने के बीच परंपरागत संबंध होना चाहिए – अर्चना चिटनिस

मंत्री श्रीमती चिटनिस की उपस्थिति में 24 वीं क्षेत्रीय कार्यशाला का समापन 
बुरहानपुर।  खुशी की बात है कि बुरहानपुर जिले में जितनी सिंचाई होती है, उसका 60 प्रतिशत ड्रिप टपक सिंचाई पद्धति होती हैं, यहाँ तक कि चने की फसल का उत्पादन तक ड्रिप सिंचाई से हो रहा हैं। जिसका उदाहरण वैज्ञानिक देखकर आए हैं। बुरहानपुर जिला कृषि क्षेत्र में एक ऐसा उदाहरण बनें कि अन्य राज्यों के किसान भी इससे प्रेरणा ले सकें।
यह बात प्रदेश सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने जिले में पहली बार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की क्षेत्रीय कार्यशाला के समापन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि किसान की आय को दुगना करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाए। किसानों को नई-नई तकनीकी की जानकारी दी जाए। साथ ही किसानों को बाजार से भी जोड़ना होगा। कार्यशाला में तीन दिवस तक अलग-अलग प्रदेशों – मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं उड़ीसा सहित अन्य राज्यों से आए कृषि वैज्ञानिकों ने कृषकों को जानकारी दी। उन्होंने किसानों से पानी बचाने का संदेश देते हुए कहा कि पानी करेंगे खर्च कम पर कमाएंगे भरपूर। कम पानी वाली फसल के लिए किसानों को प्रेरित किया जाए। हमें किसानों को इस ओर जागरूक करना होगा। केले के उत्पाद बनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर मंत्री चिटनिस ने कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यां के लिए अधिकारियों को प्रमाण-पत्रों का वितरण भी किया।
उल्लेखनीय है कि तीन दिवसीय कार्यशाला के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री के निर्देश पर ग्राम धामनगांव स्थित मां वाघेश्वरी अनुसंधान केन्द्र में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की 24वीं क्षेत्रिय कार्यशाला में पधारे तीन राज्यों के वैज्ञानिकों एवं कृषि अधिकारियों से चर्चा कर बुरहानपुर जिले के अनेक गांवों में और कई किसानों के खेतों में विभिन्न प्रकार की फसलों का अवलोकन भी कराया गया।
इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मा.नरेन्द्र मोदी परड्रॉप-मोरक्रॉप से हमें जो संदेश देते है इसका अर्थ है भूमिगत जल का संरक्षण और न्यूनतम सिंचाई से अधिकतम कृषि उत्पादन करना। किसान के साथ खेतीबाड़ी का व्यवसाय शब्द जुड़ा है। खेतीबाड़ी में कृषि और पशुपालन स्वमेव जुड़े हुए हैं । उन्होंने कहा कि बकरी ग्रामीणजन के लिए एटीएम (ऑल टाईम मनी) है। जबकि भैंस और गाय समय अनुसार दो बार दूध देती है और बकरी जब चाहो तब दूध तो देती ही है साथ ही साथ पौष्टिक तत्व भी बकरी के दूध में मिलता है। खेती के साथ मधुमक्खी पालन का कार्य किसान और ग्रामीण मजदूर के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर उपाय है जिससे खेती को लाभ का धंधा बनाने का सर्वसुलभ, सर्वमान्य तरीका बनाया जा सकता है। खाने और उगाने के बीच परंपरागत संबंध होना चाहिए।
श्रीमती चिटनिस ने कहा कि खेती में कम पानी की खपत गांव में जल संवर्धन के उपाय और प्रयास करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। साथ ही साथ ही कृषि भूमि में फर्टिलाईजर या पेस्टीसाईड्स के अधिकतम उपयोग हेतु बुरहानपुर का जिक्र इस कार्यशाला में होना कृषि भूमि की सेहत के लिए दुखदायी और मानव जीवन के लिए बुरा संकेत है। उन्होंने कहा कि बुरहानपुर के किसान तुवर में हल्दी, केले में तरबूज, कपास के साथ तुवर इंटरक्रॉपिंग का प्रयोग अनेक दशकों से कर रहे है। उद्यानिकी में नवाचार हो या खेती में ड्रिप (ठिंबक) पद्धति से सिंचाई अंतर्गत दशकों से बुरहानपुर क्षेत्र अग्रणी रहा है।
श्रीमती चिटनिस ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विश्व की तीन बड़ी बीज उत्पादक कंपनियों का जिक्र करते हुए जो बाजार पर एकाधिकार की बात कही गई है, यह किसान भाईयों और मेहनतकश खेतिहर कृषकों, मजदूरों व ग्रामीणजनों के लिए विचारणीय विषय है और कृषि वैज्ञानिकों के लिए चैलेंज बनता है कि हम स्थानीय जलवायु आधारित पारंपरिक कृषि पद्धतियोें के अध्ययन सहित ऐसी शोध की ओर ध्यानाकर्षित करें जिससे भारतीय कृषि और कृषकों का हित होकर कृषि भूमि में जहरीली फर्टिलाईजर-पेस्टीसाईड्स प्रवेश न करने पाए।
मंत्री श्रीमती चिटनिस ने कहा कि ईकोलॉजी और ईकोनॉमी में समन्वय स्थापित करने हेतु आप किसान को ऐसा फार्मूला और तकनीक दे, जिससे उसकी खेती में सुधार हो और आय में वृद्धि के उपाय सुनिश्चित किए जा सकते है। कृषि उत्पादन बाजार प्रचलन के साथ-साथ पौष्टिक तत्व को ध्यान में रखकर कराए जाने की ओर वैज्ञानिकों द्वारा कृषकों का रूझान बनाया जाना चाहिए। ताकि पौष्टिक खाद्यान्न उत्पादन से समाज में कुपोषण की समस्या से निदान मिल सके। साथ ही साथ प्रचलित बाजार के कारण हो रहे उत्पादन से कृषि भूमि की बिगड़ रही सेहत को भी रोका जा सकता है। कृषि अनुसंधान कार्यशालाओं द्वारा अरहर के पौधे पर लाख की खेती जैसे प्रयोग धारवाड़ पद्धति से अरहर सरसों की खेती में श्री पद्धति आदि का प्रयोग बुरहानपुर में भी किसानों द्वारा मेरे व्यक्तिगत संपर्कांे व सुझाए जाने पर किसानों ने किया। वैज्ञानिक बंधुओं से आग्रह है कि आप कृषि अनुसंधान के साथ-साथ समाज और किसान को अपने ज्ञान का भी लाभ प्रदान करें। क्या आयोडीन नमक अपने घर की गर्म हंडी में पकाई जा रही सब्जी में डाले जाने पर आयोडीन का लाभ दे सकेंगा। ऐसी सामान्य जानकारियां भी वैज्ञानिक तर्क से आप गांव, ग्रामीण और सामान्यजन को अवगत कराएंगे तो हम अपने कर्तव्य का अधिकतम उपयोग करने में सफल सिद्ध हो सकेंगे।
इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान नईदिल्ली के महानिदेशक डॉ.त्रिलोचन महापात्रा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि यहां कृषि क्षेत्र में हुए नवाचारों कार्याे का डाक्यूमेंटेशन  किया जाए। साथ ही जिले में कृषि क्षेत्र में किए गए सराहनीय के कार्यां के वीडियों और ऑडियों को कृषि विज्ञान केन्द्र के पोर्टल पर अपलोड किया जाए तो दूसरे राज्य के किसान भाई भी इसका अनुसरण कर सकें। हमारा खान पान के तरीके को बदलने की जरूरत हैं। इस अवसर पर उप महानिदेशक डॉ.ए.के.सिंह, कलेक्टर दीपक सिंह, कृषि विज्ञान केन्द्र से डॉ.अजीत सिंह, कृषि विज्ञान केन्द्र अध्यक्ष हमीद काजी, सचिव नूर कॉजी, गुलचंद्रसिंह बर्ने, युवराज महाजन, रामभाउ सोनवणे, अमित मिश्रा, बलराज नावानी, मुकेश शाह, विजय सपकाले, गफ्फार मंसूरी, योगेश महाजन, वीरेन्द्र तिवारी, रूद्रेश्वर एंडोले, एवं योगेश चौधरी सहित अन्य अधिकारीगण व कृषकगण उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)