बीमारियों का सैलाब लाते हैं, तंग कपड़े

डॉ.मनोहर लाल भण्डारी, एम.बी.बी.एस., एम.डी., सहायक प्राध्यापक, फिजियोलॉजी

     

त्वचा से चिपके कपड़े यानी तंग कपड़े या स्किनी जींस, मनुष्य शरीर की प्रकृति के न केवल सर्वथा प्रतिकूल हैं बल्कि बेहद घातक हैं, इस तथ्य को अनदेखा कर, हमने उनको फैशन या अंधानुकरण के चलते अपना लिया है I तंग कपड़े आपके शरीर की सुन्दर संघटना और सौष्ठव के बेहतरीन प्रदर्शक हो सकते हैं और सभी का ध्यान अनायास ही आपकी तरफ खींचने की चुम्बकीय शक्ति उनमें होती हैं I बेहतरीन, स्लीम, युवा, स्मार्ट, चुस्त, दुरुस्त, फुर्तीले और अधिकतम आकर्षक दिखने की उत्कंठा, उत्साह और लालसा के व्यामोह में हम इस कदर फंस चुके हैं कि हमने अपने शरीर की प्राकृतिक आवश्यकताओं को गम्भीर रूप से नजरअंदाज कर दिया और अपने ही स्वास्थ्य के महाशत्रु बन चुके हैं I

देश, काल और परिस्थितियों को अनदेखा न करें

आचार, विचार, व्यवहार, खानपान, उपचार आदि तमाम बातों का देश, काल और परिस्थितियों से बहुत ही गहरा सम्बन्ध होता है I बात को संक्षिप्त करने की दृष्टि से, एक उदाहरण ही पर्याप्त मानते हुए, उसका जिक्र कर रहा हूं I जब किसी देश में कोई नई दवा वजूद में आती है और उस पर उस देश के मानवों पर क्लीनिकल ट्रायल हो जाता है, तब भी उसको किसी अन्य देश में लागू करने के पहले सम्बन्धित देश के मानवों पर क्लीनिकल ट्रायल आवश्यक माना जाता है I

ऐसी स्थिति में तंग कपड़ों का अंधानुकरण भारत जैसे ट्रापिकल और सब ट्रापिकल देश में, जो कि गर्म और नमीयुक्त मौसम की विशेषता से सम्पन्न हो, वहां तंग कपड़े मौसम और स्वास्थ्य की दृष्टि से निश्चितरूप से सर्वथा प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे ही, इसमें कोई दो मत नहीं है I इसीलिए हमारे देश में ढीले वस्त्रों का चलन रहा है I दूसरे क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म, दक्षिण भारत में ढीले वस्त्रों के साथ ही लूंगी का चलन है I अन्य प्रदेशों में धोती, कुरते,साड़ी, घाघरे और ढीले सलवार कमीज का प्रचलन आज भी बरकरार है I यह बात अलग है कि ग्लोबल बाजार के बहाने कुछ शक्तिशाली देश भारत को अपना माल बेचने के लिए बेहतरीन बाजार बनाने के लिए अपनी संस्कृति, अपनी परम्पराएं थोपने का काम इतनी चतुराई से करने में सफल हो रहे हैं कि सामान्यरूप से इस बात की कल्पना भी हम नहीं कर पाते है I परिणाम सामने हैं, हमारा पहनावा, हमारा खानपान, हमारी परम्पराएं, हमारी शिक्षा, उपचार की सदियों पुरानी देखी परखी पद्धतियां बेकार, सड़ी गली, अवैज्ञानिक मानी जाकर लोकजीवन से अपदस्थ हो रही हैं I यदि यही अनवरत और निर्बाध चलता रहा तो हमारी पहचान, हमारी संस्कृति, हमारी परम्पराएं इतिहास की काल मंजूषा में समा जाएगी और हमारे देश के व्यापारी, निर्माता, अन्नदाता किसान थोड़े में गुजारा करने को विवश हो जाएंगे I यदि इसे अतिशयोक्ति माना जाता है, तो जरूर ईश्वर की कोई आयोजना होगी I

दुनियाभर में हो रही नई खोजों और शोध के प्रकाश में पता चला है कि स्किनी जीन्स और तंग वस्त्र स्त्री और पुरुष दोनों में बांझपन की सौगात के साथ दूसरी अनेकानेक स्वास्थ्यगत समस्याएं देने के लिए भी जिम्मेदार है I

शरीर के बहाने अपने ही प्राणों (नीरोगिता) को तंग कपड़ों में फंसा कर निचोड़ डालने का हमारा निराला अन्दाज या शौक क्या क्या गुल खिलाता है, आइए जानते हैं I

 जी हां, मैं हूं आपका चंचल तन यानी शरीर

अपनी चंचल प्रवृतियों यानी शरारतों के कारण मेरा नाम पड़ा है, शरीर I शरारत यानी हरकतें न करूं, ये मेरी फितरत में शुमार नहीं है I सच यह है कि, चंचलता या शरारत खत्म तो मेरी यात्रा खात्मे की तरफ बढ़ने लगती है I

लगभग साढ़े छह सौ लचीली और चंचल मांशपेशियों, 206 इस्पाती हड्डियों, 96000 किलोमीटर लम्बी बेहद लचीली रक्तवाहिनियों, बन्द मुट्ठी के बराबर अद्भुत और शक्तिशाली पम्प यानी दिल, जो एक दिन में लगभग दस हजार बार धड़कता है, और रक्त को हर कोशिका तक दिन में एक हजार बार भेजने का पराक्रम भी करता है I अनोखे टिफिनवाले के रूप में काम करनेवाला पांच से छह लीटर रक्त, जो प्राणवायु और पौष्टिक पदार्थ शरीर की हर कोशिका तक मुस्तैदी के साथ ले जाता है और वहां से दूषित पदार्थों को उठाकर लाता है, एक दिन में 180 लीटर रक्त को छानने में सुसक्षम दो किडनियां, आपके द्वारा बिना सोचें समझें गपागप खाए गए अनजाने व्यंजनों के दूषित अंशों को नीलकंठ महादेव की तरह पीने और पांच सौ से ज्यादा तरह के काम सहजता से देखते देखते निपटाने वाला यकृत (लीवर), खरबों तरह की जानकारियां सहेजने की क्षमता से भरपूर और अतुलनीय विश्लेषण शक्ति से सम्पन्न मस्तिष्क, 70 वर्ग मीटर जितने कार्यक्षेत्र को आपके छोटे से आकार में समाहित करने की योग्यता वाले फेफड़ें, गधे को घोड़ा, हाथी, शेर, ऊंट, यानी आपने जो भी अगड़म बगड़म खाया है, उसे किसी भी दूसरे रूप में बदलने में माहिर लगभग 34 फीट लम्बा पाचनतंत्र, दुनिया के तमाम जादूगरों के सामूहिक करिश्माई कौशल्य से ज्यादा हुनरमंद है और तो और दूसरों की नज़रों को अनायास ही खूबसूरती का नायाब नजराना देने वाली आपकी कोमल, स्निग्ध और लावण्यमयी त्वचा, जी हां, ये सब मेरे यानी आपके इस छोटे से खूबसूरत शरीर की अनुपम सम्पति का ही कुछ हिस्सा हैं I एक छोटी सी बात, आज से लगभग तीस पैंतीस साल पहले एक वैज्ञानिक डॉ. केनिव रान्सले ने मेरे अंगों की उम्र का आकलन कर, दुनिया को बताया था कि मनुष्य के गुर्दे दो सौ वर्ष, ह्रदय तीन सौ वर्ष, त्वचा एक हजार साल, फेफड़ें पंद्रह सौ वर्ष, हड्डियां चार हजार साल तक जीवित रह सकते हैं, क्योंकि उनकी रचना ऐसे रासायनिक और जैविक संघटना के तहत प्रकृति ने रची है I उनके आकलन में अतिशयोक्ति लग सकती है परन्तु इतना तो तय है कि ये तमाम अंग आपको सौ साल तक तो स्वस्थ रख ही सकते हैं I

तंग कपड़ों के प्रकाश में शरीर का क्रियाविज्ञान (फिजियोलॉजी)

 तापमान हमारे शरीर की समस्त लगभग 60,000,000,000,000 (औसतन 50 -75 ट्रिलियन) कोशिकाएं एक निश्चित तापमान सन्तुलित रखने के लिए शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को सतत काम करना पड़ता है I चिकित्सा शिक्षा के विद्यार्थियों को शरीर परीक्षण के प्राथमिक पाठ के रूप में जीवन लक्षण (वाइटल साइन) देखना सिखाते हैं, इसके अन्तर्गत विद्यार्थी नाड़ी (पल्स), श्वसन और तापमान का परीक्षण करना सिखते हैं I ये तीनों पैरामीटर दिल, फेफड़े और दिमाग की कार्यक्षमता तथा उनके स्वस्थ होने का अनुमान लग जाता है I जैसे ही बाहर के गर्म वातावरण के कारण आन्तरिक तापमान प्रभावित होता है, हमारे मस्तिष्क में स्थित ताप नियंत्रक केन्द्र पलक झपकते ही सक्रिय होकर भीतर के तापमान को नियन्त्रित करने की जद्दोजहद में लग जाता है, और त्वचा की रक्त नलिकाओं को फैलने का आदेश मिलता है, उनमें रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है और त्वचा में स्थित स्वेद ग्रंथियां भी अधिक पसीना बहाने के आदेश के पालन में जुट जाती हैं I फैली हुई रक्त नलिकाओं से ऊष्मा निकलने लगती है, वह ऊष्मा पसीने को भाप में बदलने के काम आती है I इसतरह भीतर का तापमान पुन: सामान्य होने लगता है I

आयुर्वेद में रोमछिद्रों को मलायन अर्थात् मलद्वार कहा गया है I तंग कपड़ों और खुशबूदार पावडरों से ये मलायन बन्द से हो जाते हैं I तंग वस्त्रों के कारण त्वचा में स्थित रक्त नलिकाओं को फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है, परिणामस्वरूप भीतर का तापमान समुचित रूप से नियन्त्रित नहीं हो पाता है I इसके कारण ह्रदय, मस्तिष्क, फेफड़ों, और शरीर के अन्य अंगों को अधिक तापमान में कार्य सम्पन्न करते में ज्यादा जद्दोजहद करना पड़ती है I रोज रोज की यह मारामारी यानी जद्दोजहद स्वास्थ्य की दृष्टि से हमें बहुत भारी पड़ती है I भीतर का तापमान सामान्य रूप से 38 डिग्री सेल्सियस होता है, और इसे इतना ही बनाए रखने के लिए मस्तिष्क पूरी मुस्तैदी से सतत लगा रहता है, यदि यह 40 से ऊपर चला जाए तो हमारे सारे भीतरी क्रिया कलाप ठप्प होने की कगार पर पहुँच जाते हैं I

 शरीर के स्वस्थ रहने के मूल सूत्र

 हमारे शरीर की मोटेतौर पर चार विशेषताएं हमारे स्वस्थ होने की प्रामाणिक खबर देती हैं I पहला हर अंग, प्रत्यंग, कोशिका तक पर्याप्त रक्त संचार, रक्त में पर्याप्त प्राणवायु की उपलब्धता, तीसरा समस्त अंगों का लचीलापन और चौथा चयापचय से उत्पन्न विजातीय पदार्थों का वहां से निष्कासन I तंग कपड़े इन चारों बुनियादी क्रियाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने में सक्षम होते हैं I

याद रखिए ! रक्त नलिकाएं सख्त हुईं तो हार्ट अटैक, फेफड़े की नलिकाओं का लचीलापन कम तो अस्थमा, जोड़ों का लचीलापन कम तो चलने फिरने में परेशानी और दर्द का सैलाब, त्वचा का लचीलापन कम तो झुर्रियां I विजातीय पदार्थ नहीं हटें तो विष का रूप धारण कर लेते हैं I प्राणवायु और पौष्टिक पदार्थ के बिना जीवन की कल्पना योगी – महायोगी कर सकते हैं आपके अंग प्रत्यंग कदापि नहीं I

 तंग कपड़े, मूल में ही भूल

 त्वचा और शरीर से चिपके और उनको जकड़े हुए वस्त्र रक्त नलिकाओं को संकरा करने में सक्षम होते हैं I रक्त का प्रवाह और आपूर्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है I रक्त नलिकाओं में रुकाव और जमाव की क्रिया शुरू हो जाती है I सीधे शब्दों में कहें तो नदियां तालाबों में बदलने लगती हैं I ठहराव यानी सड़न I नलिकाओं का लचीलापन और जोड़ों की गतियां तंग कपड़ों के कारण नकारात्मक रूप से प्रभावित होने लगती हैं I चलने, मोड़ने, उठने, बैठने तक में दर्द होने लगता है I जवानी की दौड़ में जोड़ जवाब देने लगते हैं I पेट और सीने के बलबूते पर श्वसन की क्रिया सम्पन्न होती है, तंग कपड़े उनको फैलने और सिकुड़ने से रोकने लगते हैं, लिहाजा अनेक अंग प्राणवायु की दृष्टि से थोड़े में गुजारा करने को मजबूर हो जाते हैं I

डैथ बाय क्लॉथ्स: आर यू स्क्विजिंग द लाइफ आउट ऑफ़ यू” नामक लेख में लेखक ने स्वीकार किया है कि वह स्पास्टिक कोलन नामक बड़ी आंत के रोग से ग्रस्त हो गया था, बहुत उपचार कराया, आराम नहीं हुआ I भोजन में फाइबर्स की मात्रा बढाने से थोड़ा आराम पड़ा I परन्तु अन्त में ढीले वस्त्रों से ही वह स्वस्थ हो पाया I

फ्रांस की ग्रेचेन रिओरदन के मुताबिक़ तंग वस्त्रों का चलन सोलहवीं शताब्दी में ही वजूद में आ चुका था और इसके विरुद्ध युद्ध का शंखनाद भी सबसे पहले सन 1897 में “गैलार्ड स मेडिकल जर्नल” में प्रकाशित वैज्ञानिक तथ्यों के जरिए हो चुका था I इसके अनुसार तंग वस्त्रों से ह्रदय, फेफड़ों, रक्तसंचार, स्तन, पेट, लीवर, बड़ी आंत, मांसपेशियां, पित्ताशय, और अन्य अंगों की कार्यक्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है I इस आलेख में दुनियाभर के अनेक वैज्ञानिकों ने सहभागिता की थी I प्रारम्भिक तौर पर इस आलेख में उनके विचारों को जानिए I

 दिल और तंग कपड़े – डॉ. युगेन क्रचफिल्ड के अनुसार तंग कपड़ों के कारण सीने के भीतर स्थित दिल को बेहद दाब का सामना करना पड़ता है I जिसके चलते उसे ज्यादा काम करना पड़ता है, परिणामस्वरूप पल्पिटेशन की बीमारी हो जाती है I यह प्राणघातक नहीं होता है, परन्तु दृष्टिदोष, मृत्यु का अकारण भय होना, और कुछ समय के लिए मूर्छा जैसी स्थिति होना, चक्कर आना आदि बीमारियों से ग्रस्त हो सकता है I

 फेफड़े अपनी पुस्तक “फैशन और फेस्टिशिज्म” में डॉ.डेविड कुंजले ने लिखा है कि तंग कपड़ों का खामियाजा फेफड़ों के निचले हिस्से को उठाना पड़ता है I पर्याप्तरूप से न फैल पाने के कारण वातावरण में मौजूद टी.बी. के बैक्टीरिया वहां अपना स्थायी निवास बना लेते हैं और फिर उनसे लड़ पाना शरीर के बलबूते की बात नहीं रह जाती है I यही स्थिति न्यूमोनिया के लिए भी होती है I

 रक्तसंचार – दिल और फेफड़ों की अपर्याप्त क्षमता के कारण रक्तसंचार प्रभावित होता है और शरीर के तमाम अंग प्रत्यंग स्पानेमिया अर्थात् रक्त में प्राणवायु की कमी से ग्रस्त हो जाते हैं I इसके परिणामस्वरूप चक्कर आना एवं मस्तिष्क तक कम रक्त प्रवाह मिलना जैसी प्राणघाती स्थिति बन सकती है I

 आमाशय – आमाशय का काम है भोजन के टुकड़े टूकड़े टूकड़े करना और पाचक रसों को भोजन में अच्छीतरह से मिलाना I तंग कपड़ों के दबाव के कारण वह अपना काम नहीं कर पाता है I परिणामस्वरूप अपच यानी डिसपेप्सिया हो जाता है I साथ ही पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द और कब्ज की समस्या खड़ी हो जाती है I

 लीवर बेचारा लीवर तंग कपड़ों में न जाने कितनी यातना भोगने को विवश हो जाता है I अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवान्समेन्ट ऑफ़ साइंस द्वारा साइंस नामक मेडिकल जर्नल में लिखा गया था कि उसमें फिशर्स हो सकते हैं, इन्फीरियर विना केवा नामक महाशीरा पर दबाव के कारण रक्त का प्रवाह रुक सकता है I डॉ.त्से लिंग फोंग (अक्टूबर 2009) के अनुसार यदि इस महाशिरा में जाम हो जाए तो लीवर का कैंसर हो सकता है I क्योंकि यही शिरा लीवर से खराब रक्त लेकर जाती है I

बड़ी आंत – डॉ.माजिद अली के अनुसार तंग कपड़ों के दबाव से बड़ी आंत की नैसर्गिक गति बुरीतरह प्रभावित होती है, जिसके कारण गम्भीर किस्म कब्ज हो सकता है I गति के अभाव में यह कब्ज घातक हो सकता है I

 पित्ताशय – तंग कपड़े आमाशय के वाल्यूम (भोजन पाचन के लिए स्थान) को कम कर देते हैं, जिसके कारण व्यक्ति तेजी से दुबला होने लगता है I ट्रेसे कॉर्नफ़ोर्थ ने 2009 में प्रकाशित अपने लेख में बताया था कि शरीर गिरते हुए वजन को रोकने के लिए फैट का चयापचय बढ़ा देता है, जसके कारण लीवर पित्त में अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रॉल स्रावित करता है, और यह अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल पित्ताशय की पथरियों में रूपान्तरित हो जाता है I

ऑर्गन फैल्यूअर – तंग कपड़ों में फेफड़े, शरीर की मांग के अनुरूप प्राणवायु की पूर्ति करने हेतु श्वसन की दृष्टि से अपनी क्षमता के हिसाब से पर्याप्तरूप से फैलना चाहते हुए भी ऐसा नहीं कर पाते हैं I लिहाजा ह्रदय के पास शरीर के सभी अंगों की आपूर्ति के लिए पर्याप्त प्राणवायु नहीं होती है I  बिना प्राणवायु के शरीर के अंग अपना काम दक्षता और क्षमता के साथ कर नहीं पाते हैं I

 मांसपेशियां अधिक समय तक पहना गया कोर्सेट (एक किस्म का तंग वस्त्र, जो कि युवतियों द्वारा छाती के नीचे से कुल्हे तक पहना जाता है) उदर (एब्डोमेन) की मांसपेशियों को निष्क्रिय और कमजोर बना देता है I खासतौर पर यदि युवावस्था में ही इसे पहनना शुरू किया जाए तो उदर की मांसपेशियां ठीक से विकसित ही नहीं हो पाती हैं, जो कि बेहद गम्भीर सिद्ध हो सकती हैं I

आपकी नादानियों का शिकार, गर्भाशय बेचारा गर्भाशय, तंग कपड़ों से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला अंग माना गया है I युवतियां यदि तांड कपड़ों का इस्तेमाल कम उम्र शुरू कर देती हैं तो इसका विकास बुरीतरह बाधित होता है, क्योंकि उदरगुहा में उसके लिए फैलने पसरने के लिए जगह का अभाव होता है I अपनी पुस्तक “डिस्प्लेसमेंट फॉर द वोम्ब” में डॉ.हार्टलैंड लॉ ने लिखा है कि जब भी मूत्राशय या मलाशय खाली होता है, गर्भाशय अस्थायी रूप से डिस्प्लेस होता है I यदि ढीले वस्त्र पहने जाएं तो यह क्रिया हर बार के मूत्र या मल विसर्जन में सामान्यरूप से होती रहती है, परन्तु तंग कपड़ों के चलते जो लिगामेंट्स गर्भाशय को वापस अपनी जगह पर लाने के लिए जिम्मेदार होते हैं, वे कमजोर पद जाते हैं I कमजोर लिगामेंट्स के कारण गर्भाशय का स्थायी डिस्प्लेसमेंट हो सकता है I बेचारा धीरे धीरे नीचे जाने को विवश हो जाता है I इससे उपजे पीठ और सिर में दर्द के कारण महिला दूर तक चलने में असमर्थ हो जाती है I अपनी नैसर्गिक जगह पर नहीं होने से मासिक धर्म के दौरान रक्त को निष्कासित करने में असमर्थ हो जाता है, अधिक रक्त से भर जाने के कारण शरीर प्रसव जैसे दर्द के द्वारा रक्त को एक साथ बाहर फेंकता है I

विशेष टिप्पणी : उपरोक्त सारे शोध उन देशों में सम्पन्न हुए हैं, जहां का मौसम ठण्डा रहता है, जहां सूर्य भगवान बमुश्किल दो सौ दिन ही दर्शन देते हैं, शेष दिनों में उनके दर्शन के लिए लोग तरसते हैं और इसी के चलते वहां एक दूसरे को गुड मॉर्निंग कहकर सूर्यदर्शन की शुभकामना देने की प्रथा प्रचलित है I जबकि हमारा देश गर्म भी है और लोक जीवन को पसीना – पसीना करने वाले भगवान भास्कर प्रतिदिन बिना गुड मॉर्निंग के ही अनायास प्रकट हो जाते हैं I ऐसे में स्किन टाइट जींस और अन्य तंग कपड़े बेचारे अंगों पर क्या क्या कहर बरपाते ढाते होंगे, अकल्पनीय है I

     यकीन मानिए, जब भी आप अपनी मातृभाषा को घर निकाला देकर, किसी विदेशी भाषा को अपने घर में महारानी बनाकर प्रतिष्ठित करेंगे, तो उस देश की परम्पराएं भी आपके भीतर लालसा और लालच बनकर आपके ऊपर सवारी करेगी और आप खुशी खुशी तथा गौरव के साथ उसका बोझ आजीवन ढ़ोते रहेंगे I

ह्रदय से आभार

  • विज्ञान के प्रकाश में आपने इसे पढ़ा, आपका आभार I उचित समझें तो अपने इष्ट मित्रों को अग्रेषित करें I सुझाव अवश्य भेजें I
  • चित्र एवं समस्त सामग्री इंटरनेट और पुस्तकों से जनहितार्थ ली हैं, सभी संबंधितों को दिल की गहराइयों से धन्यवाद I

सन्दर्भ

  • Effects of Wearing Skin Tight Clothes – Be Cautious with Fashion Wears
  • Health and safety hazards of Neck Tie.
  • Beware! Tight Clothes Causing….
  • Health risk associated with wearing too tight fitting clothes…
  • The Tight Pants Syndrome! By Dr. W. Gifford Jones
  • Are skinny jeans bad for your health?
  • Effects of Wearing Skin Tight Clothes – Be Cautious with Fashion Wears
  • Tight trousers and belts damage human reproductive function
  • Disadvantages of wearing tight jean
  • Tight Fit is Not Fit for Health
  • Clothes too tight, body puts up a fight
  • Boxer shorts and loose pants can boost sperm count.
  • Squeezing Into Your Clothes Can Cause Health Issues, Doctors Warn
  • Can tight clothes hurt you? Some physicians say yes
  • Don’t dress to death – Too tight is BAD
  • Check those leggings out…WOW!
  • The health risks of too-tight fashion
  • Wear loose fitting clothing
  • The effects of skin pressure by clothing on circadian rhythms of core temperature and salivary melatonin.Chronobiol Int. 2000 Nov;17(6):783-93.)
  • How bras are linked to breast cancer
  • Your prescription 4 health articles ban the bra, part 3
  • In 2000, in a British study women were instructed to go bra-free for three months.

हार्वर्ड के डॉ. डब्ल्यू. गिल्फोर्ड जोंस, (W. Gifford-Jones M.D) की नीचे लिखी टिप्पणी अवश्य पढ़ें I

(Dr. Walkins suggests that tight neckwear constricts the arteries and decreases the flow of oxygenated blood to the brain and sensory organs of the head.

I’m sure that neither Dr Bessa’s nor Dr. Watkins’ research will win the Nobel Prize in Medicine. But I hope these researchers will continue to explore the effects of tightness. We’ve all seen males whose shirts are so tight they have red faces and eyes that seem to be protruding from their heads.

It’s food for thought if such constriction causes more than visual defects. Maybe constant pressure around the neck should be studied for possible injury to the carotid arteries. This may set the stage for atherosclerosis, and subsequent blood clot and stroke. Or does the decreased oxygen supply trigger Alzheimer’s disease? Maybe it even causes that tingling sensation in the right ear!

I for one am eternally grateful to Dr. Watkins. I’m often asked if I’ve lost weight and should see a doctor even though I haven’t changed an ounce in 20 years. It’s because I’ve also hated tight shirts. Now I tell critics to read Dr. Watkins’ research!)

लेखक परिचय : राष्ट्रीय संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नईदिल्ली.  चिन्तक, लेखक, पर्यावरण व सामाजिक कार्यकर्ता, एम.डी. की थीसिस अपनी मातृभाषा हिन्दी में प्रस्तुत करने वाले देशभर के आज तक के पांच चिकित्सकों में से एक I शालेय पाठ्यक्रम में स्वास्थ्य जागरूकता विषय को सम्मिलित किए जाने हेतु प्रयासरत I

सम्पर्क: 83/1, श्रीकान्त पैलेस कॉलोनी, बिचोली हप्सी रोड, इन्दौर, 452 016,

मोबाइल – 094250 32324, email –  drmbhandari@gmail.com

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)