सोशल एटॉप्सी की मदद से कम हो सकती हैं असामयिक मौतें

शुभ्रता मिश्रा

Twiter handle : @shubhrataravi

कई बार बेहतरचिकित्सकीयसुविधाओं के बावजूद लोग असमय मौतों का शिकार बन जाते हैं। भारतीय शोधकर्ताओं के एक ताजा अध्ययन में इस तरह की असमय मौतों के लिए स्वास्थ्य प्रणाली, सामाजिक और व्यावहारिक कारणों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार पाया गया है।वयस्कों की असमय मृत्यु के सामाजिक कारणों का पता लगाने के लिए विकसित किए गए एकीकृत एटॉप्सी टूल के उपयोग से मिले निष्कर्षों के आधार पर चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) के शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं।

इस एटॉप्सी टूल के उपयोग से प्राप्त निष्कर्षों में कई प्रमुख सामाजिक तथ्य उभरकर आए हैं। ग्रामीण इलाकों में समय पर डॉक्टरों का न मिलना, डॉक्टर तथा रोगी के बीच संवाद की कमी, दवाओं का नियमित सेवन न होना, मरीजों को बड़े अस्पताल तक ले जाने के लिए देर से परामर्श मिलना, परिवार के सदस्यों को बीमारी के बारे में पता न चलनाया देर से पता चलना औरपरिजनों द्वारा बीमारी को गंभीरता से न लेना इनमें शामिल हैं।

इस अध्ययन में पंजाब के एक ग्रामीण विकासखंड क्षेत्र में स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, सहायक नर्स, मिडवाइफ, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सरपंच, शिक्षकों इत्यादि से एक साल के दौरान 600 मृतकों की मौत के बारे में जानकारी हासिल की गई है। मृतकों की आयु, लिंग, जाति, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा और व्यवसाय आदि की जानकारियों के आधार पर सोशल एटॉप्सी डाटाबेस तैयार कियागया है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, अध्ययन में शामिल 21 प्रतिशत लोगों की प्राकृतिक मृत्यु हुई थी। जबकि,16 प्रतिशत पक्षाघात,8.5 प्रतिशत कैंसर, 7.7 प्रतिशत हृदयाघात और 5.7 प्रतिशत मौतें दुर्घटनाओं के कारण हुई थीं। इन मृतकों में शामिल 12प्रतिशत का घरेलू इलाज चल रहा था। 70.7प्रतिशत लोगों को इलाज के लिए बाहर ले जाया गया था और 17.3प्रतिशत लोगों की मौत बिना किसी देखभाल या इलाज न होने के कारण हुई थी।

अध्ययन शामिल मृतकों में लगभग 29.1 प्रतिशत शराब पीते थे और अधिकतर लोग शराब की लत के कारण बीमारियों से ग्रस्त थे। 8.2प्रतिशत लोग धूम्रपान और 11.8प्रतिशत लोग तम्बाकू चबाने की लत के शिकार थे। इसके अलावा 2.7प्रतिशत लोग ऐसे भी थे, जो ड्रग्स का सेवन करते थे। इस तरह की सभी बुरी लतों का शिकार सिर्फ पुरुषों को ही पाया गया है। यह शोध हाल में प्लाज वन नामक शोध जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

इस अध्ययन में शामिल प्रमुख शोधकर्ता डॉ. मनमीत कौर ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “चिकित्सा सेवाओं के विकास के बावजूद ग्रामीण इलाकों में बीमारियों और नशे की लत के प्रति सामाजिक जागरूकता नहीं होना वयस्कों की मृत्यु का एक बड़ा कारण है। इन मौतों को रोकने के लिए चिकित्सा निदानों की समय पर उपलब्धता और सामाजिक हस्तक्षेप बहुत महत्वपूर्ण हैं। सामान्यतौर पर सोशल एटॉप्सी का उपयोग मातृएवं शिशु मृत्यु औरकुछ विशेष बीमारियों के लिए ही किया जाता है।इस अध्ययन में सोशल एटॉप्सी का उपयोग असमय मौतों के सामाजिक कारणों का पता लगाने के लिए किया गया है।”

चिकित्सकीय भाषा में एटॉप्सी का अर्थ चीरफाड़ द्वारा शव का परीक्षण करने से लगाया जाता है। वास्तव में एटॉप्सी मृत्यु के कारणों को जानने की प्रक्रिया है। मृत्यु के कारणों का पता लगाने के लिए चीरफाड़ के अलावा वर्बल एटॉप्सी और सोशल एटॉप्सी का भी उपयोग किया जाता है। वर्बल एटॉप्सी में जहां मृतक के परिजनों से मौखिक बातचीत की जाती है, वहीं सोशल एटॉप्सी के अंतर्गत असमय मृत्यु के लिए जिम्मेदार सामाजिक परिस्थितियों की पड़ताल की जाती है।

सामाजिक जागरूकता नहीं होने के कारण अक्सर लोग पीलिया, लकवा, सांप काटने जैसी समस्याओं में चिकित्सकीय इलाजको छोड़कर घरेलू उपचार या झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं। इस मामले में बुजुर्गों और महिलाओं की आमतौर पर उपेक्षा की जाती है और उनके इलाज में लापरवाही बरती जाती है। परिवार में युवाओं की प्रवृत्तियों की तरफ ध्यान नहीं दिया जाने से भी समस्या को बढ़ावा मिलता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, समाज में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की परिवारों तक पहुंच, बीमारियों की पहचान तथा निदान और नशे की लत के बारे में जागरूकता का प्रसार जरूरी है। इसके लिए सोशल एटॉप्सी जैसे टूल की मदद से देश के अन्य क्षेत्रों में भी मृत्यु के सामाजिक कारणों की पहचान की जा सकती है और असामयिक मौतों को रोका जा सकता है। अध्ययनकर्ताओं की टीम में डॉ. मनमीत कौर के अलावा ममता गुप्ता, पी.वी.एम. लक्ष्मी, शंकर प्रिंजा, तरुणदीप सिंह, तितिक्षासिरारीऔरराजेश कुमार शामिल थे। (इंडिया साइंस वायर)

One comment

  1. Rachna Priyadarshini

    बढिया एवं सूचनात्मक आलेख

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)