यूपीए बनाम एनडीए : किस सरकार में कितनी निगरानी ?

दिल्ली : पिछले दिनों केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने 10 सरकारी एजेंसियों को जब लोगों के निजी कम्प्युटरों पर नज़र रखने का अधिकार दिया तो काँग्रेस ने सरकार के इस कदम का पुरजोर विरोध शुरू किया। काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि “मोदी इस देश को निगरानी राष्ट्र में बदलना चाहते हैं”। यहीं से ये भी सवाल उठा कि यूपीए की मनमोहन सरकार ने भी क्या ऐसी निगरानी की थी, जवाब आरटीआई के सरकारी उत्तर से निकला।

– मनमोहन सरकार में हर महीने 9000 फोन कॉल्स पर निगरानी की गई
– 500 ई-मेल्स पर भी रखी जाती थी नज़र

जी हाँ आप ये जानकार हैरान हो जाएँगे कि यूपीए की मनमोहन सरकार ने भी साल 2013 में हर महीने 9000 फोन कॉल्स और 500 ई-मेल्स की निगरानी करवाई थी। आरटीआई के ज़रिए निकाली गई जानकारी में ये खुलासा हुआ है।

– 6 अगस्त 2013 को दाखिल की गई थी आरटीआई
– प्रसेनजीत मंडल ने आरटीआई दाखिल की थी

जवाब में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने कहा था कि सरकार ने

– यूपीए की केन्द्र सरकार ने हर महीने करीब 7500 से 9000 फोन कॉल्स की जानकारी जुटाई
– 300 से 500 ई-मेल संदेशों पर नज़र रखने के आदेश दिए

सरकार ने इसके पीछे वजह बताई की मुंबई बम हमले के बाद यूपीए सरकार ने इस तरह के आदेश दिए थे। स्वामी अमृतानंद देवतीरथ ने भी 24 दिसंबर 2013 को एक आरटीआई लगाई थी। इसके जवाब में बताया गया कि इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) समेत नौ जांच एजेंसियां भारतीय टेलीग्राफ एक्ट 1885 के तहत कानूनी रूप से निगरानी रखती थीं।

हाल की मोदी सरकार ने एक आदेश जारी कर 10 जांच एजेंसियों को देश के सभी कम्प्यूटरों पर नज़र रखने का अधिकार दिया है। जिसके विरोध में यह भी कहा गया कि “ये सच में घर-घर मोदी है”। कुछ विपक्षी दलों ने इस आदेश को “निगरानी सरकार” की भी संज्ञा दी है।

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