इन घोषणाओं, वायदों के लिए धन कहाँ से लाओगे ?

राकेश दुबे
…और भाजपा का भी  घोषणा पत्र संकल्प पत्र के नाम से आ गया | इसमें भी बहुत सी लोक लुभावन बातें है | सवाल भाजपा- कांग्रेस दोनों से है इतनी राहत देने वाली योजनायें लागू  करने के लिए धन कहाँ से आएगा ? कर के बोझ तले देश का मध्यम वर्ग दबा चला जा रहा है | क्या उसे यह जानने का हक नहीं है की उसकी गाढ़ी कमाई से वसूला जा रहा धन  [ कर] माल-ए-मुफ्त दिल –ए- बेरहम की तर्ज पर लुटाने का हक राजनीतिक दलों को किसने दिया है | आने वाली और जानेवाली सरकार कल्याणकारी होगी, यह संविधान कहता है, पर सिर्फ वोट जुगाड़ने की खातिर करदाताओं को  निचोड़ने का हक शायद किसी को नहीं है | ये वादे कैसे पूरे होंगे इस पर कोई खुलासा आना चहिये, २३ मई को आने वाले नतीजे किसी के भी पक्ष में हो यह अभी से स्पष्ट होना चाहिए कि जिन योजनाओं का वादा मतदाता से कर रहे हो उसके लिए धन कहाँ से आएगा ?
 भाजपा का घोषणा पत्र “अंत्योदय दर्शन है -सुशासन मंत्र है”,के शब्दों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  द्वारा देश के सामने पेश किया।  २०१४  में बहुमत हासिल करने वाली भाजपा इस बार किन वादों को अपने घोषणापत्र में शामिल किया है, यह जानने में देश को बड़ी उत्सुकता थी और अनुमान के मुताबिक पूरी नाटकीयता के साथ ७५  संकल्पों वाला संकल्प पत्र भाजपा के बड़े नेताओं ने पेश किया। २०१४  की तरह इस बार भी बड़ी-बड़ी बातें इस संकल्प पत्र में समाहित हैं।अंतर यह है कि तब मुखपृष्ठ पर अटल-आडवाणी-जोशी थे, अब नहीं हैं|  उनके नीचे नरेन्द्र मोदी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज,शिवराज सिंह चौहान, डा.रमन सिंह, वसुंधरा राजे और मनोहर पर्रीकर थे। मनोहर पर्रीकर तो अब इस दुनिया में रहे नहीं और राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ की सत्ता भी जा चुकी है। इससे पूर्व मुख्यमंत्रियों को संकल्प पत्र में जगह नहीं मिली। अटलजी का निधन हो चुका है और श्री आडवाणी व श्री जोशी को मार्गदर्शक मंडल में जबरिया राजनैतिक संन्यास भोग रहे हैं | संकल्प पत्र के मुखपृष्ठ पर अकेले नजर आ रहे हैं नरेन्द्र मोदी। जो बताता है चुनाव पार्टी से ज्यादा नरेंद्र मोदी लड़ रहे हैं |
एक बार फिर राम मंदिर को घोषणापत्र में स्थान दिया है और कहा है कि संविधान के दायरे में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संभावनाओं की तलाश की जाएगी। इस बार राममंदिर के साथ सबरीमला मंदिर का भी जिक्र है। कहा गया है कि सबरीमला मंदिर जैसे मामलों में आस्था और विश्वास के विषयों को संवैधानिक संरक्षण दिया जाएगा।  देश के वर्तमान संवैधानिक ढांचे में ये दोनों बाते एक साथ कैसे निभेंगी ? जो बात सबरीमला के लिए लागू करने की कोशिश होगी, क्या राममंदिर पर भी वही लागू होगी ? प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, राष्ट्रीय व्यापार आयोग की स्थापना, छोटे दुकानदारों को पेंशन, प्रशिक्षित डॉक्टरों और जनसंख्या का अनुपात १:४०० करने का प्रयास जैसी घोषणाओं के लिए धन कहाँ से आएगा इसका कोई खुलासा नहीं है | समान नागरिक संहिता, तीन तलाक खत्म करना,महिलाओं को ३३  प्रतिशत आरक्षण और गंगा सफाई जैसे  वायदे फिर से दोहराए गये हैं |
भाजपा का वादा है कि वो भारत को वर्ष २०२५ तक ५  लाख करोड़ डॉलर और साल २०३२  तक १०  लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बना देगी । फिर दूर का ख्वाब? भाजपा के घोषणापत्र में इस बार काले धन की वापसी, हर खाते में १५  लाख, २ करोड़ रोजगार जैसी बातें नहीं हैं| कांग्रेस ने भी ऐसे सब्जबाग़  दिखाए हैं| दोनों ही यह बताने को तैयार नहीं इन सपनों को हकीकत में कैसे बदलेंगे ? इनमे रंग भरने के लिए जिसका रंग उड़ना है वो देश का मध्यम वर्ग है |

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