भाजपा से दूर क्यों हो रहा है अनुसूचित समाज!

 आर एल फ्रांसिस

दलित चिंतन पर भाजपा सरकार ने बहुत काम किया है। भले ही वह मुंबई के इंदु मिल को आंबेडकर स्मारक बनाने की दलितों की वर्षों पुरानी  मांग हाे, स्मारक बनाने के लिए 425 करोड़ का फंड मुहैया कराना या लंदन के जिस मकान में अंबेडकर ने पढाई की थी, उसे खरीदने का बड़ा काम या 26 नवम्बर को ‘संविधान दिवस’ घोषित करना। इसके वावजूद दलित समाज संघ परिवार आैर भाजपा से दूर हुआ है।

कभी रोहित वेमुला के बहाने आैर कभी हिंदू राष्ट्र का शाेर कभी सहारनपुर में हिंसा आैर अब एससी-एसटी एक्ट में बदलाव मामले काे लेकर सेकुलर जमात ने संघ परिवार आैर भाजपा सरकार को ऐसा बदनाम बनाया है कि पूरे देश में दलित भ्रमित हुआ है। तथाकथित सेकुलर जमात दलित और आदिवासियों के मन में यह बात बैठाने में सफल रहे हैं कि भाजपा आैर संघ परिवार उनका आरक्षण खत्म करने के लिए संविधान काे बदलना चाहता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को एक आदेश में एससी/एसटी ऐक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी और इसके तहत मामलों में तुरंत गिरफ़्तारी की जगह शुरुआती जांच की बात कही थी। एससी/एसटी (प्रिवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटीज़) ऐक्ट अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को अत्याचार और भेदभाव से बचाने वाला क़ानून है। सुप्रीम कोर्ट का यह  फ़ैसला आते ही सेकुलर जमात ने दलित और आदिवासियों के बीच शाेर मचाना शुरू किया। दलितों एवं आदिवासियों के अधिकारों के लिए काम कर रहे कई संगठनाें ने दलित समुदाय से आह्नन किया है कि वह  इस बार 14 अप्रैल को डॉ. अम्बेडकर की जंयती को ‘‘संविधान रक्षा दिवस’ के रूप में मनाए।

आज की तारीख में भाजपा के पास सबसे ज्यादा दलित और आदिवासी नेता है कई माेदी सरकार में मंत्री है। रामविलास पासवान और रामदास आठवले जैसे सहयाेगी भी है। इसके बावजूद भाजपा सरकार दलित और आदिवासी समाज में वह भराेसा कयाम नहीं कर पाई, कि संघ आैर माेदी सरकार उनके अधिकार छीन नहीं रहे बल्कि उन्हें आैर मजबूत कर रहे है। मोदी सरकार के समय जितना सम्मान डॉ. अम्बेडकर काे दिया गया आैर जितनी याेजनाएं इस सरकार में लागू की गई वह किसी आैर सरकार के समय नहीं हुआ।

मोदी सरकार में ही  मुंबई के दादर स्थित इंदु मिल को आंबेडकर स्मारक बनाने की दलितों की वर्षों पुरानी  मांग को स्वीकृति मिली । बात यहीं तक सिमित नहीं रही, इंदु मिल में बाबा साहेब का स्मारक बनाने के लिए 425 करोड़ का फंड भी मुहैया कराया गया। लन्दन के जिस तीन मजिला मकान में बाबा साहेब अंबेडकर ने दो साल रहकर पढाई की थी, उसे चार मिलयन पाउंड खरीदने का बड़ा काम हुआ ।

बाबा साहेब की 125 वीं जयंती वर्ष में भाजपा की ओर से ढेरों ऐसे काम किये गए जिसके समक्ष अंबेडकर-प्रेम की प्रतियोगिता में उतरे बाकी दल बौने बन गए । इनमें एक बेहद महत्त्वपूर्ण काम था 26  नवम्बर को ‘संविधान दिवस’ घोषित करना एवं इसमें निहित बातों से जन-जन तक पहुचाने की अपील। इसके लिए सरकार ने 2015 में  संसद के शीतकालीन सत्र के शुरुआती दो दिन संविधान पर चर्चा में डॉ. अम्बेडकर को श्रद्धांजलि देते हुए मोदी ने कहा था ,  कि  – ‘अगर आंबेडकर ने इस आरक्षण की व्यवस्था को बल नहीं दिया होता, तो कोई बताये कि मेरे दलित , पीड़ित, शोषित समाज की हालत क्या होती? परमात्मा ने उसे वह सब दिया है, जो मुझे और आपको दिया है, लेकिन उसे अवसर नहीं मिला और उसके कारण उसकी दुर्दशा है । उन्हें अवसर देना हमारा दायित्व बनता है ।

जहां तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बात है ताे वह कई बार कह चुका है कि संघ मानसिक-वैचारिक सोच के मद्देनजर न तो दलित-पिछड़ा विरोधी है और न ही आरक्षण विरोधी। लाेगाें काे याद हाेगा कि संघ ने डॉ. अम्बेडकर काे भारतीय पुनरुत्थान के पांचवें चरण के अगुआ के रूप में श्रादांजलि दी थी। चर्च  के बाद आरएसएस ही ऐसा सामाजिक संगठन है, जिसके आदिवासियों और दलितों के बीच कई कार्यक्रम चलते हैं। आरएसएस ने कई बार सार्वजनिक ताैर पर कहा है कि जब तक सामाजिक-आर्थिक-शैक्षिक असमानता रहेगी, तब तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी। इसके बावजूद संघ के खिलाफ दुष्प्रचार चलाया जाता है।

दलिताें के नाम पर राजनिति करने वाले संघ आैर भाजपा काे कटघरे में खड़ा कर रहे है। भाजपा के कुछ अपने ही दलित सांसदाें आैर उसके सहयाेगी  दलित मंत्रियाें ने आरक्षण नीति आैर संविधान की रक्षा में जाे बयान दिए आैर जाे हड़बड़ी दिखाई उससे दलित समाज के बीच भाजपा आैर संघ विराेधी संदेश गया है । हालांकि दलित चिंतन पर किसी भी सरकार ने ऐसा काम नहीं किया है। डॉ. अम्बेडकर की याद में कई परियाेजनाआें काे पूरा करके उन्हें उचित स्थान दिलाया  है। 13 अपैल काे उनके जन्मदिन की पूर्व संध्या पर दिल्ली के 26 अलीपुर हाउस काे देश काे समर्पित करने जा रही है जहां डॉ. अम्बेडकर ने अपने जीवन का अंतिम समय बिताया था।

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