Tuesday , 29 September 2020
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एफडीआई के बहाने हमारे हाथ बांधने कोशिश की जा रही है: डॉ. भागवत

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लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अधिवेशन में बोले संघ के सरसंघचालक

इंदौर। लघु उद्यमियों को संगठित करने वाली अखिल भारतीय संस्था लघु उद्योग भारती का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन इंदौर में सम्पन्न हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने मुख्यवक्ता के रूप में देशभर से आए प्रतिनिधियों और लघु उद्योजकों को संबोधित किया। मध्यप्रदेश शासन के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित हुए। अधिवेशन को लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजू भाई वगासिया तथा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष उल्लास वैद्य ने भी प्रतिनिधियों को संबोधित किया। कर्नाटक के एच.वी. कृष्णा लघु उद्योग भारती के नए अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
अधिवेशन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने कहा कि दुनियाभर के देश आर्थिक मंदी से जुझ रहे हैं। विशेषकर विकसित देशों पर आर्थिक मंदी की मार बहुत तगडी पड़ी है। आज सिर्फ रूपया ही नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था ही वेंटीलेटर पर है। लेकिन ऐसी स्थिति में भी भारत पर कम प्रभाव पड़ा है। इसका कारण भारत का स्वदेशी उद्योग है। मध्यम और लघु उद्योगों ने देश की आर्थिक व्यवस्था को बहुत बड़ा संबल दिया है। लघु उद्योगों का ढांचा ऐसा है कि इसमें पूरा परिवार सहयोग देता है और उसमें भागीदार रहता है। इसके कारण आर्थिक व्यवस्था विकेन्द्रित रहती है और इसकी डोर किसी एक के हाथ में नहीं रहती। उन्होंने कहा कि ये लघु उद्योग ही हैं जो न सिर्फ बड़े पैमाने पर रोजगार देते हैं, बल्कि निर्यात के द्वारा विदेशी मुद्रा लाने में भी काफी सहयोग करते हैं।
डॉ. भागवत ने कहा कि जब डंकल प्रस्ताव आया तब स्वदेशी जागरण मंच अस्तित्व में आया। उस समय कुछ लोगों ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विकास विरोधी है। लेकिन आज डंकल समझौतों का दुष्परिणाम सामने आ रहा है। उदारीकरण और वैश्वीकरण के नाम पर विकासशील देशों का शोषण बढ़ा है। आज बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ विकासशील देश हमारे पीछे खड़े हैं। लेकिन एफडीआई के बहाने एक बार फिर हमारे हाथ बांधने की कोशिश की जा रही है। एफडीआई को लेकर डॉ. भागवत ने लघु उद्यमियों और आर्थिक विशेषज्ञों के समझ कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि हम एफडीआई को खुदरा व्यापार में क्यों घुसने देते हैं? सुरक्षा उत्पादों में भी एफडीआई की चर्चा क्यों की जा रही है? क्या देश की सुरक्षा भी भाड़े पर दे दी जायेगी?
उन्होंने कहा कि हम स्वतंत्र देश हैं, हमें अमेरिका जैसे देशों की ओर देखने की जरूरत नहीं है। हम अमेरिका, रूस, जापान और चीन से सीख जरूर लें, लेकिन जिन मामलों में वे ठोकर खा चुके हैं उन्हें हम क्यों स्वीकार करें? क्या जिन प्राचीन मूल्यों में हमें प्रगति का रास्ता दिखे हम उसे भी छोड़ दें? हमें अपने देश के लिए बेहतर अर्थव्यवस्था का मॉडल खुद तैयार करना होगा। अगर देश के युवाओं को स्वावलंबी और अनुशासित बनाएं तो आर्थिक व्यवस्था स्वमेव मजबूत होगा। इसके लिए हमें एक ही राह पर चलने की बजाए जहां से उचित मार्ग मिले उसे अपनाने की नीति पर चलना चाहिए। देश की आर्थिक व्यवस्था में लघु उद्योगों का महत्व बताते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि बड़ी कंपनियों और उद्योगों की जगह छोटे और मझोले उद्योग ही अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकते हैं। आर्थिक मंदी का ज्यादा प्रभाव बड़े उद्योगों पर ज्यादा पड़ता है। भारत में कुशलता और कारीगरी की कमी नहीं है। लघु उद्योग भारती को भी स्वदेशी और स्वावलंबन के आधार पर आगे बढ़ना होगा।
इस अवसर पर लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष वजुभाई वगासिया ने कहा कि लघु उद्योगों के लिए पृथक श्रम कानून की आवश्यकता है। लघु उद्योगों की उन्नति के लिए विशेष आयोग का गठन् किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की अर्थनीति अच्छी हो इसके लिए उद्यमियों को भी राजनीति में आना होगा। अधिवेशन में विशेष अतिथि के रूप उपस्थित मध्यप्रदेश के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मध्यप्रदेश की सरकार लघु उद्योगों के विकास के लिए अनेक प्रयास कर रही है। भाजपा सरकार नीति और कार्यक्रम के स्तर पर युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 50 हजार युवाओं को 25-25 लाख रूपये तक के ऋण देने का प्रावधान किया है। लघु उद्योगों को बढ़ा देने के लिए सरकार ने विकासख्ंाड स्तर तक कौशल उन्नयन हेतु प्रशिक्षण देने और विपणन के लिए हाट-बाजार की योजना तैयार की है।
राष्ट्रीय अधिवेशन में मध्यप्रदेश के अध्यक्ष उल्लास वैद्य ने स्वागत भाषण दिया और प्रांतीय मंत्री तथा कार्यक्रम के संयेाजक समीर मुंद्रा ने संचालन किया। अधिवेशन में श्रेष्ठ 10 उद्यमियों का सम्मानित किया गया। सम्मानित उद्यमी – डॉ. नेमीचंद जैन (उज्जैन), शिरीष परांडेकर (भोपाल), शिवनारायण शर्मा (इंदौर), सुनीत जैन (गुना), रूपनारायण विसानी (शाजापुर), डज्ञॅ. सुषमा अरोड़ा (देवास), अनिल ए राजे (रायसेन), गोपाल जयसवाल (पीथमपुर), सुनील पाटीदार (खरगोन-बड़वानी) और शैफाली कौशिक (ग्वालियर).
अनिल सौमित्र

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