Friday , 28 January 2022
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कचरे से 29 जिलों में बनेगी 308 मेगावाट बिजली

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भोपाल। प्रदेश में नगरीय अपशिष्ट यानी कचरे से 29 जिलों में 308.10 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। इसके लिए राज्य सरकार के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग ने कुल 34 कंपनियों का पंजीयन किया है और ये निर्माणाधीन हैं। इन्हें प्रोत्साहित करने के लिए विभाग ने बायोमास आधारित विद्युत (पावर) परियोजना क्रियान्वयन नीति 2011 जारी कर दी है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2006 में बायोमास से बिजली उत्पादन की नीति जारी की गई थी और अब पांच साल बाद इसके क्रियान्वयन की नई नीति जारी की गई है। बायोमास में नगरीय अपशिष्ट यानी कचरे के अलावा भूसी, डंठल, गांठ, पुआल, खोल, छाल, टहनियां, फली, छाल, लैण्डफिल गैसेस, अल्कोहालिक यूल्स आदि का भी उपयोग होता है। बायोमास दरअसल कार्बन, हायड्रोजन एवं आक्सीजन का मिश्रण है। नई क्रियान्वयन नीति में बायोमास से बिजली की उत्पादक कंपनियों को संयंत्र को सुचारु रुप से चलाने के लिए 15 प्रतिशत ईधन पर परिक ईधन जिसमें जलाऊ लकड़ी शामिल नहीं है, के उपयोग की भी अनुमति प्रदान की गई है। एक जानकारी के अनुसार देश में 32 प्रतिशत ऊर्जा बायोमास से ही मिलती है तथा इस पर देश की 70 प्रतिशत जनसंख्या निर्भर है। नई क्रियान्वयन नीति में प्रावधान किया गया है कि वन क्षेत्र से मात्र दो किलोमीटर की न्यूनतम दूरी तक इसका बिजली उत्पादन संयंत्र स्थापित किया जा सकेगा तथा यह संयंत्र अधिकतम पंद्रह मेगावाट बिजली का उत्पादन कर सकेगा। यदि कंपनी स्वयं की कृषि से बायोमास प्राप्त करती है तो यह जिले में उपलब्ध कुल बायोमास के अतिरिक्त माना जाएगा। एक मेगावाट के लिए दो एकड़ राजस्व भूमि दी जाएगी। यदि भूमि निजी है तो उसके विकास पर स्टाम्प डयूटी में पचास प्रतिशत की छूट दी जाएगी। परियोजना के क्रियान्वयन के पूर्व खरीदे गए उपकरणों पर प्रवेश कर की छूट मिलेगी। नई क्रियान्वयन नीति के तहत बायोमास संयंत्र को उद्योग का दर्जा मिलेगा तथा इसे उद्योग संब‌र्द्धन नीति के सभी लाभ प्राप्त हो सकेंगे। संयंत्र चालू होने के बाद दस वर्ष तक विद्युत कर एवं उपकर की छूट दी जाएगी। मप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित व्हीलिंग शुल्क में से चार प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा अनुदान स्वरुप दस साल तक दिया जाएगा। बायोमास बिजली की दरें विद्युत नियामक आयोग तय करेगा तथा राज्य सरकार की कंपनियों के अलावा अन्य को भी यह बिजली बेची जा सकेगी जिसकी दर उभय पक्ष की स्वतंत्रता पर छोड़ी गई है। परियोजना की अनुमति मिलने के बाद दो साल में बिजली उत्पादन यानी कमीशनिंग करना जरूरी होगा तथा परियोजना की लागत का एक प्रतिशत परफार्मेन्स गारंटी के रुप में जमा करना होगा जिसे चार चरणों में बाद में वापस भी कर दिया जाएगा।

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